मोदी सरकार भले ही हर गांव में बिजली पहुंचा देने के दावे करती हो, राजस्थान में अभी हैं ऐसे 10 हजार गांव जहां दिया तले पढते हैं बच्चे

देखिए कैसे अंधेरे में दर्द छुपाए है गढमण्डोरा गांव...

By: Vijay ram

Published: 16 May 2018, 10:41 PM IST

करौली.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चाहें प्रत्येक गांवों में बिजली पहुंचाने का दावा करते हों और उनके सुर में सुर प्रदेश के मंत्री तथा बिजली निगम के अधिकारी भी मिलाते हों लेकिन हकीकत यह है कि सूबे में करीब 10 हजार गांव ऐसे हैं जहां बिजली नहीं आती। बच्चे दिया तले पढ़ते हैं।

 

ऐसे पिछड़े गांवों में करौली जिले के गांव भी हैं जहां बिजली की रोशनी की हकीकत केंद्र व राज्य सरकार के दावों के विपरीत है।

 

पिछले दिनों बिजली से वंचित श्यामपुर गांव का मामला सामने आने पर जिला कलक्टर ने वहां अगले २ माह में बिजली पहुंचाने के आदेश दिए जबकि ऐसा ही एक गांव मासलपुर इलाके का गढमण्डोरा भी है। आजादी के सात दशक गुजरने पर भी यहां के लोगों की आंखें बिजली की रोशनी के लिएतरस रही हैं। जबकि बिजली कनेक्शन के लिए ग्रामीणों ने वर्ष २००९ से फाइल लगाई हुई हैं। मासलपुर तहसील मुख्यालय से लगभग २० किलोमीटर दूर जिले की सीमा के अंतिम छोर पर यह गांव बसा है। जमूरा पंचायत के इस गांव में १८० घरों की आबादी है। ये गांव नया नहीं है। रियासतकाल से बसा ये गांव गढ़ रहा है।

इस गांव में केवल बिजली ही नहीं और भी अनेक समस्याओं का दर्द ग्रामीण झेल रहे हैं। सरकारी योजनाओं से अनजान इस इलाके के ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ ही नहीं मिल पा रहा। रसद विभाग की ओर से बांटी जाने वाली आधी सामग्री भी यहां के निर्धन ग्रामीणों को नहीं मिल पाती। निर्धन होने पर भी सरकारी योजनाओं के लाभों से वे वंचित हैं। आवास योजनाओं में गड़बड़ी के अनेक मामले यहां दबे पड़े हैं। ग्रामीणों के अनुसार उनके नाम से राशि हड़प कर ली गई हैं। गांव के हालात देखने पहुंचे समाज सेवी जितेन्द्र पिचानौत के अनुसार इस गांव के लोगों की निर्धनता को देख लगता है कि सरकार की योजनाओं का लाभ केवल कागजों में ही है। उनके अनुसार गांव की विकास में स्थिति पिछड़ी हुई है और लोगों की आर्थिक हालत दयनीय। कभी उनकी सुध लेने न कोई जनप्रतिनिधि पहुंचता और न प्रशासनिक अधिकारी।

 

बालिकाएं बीच में छोड़ देतीं पढ़ाई
इस गांव में उच्च प्राथमिक स्तर तक का ही स्कूल है। इसके बाद पढऩे के लिएगांव से दूर जाना पड़ता है। इस कारण ग्रामीण परिवेश की बालिकाएं आठवीं के बाद पढ़ाई छोड़ घर बैठ जाती हैं।

 

कलक्टर ने दिलाया विश्वास
गढमण्डोरा गांव के हालातों को देख लौटे समाजसेवी जितेन्द्र सिंह ने कलक्टर को अवगत कराया। इस पर कलक्टर ने बिजली निगम के अधिकारियों को गांव में तत्काल बिजली पहुंचाने के प्रबंध करने को कहा। साथ ही गांव के जरूरत मंदों को सरकारी योजनाओं से लाभान्वित करने के निर्देश भी सम्बंधित अधिकारियों को दिए।

 

चिकित्सा प्रबंध न साधन
गांव में चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति यह है कि ग्रामीणों के बीमार होने पर उपचार के कोई प्रबंध गांव में नहीं हैं। उनको ९ किलोमीटर दूर पैदल चल कर जमूरा उपचार को आना पड़ता है। गांव तक सड़क होने पर भी यातायात के साधनों का अभाव है। कुछ वर्ष पहले एक ग्रामीण बस सेवा संचालित हुई वो भी बंद हो गई।

Vijay ram
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