खोलें नए न्यायालय, मिलें सुविधाएं

Open new courts, meet facilities
अधिवक्ताओं से प्री-बजट परिचर्चा

By: Anil dattatrey

Published: 18 Feb 2020, 11:42 PM IST

हिण्डौनसिटी. राज्य सरकार के आगामी बजट से अधिवक्ताओं को सुविधाएं और कानूनी सहूलियतों को लेकर उम्मीद है। अधिवक्ताओं का आस है कि शहर में सक्षम मुकदमों के सहज निस्तारण के लिए सक्षम न्यायालय खोले जाएं। साथ ही अधिवक्ताओं को सुरक्षा एक्ट और आर्थिक सम्बलन की घोषणा की आस है। पत्रिका टीम ने न्यायालय परिसर स्थित अभिभाषक संघ कार्यालय में सीधा संवाद की अधिवक्ताओं से बजट से उम्मीदों के बारे में जाना।

मामले अधिक खुले एमएसीटी कोर्ट
मोटर दुर्घटना दावा के जिले में सर्वाधिक मामले हिण्डौनसिटी क्षेत्र के हैं। मामलों में सुनवाई के लिए फरियादी व अधिवक्ताओं को करौली जाना पड़ता है। बजट में उम्मीद है कि सरकार हिण्डौन में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण की घोषणा करे। ताकि हिण्डौन सहित टोडाभीम, नादौती क्षेत्र के फरियादियों को पेशियों पर करौली जाने से राहत मिल सके।
दिनेश शर्मा, पूर्व अध्यक्ष, अभिभाषक संघ, हिण्डौनसिटी

अधिवक्ता वैलफेयर फण्ड बने
बीमारी व विपरीत परिस्थिति में अधिवक्ताओं की मदद के लिए सरकार की ओर से कोई वैलफेयर फण्ड की सुविधा है। वकीलों के अंशदायी सहयोग से बार काउंसिल का वैलफेयर फण्ड संचालित है। वैलफेयर फण्ड में सरकारी अंशदान होना चाहिए। ताकि पीडि़त अधिवक्ता व आश्रित परिवार को समुचित आर्थिक मदद मिल सके। वहीं वकीलों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा एक्ट भी लागू होना चाहिए।
श्रीभान सिंह गुर्जर, पूर्व अपर लोक अभियोजक, हिण्डौनसिटी.

एसीएम न्यायालय खोला जाए
उपखण्ड मुख्यालय पर राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए एसीएम (सहायक कलक्टर) कोर्ट खोला जाए। एसडीओ के प्रशासनिक कार्यों में व्यस्तता के चलते राजस्व प्रकरणों का समय पर निस्तारण नहीं हो पाता है।
मदन मोहन शर्मा, अध्यक्ष, अभिभाषक संघ हिण्डौनसिटी.

पोक्सो कोर्ट खोला जाए
जिले के पोक्सो न्यायालय करौली में अधिकांश मामले हिण्डौन क्षेत्र से है। ऐसे में पीडि़तों और अधिवक्ताओं को पेशी पर करौली जाना पड़ता है। ऐसे में सरकार को अधिवक्ताओं व फरियादियों को राहत देने के लिए पोक्सो कोर्ट को हिण्डौन स्थानांतरित किया जाए अथवा कैम्प कोर्ट लगाया जाए।
केके पुरी, अधिवक्ता, हिण्डौनसिटी


हिण्डौन में खुले एससी-एसटी न्यायालय
हिण्डौन व टोडाभीम उपखण्ड में एससी व एसटी वर्ग के लोगों की बहुलता है। पहले उत्पीडन के मामलों की सुनवाई हिण्डौन में ही होती थी। लेकिन वर्ष 2014 से सुनवाई का सक्षम न्यायालय करौली कर दिया है। हिण्डौन में एसटी-एससी विशेष न्यायालय खोला जाए ताकि वकीलों व पीडि़तों को दौडधूप से राहत मिल सके।

शांतिलाल करसौलिया, अधिवक्ता, हिण्डौनसिटी.

एपीपी को मिले कार्यालय
न्यायालय परिसर में दो एपीपी है। लेकिन बैठने के लिए कार्यालय की सुविधा नहीं है। ऐसे में राजकीय अधिवक्ताओं के सुनवाई से संबंधित फाइलें रखने के लिए अलग से स्थान नहीं है। घर से बस्ते में फाइलें लानी पड़ती हैं। बजट में उम्मीद है कि सरकार न्यायालयों में अलग से एपीपी कार्यालय बनवाने की घोषणा करे।

खेमसिंह गुर्जर, राजकीय अधिवक्ता, एडीजे कोर्ट हिण्डौनसिटी


नए अधिवक्ताओं को मिले स्टाईपेण्ड
कानून की पढ़ाई के बाद अधिवक्ता केरूप में स्थापित होने के समय नए वकीलों को स्टाईपेण्ड दिया जाता चाहिए। ताकि शुरुआती दौर में आर्थिक संबल मिल सके। पूर्व में कई सरकारों में बात चली, लेकिन घोषणा नहीं हुई। इस बार बजट में उम्मीद है कि सरकार जूनियर वकीलों के लिए स्टाईपेण्ड के देने की घोषणा करे।
कृष्ण मोहन शर्मा, अधिवक्ता

Anil dattatrey Reporting
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