नए ऑर्डर मिल रहे न खप रहा पुराना माल, स्लेट उद्योग को करोड़ों का हुआ नुकसान

Old goods are not getting new orders, loss of crores to slate industry
लगातार दूसरे साल प्राथमिक स्कूल बंद होने से स्लेट उद्योग बेहाल

By: Anil dattatrey

Published: 11 Jun 2021, 10:00 AM IST

हिण्डौनसिटी. आधुनिक एवं हाईटेक शिक्षा पद्धति से एक दशक से सिसक रहे हिण्डौन के स्लेट उद्योग की कोरोना संक्रमण ने कमर तोड़ दी है। लगातार दूसरे वर्ष संक्रमण के चलते प्रारंभिक शिक्षा के स्कूल बंद रहने से स्लेट का कारोबार दम तोडऩे के कगार पर है। छोटे बच्चों के स्कूल नहीं खुलने से न तो स्लेट का उत्पादन हो पाया है न ही रुके हुए माल का विपणन। स्थिति यह है कि सैकड़ों लोगों को रोजगार देने वाली स्लेट निर्माण इकाईयों में सूनापन पसरा हुआ है।


कोरोना की पहली लहर में ठप पड़े स्लेट उद्योग के जनवरी माह मेंं स्कूलों के खुलने से फिर से संवरने की उम्मीद बंधी थी। इसी आस में रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्लेट फैक्ट्रियों में उत्पादन की शुरूआत हो गई। उद्यमियों ने मार्केटिंग प्रतिनिधियों को ऑर्डर बुक करने के लिए बिहार, पश्चिम बंगाल, गुजरात सहित अन्य राज्योंं में डिस्टीब्यूटरों के यहां भेज दिया। ताकि आगामी चार माह अप्रेल तक बनने वाली स्लेटों को नवीन शिक्षा सत्र शुरू होने से पहल खपाया जा सके। लेकिन मार्च माह कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के आने से स्कूल फिर से बंंद हो गए। ऐेसे दूसरे राज्योंं में ऑर्डर बुक करने माकेर्टिंग प्रतिनिधियों को लौटना पड़ा। माध्यमिक शिक्षा की परीक्षाएं टलने से आगामी सत्र की स्थिति को भांप कर कई फर्मों ने पूर्व में बुक किए ऑर्डर भी स्थगित कर दिए। इससे औद्योगिक यूनिटोंं में स्लेट उत्पादन की चाल भी मंद पड़ अब थम सी गई है। सूत्रों के अनुसार स्लेट फैक्ट्रियों में करीब 5-7 करोड रुपए का माल गोदामों में रखा है। करीब एक करोड़ रुपए की लागत की स्लेटें प्रोसोसिंग (अद्र्धनिर्मित)में अटकी हैं। स्लेट उद्यमियों का कहना है कि जुलाई में सामान्य रूप से विद्यालय संचालित नहीं हुए तो लगातार दूसरे वर्ष करोड़ों रुपए का नुकसान होने से स्लेट उद्योग की कमर टूट जाएगी।


पहले ट्रांसपोर्ट में अटका, अब निर्माण थमा-
स्कूलों में सत्र भर उपयोग की जाने वाली स्लेट का उद्योग महज चार माह ही चलता है। जनवरी से अप्रेल माह तक फैक्ट्रियों में स्लेटों बनती हैं। जून माह से पूर्व ही स्लेटों की खेप डिस्टीब्यूटर को दी जाती है। गत वर्ष 20 मार्च को जनता कफ्र्यू से शुरू हुए लॉकडाउन में 30-35 करोड रुपए की स्लेटों की खेप ट्रांसपोर्ट और गोदामों में अटक गई। जो अनलॉक होने पर वितरकों के यहां पहुंंच पाई। स्कूलों का संचालन सुचारू नहीं होने से वहां भी माल गोदामों में रखा रह गया। ऐसे में दूसरे वर्ष में स्लेट का उत्पादन रफ्तार नहीं पकड़ सका। वर्तमान 5-7 करोड़ रुपए का माल यूनिटोंं में रवानगी के इंतजार में रखा हुआ है।


एक दर्जन राज्यों में जाती हैं हिण्डौन की स्लेट-
स्लेट नगरी से नाम से ख्यात रहे हिण्डौन से राज्य के दर्जन भर राज्यों में स्लेट की खपत है। सीजन में रीको औद्योगिक क्षेत्र में स्लेट फैक्टियों में प्रतिदिन करीब एक लाख नग स्लेट का निर्माण होता है। प्रोसेसिंग और फ्रेमिंग से आधा दर्जन प्रकार की स्लेटें बनाई जाती हैं। स्लेट उद्यमी शिवप्रकाश पटवा ने बताया कि हिण्डौन से राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा मध्यप्रदेश, गुजरात,महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, उडीसा, असम व तमिलनाडू में निर्यात जाता है।


फैक्ट्रियों में काम बंद,श्रमिकों की छुट्टी-
दूसरी लहर के लॉकडाउन में औद्योगिक इकाईयां प्रभावित नहीं हुई। सरकार द्वारा श्रमिकों के आने से लेकर फैक्ट्रियां संचालन की रियायत दी गई है। लेकिन बाजार बंद रहने और माल नहीं खपने की आशंकाओं में चलते फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद होगया है। कुछ फैक्ट्री चल रही है, लेकिन स्लेटों का काफी कम निर्माण हो रहा है। ऐसे में स्लेट उद्योग के एक से डेढ़ हजार श्रमिक आंशिक बेरोजगार हो गए। अब फैक्ट्रियों में सीजन खत्म होने से श्रमिक घर बैठ गए हैं या दूसरे काम धंधों में जुट गए हैं।

स्लेट उद्योग को संबल दे सरकार
कोरोना संक्रमण से लगातार दूसरे वर्ष स्लेट उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई करोड़ रुपए का माल फैक्ट्रियों में रखा है। दूसरी लहर में स्कूल बंद होने से इस वर्ष अपेक्षित ऑर्डर नहीं मिल सके। सरकार प्रारंभिक शिक्षा में स्लेट की अनिवार्यता लागू करे तो इस उद्योग को संबल मिल सकता है।
-शिव प्रकाश पटवा, स्लेट उद्यमी, हिण्डौनसिटी।

Anil dattatrey Reporting
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