चिकित्सालय में बंद थी मशीन, कलक्टर ने शुरू करने के दिए निर्देश, अब जिला चिकित्सालय में शुरू होगी डी-डाईमर जांच

चिकित्सालय में बंद थी मशीन, कलक्टर ने शुरू करने के दिए निर्देश, अब जिला चिकित्सालय में शुरू होगी डी-डाईमर जांच

करौली। जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने जिला चिकित्सालय की लैब में अनुपयोगी रखी फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन से मरीजों की जांच शुरू करके जांच सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मशीन के शुरू होने पर रक्त सम्बन्धित डी-डाईमर की जांच भी चिकित्सालय में होने लगेगी। कलक्टर को शिकायत की कि निजी लैबों को लाभ पहुंचाने के लिए चिकित्सालय में उपलब्ध फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा है।

By: Surendra

Published: 20 May 2021, 10:08 PM IST

चिकित्सालय में बंद थी मशीन, कलक्टर ने शुरू करने के दिए निर्देश, अब जिला चिकित्सालय में शुरू होगी डी-डाईमर जांच

कलक्टर ने फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन का उपयोग शुरू करके जांच सुविधा बढ़ाने के दिए निर्देश
महंगी लागत के कारण नहीं लिया जा रहा था उपयोग

करौली। जिला कलक्टर सिद्धार्थ सिहाग ने जिला चिकित्सालय की लैब में अनुपयोगी रखी फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन से मरीजों की जांच शुरू करके जांच सुविधाएं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इस मशीन के शुरू होने पर रक्त सम्बन्धित डी-डाईमर की जांच भी चिकित्सालय में होने लगेगी। इसको लेकर तकनीशियनों ने कवायद शुरू कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार जिला कलक्टर को यह शिकायत की गई थी कि निजी लैबों को लाभ पहुंचाने के लिए चिकित्सालय में उपलब्ध फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस कारण मरीजों की रक्त सम्बन्धित डी-डाईमर जैसी अनेक जांच भी मरीजों को नहीं हो पा रही हैं।
इस पर गुरुवार शाम को कलक्टर चिकित्सालय के निरीक्षण के लिए पहुंचे और मरीजों की जांच सुविधाओं को लेकर चिकित्सकों, लैब के कार्मिकों से चर्चा की। इस दौरान सामने आया कि कि सेमी ऑटो एनेलाइजर मशीन से मरीजों की जांच की जा रही है। जबकि फुली ऑटो एनेलाइजर का उपयोग नहीं हो रहा है। इस कारण डी-डाईमर जैसी जांच चिकित्सालय में नहीं होने से मरीजों को निजी लैबों पर जाकर यह जांच करानी पड़ रही है। कलक्टर को यह भी बताया गया कि मशीन की क्षमता अधिक है और रिजल्ट भी सटीक हैं। फिर इसका उपयोग करने में कोताही बरती जा रही है।
इस बारे में कलक्टर ने चिकित्सालय में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी और अन्य चिकित्सकों से बातचीत की। उन्होंने बताया कि मरीजों की अधिक संख्या में जांच की नौबत आने पर फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन का उपयोग किया जाता है। इसका कारण उन्होंने यह बताया कि इसमें जांच की लागत अधिक आती है।
इस पर कलक्टर ने वर्तमान परिस्थिति में फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन के बंद होने को लेकर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मशीन तत्काल शुरू की जाए जिससे मरीजों को वर्तमान परिस्थिति में अधिक से अधिक जांच सुविधाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने विशेष तौर डी-डाईमर जांच शुरू करने के निर्देश दिए।
सूत्रों ने बताया कि कलक्टर ने निरीक्षण से पहले ही इस बारे में चिकित्सालय प्रशासन को निर्देशित कर दिया था। इस कारण कलक्टर के पहुंचने से पहले ही फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन से डी-डाईमर जांच शुरू किए जाने के लिए तकनीशियन बुला लिए गए थे। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिनेश गुप्ता ने बताया कि चिकित्सालय में फुली ऑटो एनेलाइजर मशीन के जरिए से डी-डाईमर जांच सुविधा के लिए तकनीशियन प्रयास कर रहे हैं। कलक्टर के निरीक्षण के दौरान और इसके बाद रात तक प्रयास करने में जुटे हुए थे। चिकित्सकों के अनुसार डी डाईमर टेस्ट के जरिए शरीर में बनने वाले छोटे-छोटे खून के थक्कों का पता लगाया जाता है।

पोर्टेबल जांच मशीन डिस्पेंसरी में पड़ी बंद

कलक्टर द्वारा चिकित्सालय में जांच सुविधाओं की स्थिति जानने के दौरान खुलासा हुआ कि एक पोर्टेबल जांच मशीन सिटी डिस्पेंसरी में अनुपयोगी स्थिति में वर्षो से पड़ी है। जांच-पड़ताल में पता चला कि मोबाइल यूनिट के लिए यह मशीन आई थी, जिससे मौके पर 4 प्रकार की जांच की जा सकती है। लेकिन इस मशीन का उपयोग होना नहीं पाए जाने पर कलक्टर ने हैरत जताई। उन्होंने इस मशीन का भी उपयोग करने के निर्देश दिए।

Surendra Bureau Incharge
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