बच्चों के मनोरंजन के लिए किए नवाचार से मिली पहचान

बच्चों के मनोरंजन के लिए किए नवाचार से मिली पहचान

करौली. करौली में कुछ नया कर दिखाने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे विभोर शर्मा, युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने स्वयं की शिक्षा तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की दिशा में अनुकरणीय बानगी पेश करने के साथ करौली में मनोरंजन पार्क की एक अनूठी पहल भी की है। इस नवाचार से उनको करौली में नई पहचान मिली है। बच्चों को कुछ नया करने की इच्छा को लेकर विभोर ने एक साल पहले आरजे-34 नाम से मनोरंजन पार्क भी शुरू किया है।

By: Surendra

Published: 12 Jan 2021, 09:25 AM IST

बच्चों के मनोरंजन के लिए किए नवाचार से मिली पहचान

करौली. करौली में कुछ नया कर दिखाने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे विभोर शर्मा, युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने स्वयं की शिक्षा तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की दिशा में अनुकरणीय बानगी पेश करने के साथ करौली में मनोरंजन पार्क की एक अनूठी पहल भी की है। इस नवाचार से उनको करौली में नई पहचान मिली है।
करौली में केशवपुरा के समीप के निवासी विभोर की वैसे तो पारिवारिक पृष्ठभूमि शिक्षा से जुड़ी रही है। दिवंगत हो चुके उनके बाबा ईश्वरी प्रसाद शर्मा प्रसिद्ध शिक्षाधिकारी थे। उनके सानिध्य में ही मम्मी-पापा ने निजी स्कूल शुरू किया। यह स्कूल तो अभी भी चल रहा है लेकिन बच्चों को कुछ नया करने की इच्छा को लेकर विभोर ने एक साल पहले आरजे-34 नाम से मनोरंजन पार्क भी शुरू किया है। इन दिनों वह इस पार्क को और विकसित करने के मिशन में लगे हैं।
करौली में बच्चों तथा सभ्य परिवार के सदस्यों के मनोरंजन के लिए यह लघु रूप में अलग हटकर पहला प्रयास है। करौली में अनेक धनाढ्य है और प्रतिष्ठित व्यवसायी भी लेकिन किसी ने मनोरंजन पार्क संचालन की नहीं सोची। विभोर ने लीक से हटकर कुछ नया करने की खातिर यह पहल की है। विभोर कहते हैं कि उनको बच्चों से बेहद लगाव है और करौली में कुछ नया करने का जज्बा भी मन में सदैव रहता है। चूंकि बच्चों के मनोरंजन के लिए करौली में कोई स्थान नहीं था। इस कमी को देखकर मनोरंजन पार्क संचालन का नवाचार किया है। कोरोना महामारी के बावजूद मात्र एक वर्ष में ही यह स्थान चर्चाओं में आया है। यहां आसपास के शहरों व कस्बों से भी लोग आने लगे हैं। विभोर बताते हैं कि यहां पर थ्री डी थियेटर का निर्माण भी जल्दी पूरा होने के बाद यह स्थान बच्चों के लिए और बेहतर हो सकेगा। इस नवाचार के जरिए उनकी मंशा करौली को विकसित रूप में प्रदर्शित करने की रही है।

तीन विषयों में किया पीजी
व्यावसायिक क्षेत्र में आने से पहले विभोर ने शिक्षा के क्षेत्र में अपना जुनून दिखाया। मास्टर ऑफ कम्प्यूटर साइंस (एमसीए) करने के बाद जयपुर में एक कंपनी में नौकरी की लेकिन इससे विभोर संतुष्ट नहीं रहे। उन्होंने नौकरी छोड़ी और बीएड की डिग्री हासिल की। इसके बाद एक-एक करके तीन विषयों समाज शास्त्र, राजनीति विज्ञान और अंग्रेजी सहित्य में पीजी (पोस्ट ग्रेजूयेट) की डिग्री हासिल की। विभोर बताते है कि उनके बाबा दो विषयों में पीजी थे। इसका जिक्र वो बार-बार किया करते थे। इससे प्रेरित होकर मैंने तीन विषयों में पीजी किया। इस पर बाबा बेहद खुश हुए थे। विभोर अपने बाबा को आदर्श मानते है कहते हैं कि उनसे मुझे ंसंस्कार, अनुशासन और संघर्ष में कभी हार नहीं मानने की नसीहतें मिली हैं। उनकी ये सीख ही मुझे आगे बढऩे प्रेरित करती हैं।

निर्धन परिवार की बेटी ली गोद
विभोर में परम्परा से हटकर कुछ नया करने का जुनून है। इसी से जुड़ी उनके जीवन की खास बात यह है कि उन्होंने स्वयं के संतान न होने की स्थिति में पड़ोस के गांव में जन्मी नवजात कन्या को 4 वर्ष पहले गोद लेकर बेटी के रूप में अपनाया हुआ है।
विभोर ने बताते हैं कि समीप के गांव में किसी के यहां सातवीं कन्या का जन्म होने से उसके परिवार वाले खुश नहीं थे। इसकी खबर मिली तो विभोर ने वहां जाकर उस कन्या को गोद देने का प्रस्ताव रखा। सहमति के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी करके विभोर ने इस बालिका को अपनी बेटी बनाकर गोद ले लिया। हालांकि इस निर्णय का विभोर को काफी विरोध झेलना पड़ा। परिजनों व रिश्तेदारों ने किसी बेटे को गोद लेने की सलाह दी। लेकिन वह और उसकी पत्नी नेहा अपने निर्णय पर अडिग रहे। विभोर का मानना है कि बेटे से ज्यादा बेटी अपने माता-पिता का ध्यान रखती है।
जिस बालिका सिया को उसने गोद लिया है, उसकी अन्य बहनों को विभोर द्वारा अपने स्कूल में नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है।

Surendra Bureau Incharge
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