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करौली की भद्रावती नदी की दशा सुधारने के प्रोजेक्ट पर लम्बा हो रहा इंतजार

करौली. यहां की जीवनदायिनी माने जाने वाली भद्रावती नदी की फिर से सूरत संवारने के लिए गत वर्ष जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां तो तेजी से की गईं, लेकिन अब भद्रावती की दुर्दशा को संवारने का इंतजार लम्बा होता जा रहा है।

करौली

Published: May 25, 2022 12:05:01 pm

करौली. यहां की जीवनदायिनी माने जाने वाली भद्रावती नदी की फिर से सूरत संवारने के लिए गत वर्ष जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां तो तेजी से की गईं, लेकिन अब भद्रावती की दुर्दशा को संवारने का इंतजार लम्बा होता जा रहा है। असल में भद्रावती की डीपीआर तैयार होने के बाद तीन माह पहले राज्य सरकार को प्रस्ताव प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजे जा चुक हैं, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में भद्रावती नदी पुर्नजीवित परियोजना में देरी हो रही है।
करौली की भद्रावती नदी की दशा सुधारने के प्रोजेक्ट पर लम्बा हो रहा इंतजार
करौली की भद्रावती नदी की दशा सुधारने के प्रोजेक्ट पर लम्बा हो रहा इंतजार

पिछले बजट में राज्य सरकार की ओर से करौली की भद्रावती नदी पुर्नजीवित परियोजना के लिए ३० करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई थी, जिससे शहरवासियों में खुशी छा गई। उसके बाद जिला प्रशासन नदी में होने वाले कार्यों की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) सहित अन्य तैयारियों में जुट गया। नदी के जीर्णोद्धार के लिए २९ करोड़ ८३ लाख रुपए की डीपीआर तैयार कर उसका अनुमोदन भी कर दिया गया। परियोजना के तहत कुल १९१२ कार्य करने का लक्ष्य तय किया गया। इसके बाद नोडल विभाग जल संसाधन विभाग की ओर से २२२३.२७ लाख रुपए (राज्य मद) की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए फरवरी माह में प्रस्ताव उच्च स्तर पर भिजवा दिए गए, लेकिन अब तक इन प्रस्तावों पर स्वीकृति नहीं मिली है, ऐसे में नदी के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अगले महिनों में मानसून का दौर शुरू होने से कार्यों में और विलंब होगा।
गौरतलब है कि करीब तीन दशक पहले तक करौली की भद्रावती नदी में पानी की हिलोरें उठती रही। लोग नदी पर नियमित रूप से स्नान करने पहुंचते थे। नदी में जलभराव से शहर के जल स्रोतों में भी पानी का स्तर बना रहता था। लेकिन तीन दशकों से हुई उपेक्षा के कारण यह नदी अब नाले में तब्दील हो गई है। नदी परिक्षेत्र में पानी की बजाय केवल कचरा नजर आता है। वर्तमान में बारिश को छोड़कर पानी के नाम पर शहर के नालों-शौचालयों की गंदगी नदी में पहुंच रही है।
तीन मदों से खर्च होगी राशि
विभागीय सूत्रों के अनुसार भद्रावती नदी के कायाकल्प के लिए तीन मदों से राशि खर्च की जानी है। इसमें राज्य मद, मनरेगा और विभागीय मद शामिल हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार मनरेगा और विभागीय मद की स्वीकृति विभागीय स्तर से जारी होनी है, जबकि राज्य मद की २२२३.२७ लाख रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति राज्य सरकार स्तर से जारी की जानी है। हालांकि गत वर्ष प्लांटेशन के लिए १.३४ करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की गई थी।
गंदे नालों की समस्या का भी होगा समाधान
वर्तमान में नदी में सात नालों के जरिए जाने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए भी ट्रीटमेंट प्लान बनाने की कार्ययोजना है। इसके लिए वैसे तो अभी नगरपरिषद की ओर से डीपीआर तैयार नहीं की गई है, लेकिन विभाग ने ३ करोड़ ५० लाख रुपए के प्रस्ताव शामिल कर लिए हैं।
चार माह पहले डीपीआर अनुमोदित
जल संसाधन विभाग के सूत्र बताते हैं कि करीब चार माह पहले नदी के कायाकल्प के लिए डीपीआर तैयार होने के बाद उसका अनुमोदन भी कर दिया। ग्राम पंचायतों में अनुमोदन के बाद जिला स्तरीय समिति ने डीपीआर का अनुमोदन किया है। लगभग 32.३९ किलोमीटर लम्बाई की भद्रावती नदी का कैचमेंट एरिया १४७.६९ स्क्वायर किलोमीटर है। सूत्रों के अनुसार इस क्षेत्र में हरनगर, खूबनगर, मांची, ससेड़ी, सौरया, बहादरपुर, भांकरी, बुगडार, गढ़ीकागांव, लांगरा, बाटदा और करौली ग्रामीण का कुछ इलाका शामिल है।

इन विभागों को करना है काम
भद्रावती नदी पुर्नजीवित परियोजना के तहत जल संसाधन विभाग को नोडल विभाग बनाते हुए इसमें वन विभाग, जलग्रहण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कृषि विभाग, उद्यानिकी, भूजल विभाग को अलग-अलग कार्यों की जिम्मेदार सौंपी गई है।
शासन-प्रशासन का ध्यान किया आकर्षित
नदी की हो रही दुर्दशा को लेकर राजस्थान पत्रिका की ओर से लगातार मुहिम चलाई गई थी। खबरों के माध्यम से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया। साथ ही वर्ष २०१२ तथा २०१९ में अमृतम जलम अभियान के तहत वृहद स्तर पर नदी के पेटे से कचरा हटाने का अभियान चलाया गया। इस सबके चलते क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन ने नदी को लेकर गंभीरता दर्शाई। इसके चलते गत बजट में सरकार ने नदी के लिए ३० करोड़ रुपए की घोषणा की।
इनका कहना है.....
भद्रावती नदी पुर्नजीवित परियोजना की डीपीआर अनुमोदित हो चुकी है। परियोजना में तीन मदों से राशि खर्च होगी। इसमें राज्य मद में २२२३.२७ लाख रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भिजवाए हुए हैं।
सुशीलकुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता, जल संसाधन विभाग, करौली

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