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करौली के कैलादेवी अभयारण्य के विकास की बढ़ रही उम्मीदें

गांवों के विस्थापन के लिए 30 करोड़ और खर्च
वन विभाग ने 30 करोड़ के और भिजवाए प्रस्ताव
सीएम भी कर चुके अभयारण्य क्षेत्र पर चर्चा

करौली

Published: May 04, 2022 07:29:39 pm

करौली. अभी तक अनदेखी का शिकार रहा कैलादेवी वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र के विकसित होने की संभावनाएं और प्रबल हुई हैं। इसकी वजह यह है कि पिछले करीब एक वर्ष में ना केवल इस अभयारण्य क्षेत्र में विस्थापन के लिए लगातार बजट मिल रहा है, बल्कि सरकार की ओर से तीन सफारी रूटों की भी अनुमति अभयाारण्य क्षेत्र में जारी की जा चुकी है। इतना ही नहीं स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी करौली (कैलादेवी) से सवाईमाधोपुर और बूंदी वन्य जीव अभयारण्य तक इसे कॉरीडोर के रूप में विकसित करने की बात पर जोर दे चुके हैं। इस सबके चलते उम्मीद है कि अभी तक उपेक्षा का शिकार कैलादेवी वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र जल्द ही पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान कायम कर सकेगा।
करौली के कैलादेवी अभयारण्य के विकास की बढ़ रही उम्मीदें
करौली के कैलादेवी अभयारण्य के विकास की बढ़ रही उम्मीदें
सरकार की ओर से करीब 32 करोड़ रुपए की राशि विस्थापन प्रक्रिया के लिए जारी की गई, जिसमें से विभाग की ओर से विस्थापित होने वाले परिवारों को करीब 22 करोड़ 29 लाख की राशि आवंटित की जा चुकी है। जबकि कुछ माह पहले विभाग को 689.34 लाख रुपए का बजट मिला था, जो पूरा खर्च हो चुका है। इस प्रकार इस वर्ष में लगभग 30 करोड़ रुपए की राशि विस्थापन मद में खर्च हो चुकी है। सूत्र बताते हैं कि जल्द ही और राशि भी इस मद में मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि कैलादेवी अभयारण्य को विकसित करने के लिए केन्द्र सरकार ने टाइगर हैबिटेट जॉन घोषित कर वर्ष 2008 में अभयारण्य में बसे 44 गांवों के विस्थापन की योजना तय की थी। अभयारण्य क्षेत्र में बसे 44 गांवों में से करीब 14 साल में मात्र एक गांव माचनकी ही पूरी तरह विस्थापित हो सका। शुरूआती दौर में तो ग्रामीणों ने विस्थापन के पैकेज सहित अन्य मांगों को लेकर विरोध किया। पिछले कुछ वर्षों में सहमति बनी, तो कुछ गांवों के ग्रामीण इसके लिए आगे आए, लेकिन बजट का रोड़ा आड़े आ गया। वन विभाग सूत्रों के अनुसार वर्ष 2016-17 से विस्थापन के लिए विभाग को बजट ही नहीं मिल सका। करीब 5 माह पहले राज्य सरकार की ओर से वन विभाग को 6 करोड़ 89 लाख रुपए से अधिक का बजट आवंटित किया गया था, जिसके बाद पिछले महिनोंमें 30 करोड़ से अधिक का बजट आवंटित किया गया है। गौरतलब है कि रणथम्भौर राष्ट्रीय अभयारण्य क्षेत्र से बीते वर्षों में कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में कई बाघ आए हैं, लेकिन कुछेक बाघों को छोड़कर अधिकांश बाघ इस इलाके में अपनी स्थाई टेरेटरी नहीं बना सके। कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र रणथम्भौर के बफर जोन में शामिल है।

किस गांव में कितने परिवारों को मिली राशि
विस्थापन के लिए वन विभाग की ओर से 7 गांवों का सर्वे पूर्ण हो चुका है। इनमें माचनकी गांव को पूरी तरह विस्थापित कर दिया है, जबकि ऊंचीगुवाड़ी के 143 परिवारों में से 116, डांग भावपुर/डंगरा के 83 में से 49 परिवार, बैरई भीमपुरा के 102 परिवारों में से 91 परिवार पूर्ण रूप से विस्थापित हो चुके हैं। वहीं चौड़क्याकला के 115 परिवारों में से 82 को प्रथम किश्त के रूप में प्रत्येक को 2 लाख एवं 81 परिवारों को द्वितीय किश्त के रूप में प्रत्येक को 7.5 लाख रुपए तथा 16 नए परिवारों को प्रथम किश्त के रूप में प्रत्येक को दो लाख रुपए, एवं 13 परिवारों को द्वितीय किश्त के रूप में प्रत्येक को 7.5 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इसी प्रकार चौड़क्याखुर्द में कुल 18 परिवारों का विस्थापन होना है । इनमें से 6 परिवारों को प्रथम किश्त के रूप में प्रत्येक को दो लाख रुपए, द्वितीय किश्त के रूप में प्रत्येक को 7.5 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। वहीं मरमदा के 245 परिवारों को विस्थापित किया जाना है। इसमें 223 परिवारों को प्रथम किश्त के रूप में 3 लाख रुपए प्रति परिवार तथा 195 परिवारों को द्वितीय किश्त के रूप में प्रत्येक को 7.5 लाख रुपए की किश्त दी जा चुकी है।
30 करोड़ के और भेजे प्रस्ताव
विभाग की ओर से वर्तमान में तीन गांवों को विस्थापित करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इनमें चौड़क्याकला, चौड़क्याखुर्द और मरमदा गांव शामिल हैं, जिनके परिवारों को प्रथम व द्वितीय किश्त जारी की जा चुकी है। जैसे ही इन गांवों के परिवार विस्थापित होंगे, तब उन्हें शेष तीसरी किश्त भी जारी की जाएगी। अब विभाग ने शेष राशि को खर्च करने की अनुमति उच्च स्तर से चाही है। इसके साथ ही करीब 30 करोड़ रुपए के बजट आवंटन के प्रस्ताव भी सरकार को भिजवाए हैं।
इनका कहना है....
कैलादेवी अभयारण्य में टाइगर हेबिटेट जोन विकसित करने के लिए 44 गांवों का स्वैच्छिक विस्थापन किया जाना है। एक गांव पूर्व में विस्थापित किया चुका है, जबकि कुछ गांवों से भी कई परिवार विस्थापित हुए हैं। राज्य सरकार की ओर से कुछ माह पहले 6.89 करोड़ रुपए और इसके बाद करीब 32 करोड़ का बजट मिला, इनमें से करीब 30 करोड़ रुपए का बजट खर्च हो चुका है।
डॉ. रामानन्द भांकर, उप वन संरक्षक (बफर) कैलादेवी अभयारण्य

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