करौली नगरपरिषद सभापति चुनाव- भाजपा कर रही चमत्कार का इंतजार

करौली नगरपरिषद सभापति चुनाव- भाजपा कर रही चमत्कार का इंतजार
पार्षदों की घेराबंदी से कांग्रेस की स्थिति दिख रही मजबूत
करौली। नगरपरिषद सभापति पद के लिए कांग्रेस की ओर से पार्षदों की मजबूत घेराबंदी की गई है। इस कारण से रविवार को होने जा रहे इस चुनाव में कांग्रेस की रसीदा का सभापति पद पर चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि भाजपा को कांग्रेस खेमे में भीतरघात से चमत्कार की उम्मीद बनी हुई है।

By: Surendra

Published: 18 Dec 2020, 08:15 PM IST

करौली नगरपरिषद सभापति चुनाव- भाजपा कर रही चमत्कार का इंतजार
पार्षदों की घेराबंदी से कांग्रेस की स्थिति दिख रही मजबूत
करौली। नगरपरिषद सभापति पद के लिए कांग्रेस की ओर से पार्षदों की मजबूत घेराबंदी की गई है। इस कारण से रविवार को होने जा रहे इस चुनाव में कांग्रेस की रसीदा का सभापति पद पर चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि भाजपा को कांग्रेस खेमे में भीतरघात से चमत्कार की उम्मीद बनी हुई है।
कांग्रेस तथा भाजपा ने मतदान के बाद ही अपने-अपने पार्षदों को समेट कर करौली से बाहर भेज दिया था। चूंकि कांग्रेस की ओर से सभापति के लिए रसीदा का नाम पहले से ही प्रमुखता से चर्चाओं में था, ऐसे में रसीदा समर्थकों ने मतदान के बाद निर्दलीयों को भी अपने कब्जे में लेना शुरू कर दिया। मतगणना के बाद रसीदा के समर्थकों ने सक्रीयता दिखाकर तुरत-फुरत में काफी पार्षदों को अपनी घेरांबदी में ले लिया। इस बीच भाजपा सभापति के नाम को तय करने में उलझी रही। कई दावेदार सामने भी आए लेकिन तब तक कांग्रेस अधिकांश पार्षदों को समेटकर अपनी बाड़ेबंदी को मजबूत कर चुकी थी।
असल में कांंग्रेस की ओर से नगरनिकाय चुनाव की कमान पूरी तरह से विधायक लाखन सिंह के हाथ में रही। उधर उन्होंने भी शुरू से सभापति पद के लिए कांग्रेस उम्मीदवार बतौर मुस्लिम प्रत्याशी रशीदा के नाम के संकेत दे रखे थे। नतीजे आने के बाद इस नाम का एलान करने में विधायक ने देरी भी नहीं की। कांग्रेस ने मतगणना वाली रात ही तीन दर्जन पार्षदों को अपने कब्जे में लेकर अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया था।
सूत्र बताते हैं कि इसके बाद भी कुछेक और पार्षदों ने भी कांग्रेस के लिए मत देने की सहमति दे दी है। इस स्थिति को देखकर तो करौली में कांग्रेस का सभापति बनना लगभग तय माना जा रहा है लेकिन भाजपा के पदाधिकारी इससे सहमत नहीं है। वे कांग्रेस खेमे में सेंधमारी के जतन कर रहे हैं और भीतरघात की सम्भावनाएं जता रहे हैं।
उनका कहना है कि सभापति प्रत्याशी के चयन को लेकर कांग्रेस के पार्षदों में गहरी नाराजी है। इसका कारण यह है कि कांग्रेस में सभापति के अनेक दावेदार थे, जिनकी अनदेखी की गई है। इस कारण मतदान के मौके पर पार्षदों की ये नाराजी चमत्कार के रूप में सामने आएगी। भाजपा पदाधिकारी ये भी कह रहे हैं कि अनेक निर्दलीय भी चाहें कांग्रेस के बाड़े में हैं लेकिन उनका मत भाजपा की ओर आएगा। इसको लेकर वे अनेक तर्क दे रहे हैं।
भाजपा ने अपने पार्षदों को महावीरजी के एक होटल में प्रशिक्षण शिविर के नाम पर आठ दिन से रोका हुआ है। इन पार्षदों को भी ये यकीन दिलाया जा रहा है कि कांग्रेस खेमे में फूट का भाजपा को लाभ मिलेगा। इस तरह की उम्मीदों के सहारे सभापति के निर्वाचन में भाजपा चमत्कार का इंतजार कर रही है।


लीलाबाई से मच गई थी खलबली
गौरतलब है कि 55 सदस्यों के करौली नगरपरिषद बोर्ड में 15-15 पार्षद कांग्रेस -भाजपा के निर्वाचित होकर आए हैं। 25 पार्षद निर्दलीय हैं। सभापति के चुनाव के लिए कांग्रेस की रसीदा व भाजपा की पूनम शर्मा में सीधी टक्कर है।
भाजपा की रणनीति के तहत हाईब्रिड प्रत्याशी लीलाबाई भी सामने आई थी, जिसने नामांकन वापस ले लिया। लीला बाई के प्रत्याशी बनकर सामने आने से एक बार तो कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई थी। लीला बाई की माली जाति के 13 पार्षद जीतकर आए हैं। ऐसे में लीला बाई के नाम पर भीतरघात की आशंका प्रबल हुई थी। इसी कारण कांग्रेस खेमे में पसीने छूटे थे। लेकिन उसके नामांकन वापस लेने से कांग्रेस ने राहत की सांस ली।

Surendra Bureau Incharge
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