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विस्थापन की ढुलमुल चाल से अटका विकास, सर्वे सूची में शामिल होने से नए परिवार भी वंचित

करणपुर. निभैरा पंचायत क्षेत्र के आशाकी गांव के ग्रामीणों ने विस्थापन सर्वे में नए परिवारों के नाम भी शामिल करने की मांग की है। ग्रामीण सुरेश शर्मा, रामजीलाल शर्मा , कल्याण गुर्जर , समयसिंह गुर्जर , रामसिंह चैती , चिरंजी बैरवा , सुरेश बैरवा ने बताया कि जो परिवार पलायन कर गए या जिन परिवार के लोगों की मृत्यु हो चुकी है उनके नाम सर्वे में वन विभाग द्वारा हटाए जा रहे हैं, लेकिन नए परिवारों के नाम शामिल नहीं किए जा रहे। इस तरह का वन विस्थापन सर्वे 12 साल पहले किया था। उस समय आशाकी गांव में 160 परिवार

करौली

Published: March 04, 2022 12:04:53 pm



करणपुर. निभैरा पंचायत क्षेत्र के आशाकी गांव के ग्रामीणों ने विस्थापन सर्वे में नए परिवारों के नाम भी शामिल करने की मांग की है। ग्रामीण सुरेश शर्मा, रामजीलाल शर्मा , कल्याण गुर्जर , समयसिंह गुर्जर , रामसिंह चैती , चिरंजी बैरवा , सुरेश बैरवा ने बताया कि जो परिवार पलायन कर गए या जिन परिवार के लोगों की मृत्यु हो चुकी है उनके नाम सर्वे में वन विभाग द्वारा हटाए जा रहे हैं, लेकिन नए परिवारों के नाम शामिल नहीं किए जा रहे। इस तरह का वन विस्थापन सर्वे 12 साल पहले किया था। उस समय आशाकी गांव में 160 परिवार थे 7 जिनमें से करीब बीस परिवार पलायन कर गए हैं, लेकिन इस बारह साल में बाइस परिवार नए बन गए हैं, लेकिन इनका नाम नहीं जोड़ा जा रहा है। इसलिए वन विस्थापन सर्वे में सहमति नहीं बन पा रही है 7 ग्रामीणों ने उप जिला कलक्टर अनुज भारद्वाज से नए परिवारों के नाम विस्थापन सर्वे में शामिल करने की मांग की है।
नहीं हो पा रहा विकास
विस्थापन की ढुलमुल चाल से अटका विकास, सर्वे सूची में शामिल होने से नए परिवार भी वंचित
करणपुर. निभैरा पंचायत क्षेत्र के आशाकी गांव कच्चे घर।
विस्थापन के दंश से विकास भी नहीं हो पा रहा है। गर्मियों में पेयजल किल्लत के चलते लोग करीब चार माह तक अन्य जग रहते हैं। वर्तमान में 162 परिवार के गांव आशाकी में पेयजल के लिए सरकारी तालाब के नीचे के दो कुओं से पानी की आपूर्ति हो रही है 7 अप्रैल माह में तालाब सूख जाने से पेयजल संकट उत्पन्न होने से मवेशियों को भी पीने का पानी नहीं मिलता। ऐसे में लोग घरों के ताला लगा चार माह के लिए अन्य जगह पलायन कर जाते हैं।
पेयजल समस्या दूर हो तो मिले राहत
ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के गांवों में पानी की गंभीर समस्या है। गर्मी के दिनों में हालत खराब हो जाती है। गर्मी में लोग यहां ठहर नहीं पाते। पेयजल की समस्या लंबे समय से चल रही है। लेकिन जनप्रतिनिधि व प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा।

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