करौली की गुड्डी को सहायता की दरकार,पति-बेटे की मौत, एक बेटा अज्ञात बीमारी से ग्रस्त

गुढ़ाचन्द्रजी. बुढ़ापे में सभी अपनी (Karauli's Guddi needs assistance) संतान से सेवा करने की उम्मीद रखते है। उनके आसरे अपनी जिंदगी बसर करना चाहते है। लेकिन यदि जवान बेटे की जिदंगी भी बोझ बनकर बूढ़े कंधों पर आ जाए तो बहुत मुश्किल हो जाता है। तिमावा निवासी विधवा गुड्डी देवी की हालत भी कुछ ऐसी ही है।

गुढ़ाचन्द्रजी. बुढ़ापे में सभी अपनी (Karauli's Guddi needs assistance) संतान से सेवा करने की उम्मीद रखते है। उनके आसरे अपनी जिंदगी बसर करना चाहते है। लेकिन यदि जवान बेटे की जिदंगी भी बोझ बनकर बूढ़े कंधों पर आ जाए तो बहुत मुश्किल हो जाता है। तिमावा निवासी विधवा गुड्डी देवी की हालत भी कुछ ऐसी ही है। गुड्डी देवी को बीस वर्ष पहले अपने माता-पिता ने सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद देकर घर की देहरी से विदा किया था। इसके बाद बड़े अरमान लेकर अपने पिया के घर आई थी। इसके बाद उसकी बगिया में दो फूले खिले थे। जिन्हें देख-देखकर वह बड़ी खुश होती थी। लेकिन शादी के दो वर्ष बाद ही उसके पति प्रेमराज की मौत हो गई। दो मासूम बेटों को पालने के लिए गुड्डी को कई जतन करने पड़े, पति की मौत के दो वर्ष बाद ही छोटा बेटा सौरभ भी कैंसर से ग्रसित होकर मौत के मुंह में चला गया।


अब गुड्डी अपने बेटे गौरव को देख-देखकर भविष्य के सपने बुनने लगी। लेकिन नियति को कुछ ओर ही मंजूर था। कुछ साल बाद गौरव भी बुखार और पेट दर्द के बाद अज्ञात बीमारी की चपेट में आ गया। कई जगह इलाज कराने के बाद भी गौरव ठीक नहीं हुआ। इलाज के लिए रुपए उधार लेने से गुड्डी कर्जे में डूब गई। जमीन बिक गई, पेट पालने का सहारा भी नहीं बचा है। गुड्डी ने बताया कि उसे प्रशासन से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है। ग्रामीणों ने जिला कलक्टर को पत्र भेजकर गुड्डी को आर्थिक सहायता देने गुहार की है।

vinod sharma
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned