फिर योजनाएं कैसे पकड़ी गति, किसानों कैसे सीखें उन्नत कृषि के गुर

रिक्त पदों ने बिगाड़ी कृषि योजनाओं की चाल
सहायक कृषि अधिकारी और कृषि पर्यवेक्षकों के 50 फीसदी से अधिक पद रिक्त
किसानों को योजनाओं की नहीं मिल पाती समुचित जानकारी

By: Dinesh sharma

Updated: 26 Aug 2020, 09:10 PM IST

करौली. राज्य सरकार की ओर से किसानों को उन्नत खेती के लिए बढ़ावा देने को लेकर दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन जिले के कृषि विभाग में कार्मिकों के टोटे के चलते स्थिति उलट है। बड़ी संख्या में सहायक कृषि अधिकारी और कृषि पर्यवेक्षकों के लम्बे समय से रिक्त पड़े पदों ने कृषि विभाग की योजनाओं की चाल बिगाड़ रखी है।

वर्तमान में कार्मिकों के अभाव में अन्नदाता को समुचित योजनाओं की जानकारी तक नहीं मिल पाती। वहीं किसानों को कामकाज के लिए भी परेशानी झेलनी पड़ती है। योजनाओं का समुचित लाभ पाने की खातिर उन्हें कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। हालांकि कृषि अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में कृषि पर्यवेक्षकों के पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे उम्मीद है कि करौली जिले में भी कार्मिकों का टोटा समाप्त हो सकेगा।

मण्डरायल में शून्य, करौली-सपोटरा में नगण्य
जिले में कृषि पर्यवेक्षकों के रिक्त पदों की सबसे बुरी स्थिति मण्डरायल क्षेत्र में है। सूत्रों के अनुसार यहां कृषि पर्यवेक्षकों के 16 पद स्वीकृत हैं, जो सभी रिक्त पड़े हैं। कमोबेश यही स्थिति सपोटरा क्षेत्र में हैं यहां पर कुल 23 पदों में से महज 6 पद भरे हैं, जबकि 17 पद रिक्त हैं। ऐसी ही स्थिति करौली की है। करौली पंचायत समिति क्षेत्र में भी कुल 26 पदों में से महज 6 पद भरे हैं, जबकि 20 पदों पर कृषि पर्यवेक्षकों का इंतजार है।


यह है स्थिति
कृषि विभाग सूत्रों के अनुसार जिले में कृषि पर्यवेक्षकों के 60 फीसदी पद रिक्त हैं। इसमें भी सपोटरा और मण्डरायल पंचायत समिति में तो यह संख्या सर्वाधिक है। कमोबेश यही स्थिति सहायक कृषि अधिकारी के पदों की है। सहायक कृषि अधिकारी के भी 50 फीसदी पद रिक्त होने से योजनाओं की चाल गड़बड़ाई हुई है। कृषि पर्यवेक्षक व सहायक कृषि अधिकारी के पद रिक्त होने से किसानों को योजनाओं की जानकारी व उन्नत फसल सहित फसल संबंधी जानकारी की खातिर कृषि विभाग के अधिकारियोंं की राह तकनी पड़ती है।

जिले में पदों का गणित
जिले में सहायक कृषि अधिकारी के 26 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में महज 12 पद ही भरे हुए हैं। कमोबेश यही सिति कृषि पर्यवेक्षकों के पदों की है। जिले में कृषि पर्यवेक्षकों के 149 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से महज 68 कृषि पर्यवेक्षक ही कार्यरत हैं। इस प्रकार कृषि पर्यवेक्षकों के लगभग 60 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इनमें से करौली, सपोटरा तथा मण्डरायल पंचायत समिति क्षेत्र में अधिकांश पद रिक्त पड़े हैं।

यह कार्य होते प्रभावित
किसानों को फसल बीमा, फसल कटाई प्रयोग, कृषि अनुदान, किसानों को बीज वितरण, मृदा नमूना, जिप्सम वितरण, फसलों में कीट के प्रकोप से बचाव के उपाय, कृषि संबधी नई योजनाओं की जानकारी देना, प्राकृतिक आपदा के दौरान नुकसान का आकलन करने सहित कई कार्य होते हैं। इनके अलावा कृषि यंत्र, पाइप लाइन, ड्रिप फव्वारा, पॉलीहाउस, ग्रीन हाउस, जैविक खेती को बढ़ावा देना, तकनीकी जानकारी सहित अन्य कार्य कृषि पर्यवेक्षकों द्वारा किए जाते हैं, लेकिन रिक्त पदों के कारण किसानों को यह सब जानकारी मिल पाने में परेशानी होती है।

सहायक कृषि अधिकारियों का आंकड़ा
पंचायत समिति स्वीकृत कार्यरत रिक्त
हिण्डौन 5 2 3
टोडाभीम 5 2 3
नादौती 4 2 2
करौली 5 4 1
सपोटरा 4 1 3
मण्डरायल 3 1 2

कृषि पर्यवेक्षकों का आंकड़ा
पंचायत समिति स्वीकृत कार्यरत रिक्त
हिण्डौन 33 20 13
टोडाभीम 30 27 03
नादौती 21 09 12
करौली 26 06 20
सपोटरा 23 06 17
मण्डरायल 16 0 16

परेशानी तो होती है
यह सही है कि जिले में सहायक कृषि अधिकारी और कृषि पर्यवेक्षकों के पद रिक्त हैं। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रगति में परेशानी तो होती है। हालांकि योजनाओं की प्रगति के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि अब सरकार द्वारा पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है, जिससे उम्मीद है कि काफी हद तक पदों को भरा जा सकेेगा।
बीडी शर्मा, कृषि उपनिदेशक, कृषि विभाग, करौली

Dinesh sharma Reporting
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