scriptkarauli | बढ़ते दामों से सिलेण्डर भरवाना मुश्किल, फिर चूल्हे का सहारा | Patrika News

बढ़ते दामों से सिलेण्डर भरवाना मुश्किल, फिर चूल्हे का सहारा

गुढ़ाचन्द्रजी. सरकार ने गांवों में निर्धन परिवार की महिलाओं को चूल्हे पर रोटी पकाने की झंझट से मुक्त करने के लिए उज्ज्वला योजना शुरू कर निशुल्क गैस सिलेण्डर उपलब्ध कराए, लेकिन सिलेण्डरों के बढ़ते दामों से इनको भरवाना मुश्किल हो गया, जिससे महिलाओं ने फिर रोटी पकाने के लिए चूल्हे की ओर रुख कर लिया। महिलाएं जंगल से लकड़ी काटकर लाने लगी हैं। महिलाओं ने बताया कि पहले तीन सौ से चार सौ रुपए तक सिलेण्डर आता था, लेकिन अब इसके दाम १ हजार रुपए तक पहुंच गए हैं, जो काफी महंगा पड़ रहा है।

करौली

Published: January 21, 2022 12:26:27 pm


गुढ़ाचन्द्रजी. सरकार ने गांवों में निर्धन परिवार की महिलाओं को चूल्हे पर रोटी पकाने की झंझट से मुक्त करने के लिए उज्ज्वला योजना शुरू कर निशुल्क गैस सिलेण्डर उपलब्ध कराए, लेकिन सिलेण्डरों के बढ़ते दामों से इनको भरवाना मुश्किल हो गया, जिससे महिलाओं ने फिर रोटी पकाने के लिए चूल्हे की ओर रुख कर लिया। महिलाएं जंगल से लकड़ी काटकर लाने लगी हैं। महिलाओं ने बताया कि पहले तीन सौ से चार सौ रुपए तक सिलेण्डर आता था, लेकिन अब इसके दाम १ हजार रुपए तक पहुंच गए हैं, जो काफी महंगा पड़ रहा है।
कोरोना में बेरोजगारी ने बढ़ाई मुश्किल
सिलेण्डर के बढ़ते दामों से गांवों में गैस पर रोटी बनाने से महिलाओं का रुझान कम हुआ ही वहीं कोरोना में बढ़ी बेरोजगारी ने दोहरी परेशानी में डाल दिया। कोरोना में रोजगार नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति कमजोर होने और मुश्किल पैदा हो गई। जिससे सिलेण्डर भरवाने के लिए गांवों में निर्धनों के पास रुपए नहीं। जिससे भी घर की महिलाओं ने चूल्हे पर रोटी बनाना बेहतर समझा। मुक्त सिलेण्डर मिलने पर महिलाओं में काफी खुशी थी, लेकिन जब इनको भरवाने का समय आया तो रुझान खत्म हो गया।
लकड़ी सस्ती, सिलेण्डर महंगा
घरेलू सिलेण्डर के दाम ९०० रुपए से अधिक चल रहे हैं, लेकिन जबकि इससे सस्ती लकड़ी पड़ जाती है। लकड़ी के दाम ५०० से ६०० रुपए प्रति क्विंटल है। ऐसे में गांवो में लोगों को सिलेण्डर खरीदने की बजाय लकड़ी पर रोटी पकाना फायदा का सौदा लग रहा है। हालांकि गांवों में बहुत कम लोग लकड़ी खरीदकर लाते हैं। अधिकतर महिलाएं जंगल से लकड़ी काटकर ले आती है। जिससे उनको ईंधन की व्यवस्था मुफ्त में हो जाती है। हालांकि गैस पर रोटी पकाना चूल्हे से अधिक सुविधाजनक व आसान है।
बढ़ते दामों से सिलेण्डर भरवाना मुश्किल, फिर चूल्हे का सहारा
गुढाचन्द्रजी. जंगल से लकड़ी काटकर ले जाती महिला।

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