क्यों हुआ करौली जिला प्रमुख पर फर्जी नाम व दस्तावेजों से चुनाव जीतने का केस? अभय मीना ने ये कहा अपनी तरफ से

Vijay ram

Publish: Jan, 26 2018 11:59:33 PM (IST)

Karauli, Rajasthan, India

राजस्थान में एक जिला प्रमुख अभय कुमार मीना पर झूठे नाम, फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज व नामांकन पत्र में गलत तथ्य पेश कर चुनाव लड़ने का वो मामला सामने आया, जिससे यहां क्षेत्रीय राजनीति में तहलका मच गया है....

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करौली (राजस्थान).
फर्जी डॉक्यूमेंट्स के जरिए चुनाव लड़ने के मामले में करौली जिला परिषद के जिला प्रमुख अभय कुमार मीना के खिलाफ अब जांच-पड़ताल शुरू हो गई है।

 

यहां कोतवाली थाने में पुलिस आरोपित व प्राथमिकी दर्ज कराने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी से पूछताछ के लिए नोटिस बनाने में जुटी है। हालांकि, अभी भी लोग ये जानना चाहते हैं कि करौली जिला प्रमुख पर फर्जी नाम व दस्तावेजों से चुनाव जीतने का केस क्यों हुआ?

 

इस खबर के संदर्भ में आपको बता दें कि जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेन्द्र माहेश्वरी ने जिला प्रमुख के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर चुनाव लडऩे की प्राथमिकी दर्ज कराई है। जिसका अनुसंधान कोतवाली थानाधिकारी देवेन्द्र जाखड़ ने शुरू किया है। कोतवाली पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्राथमिकी में बताया कि अभय कुमार के फर्जी नाम से चुनाव लडऩे बाद राज्य सरकार की ओर से प्राप्त शिकायत के क्रम में संभागीय आयुक्त भरतपुर द्धारा मामले की जांच कराई गई।

 

भरतपुर संभागीय आयुक्त की जांच में खुलासे के बाद ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के निर्देश पर जिला परिषद के सीईओ सुरेंद्र माहेश्वरी ने कोतवाली थाने में आपराधिक मामला दर्ज करवाया है। वे सपोटरा से कांग्रेस विधायक रमेश मीणा के भाई हैं। उधर, जिला प्रमुख ने कहा- यह डाॅ. किराेड़ीलाल का षड्‌यंत्र है। सरकार के समझौते में यह एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह एकतरफा कार्रवाई है। यह झूठी साबित होगी। करौली पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार फर्जी नाम से चुनाव लड़ने की शिकायत पर राज्य सरकार ने भरतपुर संभागीय आयुक्त से जांच करवाई थी।
जिस स्कूल से 8वीं पास, वह था ही नहीं संभागीय आयुक्त ने जांच में पाया कि अभय ने कोटा के जिस स्कूल से वर्ष 1990-91 में कक्षा आठ पास होना बताया, तब वह स्कूल ही अस्तित्व में नहीं था।

 

असल नाम रघुवीर : जांच में सामने आया कि आरोपी का असली नाम रघुवीर है, लेकिन उसने दस्तावेजों में गड़बड़ी कर नाम अभय कर लिया।
वोटिंग लिस्ट में धांधली : एक ही निर्वाचक पहचान पत्र संख्या 528251 में अलग-अलग वर्ष में रघुवीर और अभय नाम दर्ज।

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