ताले में बंद जीवन रक्षक उपकरण, रोगी हो रहे रैफर

Life saving equipment locked in locks, patients being referred

अस्पताल में उपकरण स्थापना के 15 दिन बाद शुरू नहीं हुआ आईसीयू

राजस्थान के राजकीय चिकत्सालय हिण्डौन का हाल

 

By: Anil dattatrey

Published: 17 Sep 2020, 09:07 AM IST

अनिल दत्तात्रेय
हिण्डौनसिटी. कोरोना काल में रोगियों की टूटती सांसों को संवारने के लिए सरकार द्वारा गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के लिए भिजवाए जीवन रक्षक उपकरण भेजे हैं। दुर्भाग्य से ये ताले में बंद हंै। एक पखवाडा पहले बायो इंजीनियर्स की टीम द्वारा आठ बैण्ड के आईयूसी वार्ड में स्थापित किए वेंटीलेटर आदि उपकरणों का जीवन बचाने के लिए उपयोग शुरू नहीं हुआ है।

जबकि उखड़ती सांसों के बीच जान बचाने के लिए रोगियों को रैफर की राह देखनी पड़ रही है। प्रशिक्षित स्टाफ के बिना गहन चिकित्सा इकाई शुरू नहीं हो सकी है। स्थिति यह कि तीन वर्ष पहले मिनी आईसीयू के लिए आए दो वेंटीलेटर भी किसी काम नहीं आए हैं। जबकि कोरोना का संक्रमण दिनों दिन बढ़ रहा है।
कोरोना संक्रमण से लडऩे के लिए सरकार ने एसडीएच स्तर के हिण्डौन चिकित्सालय में चिकित्सा सेवाओं में इजाफा किया था। ताकि सांस लेेने में तकलीफ सहित अन्य आपात स्थिति में रोगी की स्थानीय स्तर पर गहन देखभाल की जा सके। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 31 लाख रुपए की लागत से आठ वेंटलेटर भिजवाए गए। इनमें तीन वेंटीलेटर छोटे व पांच बडे हैं। काफी दिनों तक उपकरणों के डिब्बा बंद रहने के बाद 30 अगस्त को बायो इंजीनियरर्स और संबंधिक कम्पनी के तकनीशियनों ने पुराने एसएनसीयू वार्ड में वेंटीलेटर व अन्य जीवन रक्षक उपकरणों का स्टॉलेशन कर आठ बैड का आईसूयी वार्ड स्थापित कर दिया था।

ऑपरेटिंग का किया था डेमो-
बोयो मेडिकल इंजीनियरर्स की टीम ने नव स्थापित आईसीयू वार्ड में संबंधित चिकित्सकों को पीएमओ की मौजूदगी में जीवन रक्षक उपकरणों के ऑपरेटिंग का डेमो कर दिखाया। लेकिन वर्षों से चिकित्सकों के गहन चिकित्सा सेवाओं से सम्बद्धता नहीं होने से आईसीयू पर ताला लटक गया। इसके संचालन के लिए अब संबंधित चिकित्सकों को जयपुर व भरतपुर में मेडिकल कॉलेज में आईसीयू का प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।

दो वेंटीलेटर पड़े हैं अनुपयोगी-
राजकीय चिकित्सालय में पहले से ही दो वेंटीलेंटर व अन्य जीवनरक्षक उपकरणों सहित दो बैड का आईसीयू सेवा उपलब्ध है। लेकिन तीन वर्ष से इनका उपयोग नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2017 में एनएचएम के तहत राजकीय चिकित्सालय में दो वेंटीलेटर स्थापित हुए थे। पहले दोनों को एमसीएच भवन के ऑपरेशन थियेटर से संबद्ध कक्ष में स्थापित किया था। बाद में एक वेंटीलेटर को नए आइसीयू वार्ड में शिफ्ट कर दिया। ऑपरेशन थियेटर के कक्ष में एक वेंटीलेट है। जिसका एक भी रोगी के लिए उपयोग नहीं किया गया है।


हर माह रैफर हो रहे 80 से अधिक रोगी-
राजकीय चिकित्सालय के मेडिकल वार्ड से हर माह 80 से अधिक रोगी विभिन्न जटिलताओं के चलते रैफर होते हैं। इसमें सेे करीब 30 प्रतिशत से अधिक रोगी सांस संबंधी परेशानी के के होते हैं। यानी आईसीयू सुचारू है तो उन्हें रैफर की बजाय स्थानीय स्तर पर ही राहत मिल सकती है। आंकड़ों की मानेेंं तो सितम्बर माह में 15 तारीख तक 59 रोगी रैफर हुए हैं। जबकि जुलाई माह में 90 व अगस्त माह में 88 रोगियों को रैफर टिकट थमाया गया है।

प्रभारी तय किया न दिलाई ट्रेनिंग
चिकित्सालय सूत्रों के अनुसार मेडिसिन विभाग द्वारा आईसीयू का संचालन किया जाना है। लेकिन उपकरण स्थापित होने के बाद न तो प्रभारी नियुक्त किया और न ही संभावित चिकित्साकर्मियों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम तय किया गया है। मानकों के तहत आईसीयू में चौबीस घंटे चिकित्सक व नर्सिंगकर्मी तैनात होते हैं। लेकिन मेडिसिन विभाग में पांच फिजीशियन और चिकित्सालय में दो निश्चेतक चिकित्सक ही हैं।


इनका कहना है

चिकित्सालय में आधिकारिक तौर पर आईसीयू स्वीकृत नहीं है। खासतौर पर कोविड़ रोगियों के लिए गहन चिकित्सा इकाई की सुविधा तय की गई है। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों के ट्रेनिंग के बाद इसका संचालन शुरू होगा।
-डॉ. नमोनारायण मीणा, पीएमओ
राजकीय चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी.

Anil dattatrey Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned