scriptIPS Indolia is an inspiration for Hindi speaking youth | हिन्दी भाषी युवाओं के लिए प्रेरक हैं आईपीएस इंदौलिया | Patrika News

हिन्दी भाषी युवाओं के लिए प्रेरक हैं आईपीएस इंदौलिया


हिन्दी भाषी युवाओं के लिए प्रेरक हैं IPS इंदौलिया

असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए बल्कि हर असफलता से सबक लेकर अधिक मजबूती से आगे बढऩे की आवश्यकता होती है। ये विचार है करौली में 6 माह से पदस्थापित पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह इंदौलिया के। इंदौलिया उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो एक -दो बार की असफलता से निराश होकर बैठ जाते हैं या अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं। वे उन युवाओं के लिए भी प्रेरक है, जो मानकर चलते हैं कि IAS में चयन तो केवल अंग्रेजी पढऩे वाले बच्चों का ही होता है।

करौली

Published: June 07, 2022 10:09:18 am


हिन्दी भाषी युवाओं के लिए प्रेरक हैं आईपीएस इंदौलिया

असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए बल्कि हर असफलता से सबक लेकर आगे अधिक मजबूती से आगे बढऩे की आवश्यकता होती है। ये विचार है करौली जिला मुख्यालय पर 6 माह से पदस्थापित पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह इंदौलिया के। इंदौलिया उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो एक -दो बार की असफलता से निराश और हताश होकर बैठ जाते हैं या अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं। वे उन युवाओं के लिए भी प्रेरक है, जो ये मानकर चलते हैं कि IAS में चयन तो केवल अंग्रेजी माध्यम से पढऩे वाले बच्चों का ही होता है। ऐसे बच्चे हिन्दी माध्यम के कारण आईएएस बनने की ओर कदम ही नहीं बढ़ाते।
शैलेन्द्र सिंह ने स्कूल शिक्षा से ही पुलिस अफसर बनने का सपना संजोया था। इसकी खातिर उन्होंने दृढ़ संकल्प के साथ पढ़ाई की और एक बार में नहीं बल्कि पांच बार प्रयास करके आखिर अपने सपने को पूरा कर ही लिया। इतना ही नहीं अपने लक्ष्य को पाने की खातिर उन्होंने इस बीच में दो सर्विस भी छोड़ दी।
हिन्दी भाषी युवाओं के लिए प्रेरक हैं आईपीएस इंदौलिया
हिन्दी भाषी युवाओं के लिए प्रेरक हैं आईपीएस इंदौलिया
बनारस हिन्दू विश्वविधालय से BTEC. की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में सर्विस शुरू कर दी। लेकिन साथ में अपने लक्ष्य को पाने के लिए आईएएस परीक्षा की तैयारी भी जारी रखी।वे लगातार तीन परीक्षाओं में नाकाम रहे। चौथी बार 2015 की आईएएस परीक्षा में उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा में हुआ, जिससे वे संतुष्ट न हुए। पांचवीं बार उन्होंने फिर परीक्षा दी और इस बार उन्होंने देश भर में 38 वीं रैंक हासिल करने की सफलता हासिल की।
शैलेन्द्र सिंह बताते हैं कि उनको शुरू से पुलिस अधिकारी बनने की चाहत थी। इसीलिए उन्होंने UPSC को भारतीय प्रशासनिक परीक्षा (IAS) के किए आवेदन में अपनी पहली चॉइस आईपीएस भरी थी। चूंकि उन्होंने पहली चॉइस में आईपीएस भरा था, इसलिए एसपी पद पर चयनित हुए वरना वो आसानी से आईएएस भी बन सकते थे।
हिन्दी को माध्यम चुना तो मजाक बनाया

भरतपुर जिले में डीग कस्बे के निवासी शैलेन्द्र सिंह मध्यम स्तर के परिवार से निकले है। उनकी 12 वीं तक की शिक्षा डीग में हिन्दी माध्यम से हुई। बावजूद इसके उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाने का अपना लक्ष्य तय किया। उनके मन में ये निराशा का भाव नहीं आया कि हिन्दी भाषी होने से वे आईएएस की परीक्षा में कैसे सफल हो पाएंगे। बीटेक की डिग्री के आधार पर उन्होंने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड में नौकरी शुरू कर दी। साथ ही दृढ़ इच्छा शक्ति के साथ आईएएस परीक्षा की तैयारी भी। उन्होंने आईएएस परीक्षा में अपना माध्यम हिन्दी को चुना तो साथी लोगों ने उनका मजाक भी बनाया। लेकिन इससे वे विचलित न हुए। आईएएस परीक्षा में लगातार तीन बार की असफलता से हर कोई टूट जाता है लेकिन शैलेन्द्र सिंह बताते हैं कि वे हर बार नए जोश से अगली परीक्षा की तैयारी में जुट जाते। आखिर उनको चौथी बार में सफलता तो मिली लेकिन 337 वीं रैंक के कारण वह IRS में चयनित हो सके। लेकिन इस सफलता ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया, जिसकी बदौलत वे 2016 की परीक्षा में 38 वीं रैंक लाकर आईपीएस अधिकारी बन गए।
हिन्दी माध्यम में पाठ्य सामग्री की दिक्कत
SP शैलेन्द्र सिंह का कहना है कि हिन्दी माध्यम से आईएएस बनना कोई मुश्किल नहीं है। केवल दृढ़ संकल्प की जरूरत है। हालांकि हिन्दी से परीक्षा देने में जो खास दिक्कत होती है वो पाठ्य सामग्री की कमी की रहती है। चूंकि अधिकांश अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा देते हैं। इस कारण हिन्दी में परीक्षा के विषयों की पाठ्य सामग्री, नोटस आदि मिल नहीं पाते। उन्होंने तो अपने स्तर पर ये सामग्री तैयार की। फिर चार बार परीक्षा देते देते अनुभव भी हो गया था। वे युवाओं से कहते हैं कि असफलताओं से निराश नहीं हों और सफलता के लिए दुगने जोश से प्रयास करें। निराशा का भाव हावी होने से सफलता कभी नहीं मिल सकती।
कुछ बेहतर कर दिखाने का ध्येय

इंदौलिया कहते हैं कि अपने इच्छित पद पर आने के बाद अब उनका ध्येय पीडि़त लोगों की मदद करना और अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने का है। वे विश्वास पूर्वक कहते हैं कि वे पुलिस सेवा में रहते हुए निश्चित तौर पर कुछ बेहतर करके दिखाएंगे।

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