इमरजेंसी में नहीं दिल की जांच

vinod Sharma

Publish: Sep, 17 2017 11:49:15 (IST)

Karauli, Rajasthan, India
इमरजेंसी में नहीं दिल की जांच

हिण्डौनसिटी. जांच के नाम पर रोगियों को मोटे खर्चे से राहत देने के लिए संचालित मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना वर्षों बाद भी लोगों के लिए सार्थक साबित

हिण्डौनसिटी. जांच के नाम पर रोगियों को मोटे खर्चे से राहत देने के लिए संचालित मुख्यमंत्री नि:शुल्क जांच योजना वर्षों बाद भी लोगों के लिए सार्थक साबित नहीं हुई है। शहर से लेकर गांवों तक योजना अभी आधी-अधूरी है। हिण्डौन के एसडीएच अस्पताल में दिल की जांच आलमारी में बंद है। वहीं ढिंढोरा और विजयपुरा गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्रयोगशाला ही नहीं है। ऐसे में लैब तकनीयिशन यहां के रोगियों के नमूने की जांच सूरौठ व हिण्डौन में जाकर कराते हैं। कमोबेश ब्लॉक क्षेत्र के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोगियों को सरकार की मुफ्त जांच का ही हाल है।
ईसीजी इंडोर में
चिकित्सालय में दिल की जांच का जिम्मा मेडिकल वार्ड को दिया हुआ है। यानी आउटडोर में अन्य जांचों की भांति ईसीजी कराना रोगियों को सहज नहीं है। इमरजेंसी यूनिट (एमओटी) में हृदयाघात का रोगी आने पर वहां आपात स्थित के तैनात नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सक के पास बिना जांच के उपचार शुरू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता है। रोगी की ईसीजी जांच वार्ड में पहुंचने पर ही हो पाती है। ऐसे में रोगियों के लक्षणों के आधार पर इमरजेंसी यूनिट से रैफर किया जाता है। आउटडोर में ईसीजी जांच नहीं हो पाने से दिन में एक-दो रोगी की ही ईसीजी जांच हो पाती है। बीते वर्ष मुख्यमंत्री के निरीक्षण की संभावना में ईसीजी मशीन को अलमारी से निकाल आउटडोर के एक कमरे में रखा गया था। आनन-फानन में कक्ष पर ईसीजी जांच भी लिखवा दी गई, लेकिन फौरी व्यवस्था कुछ घंटे बाद ही पुराने ढर्रे पर आ गई। हृदयाघात के रोगियों की अधिक आवक होने पर भी ईसीजी जांच वार्ड से निकल इमरजेंसी यूनिट में नहीं आ सकी है।
जांच मशीनों की कमी
पटोंदा. श्रीमहावीरजी पीएचसी को सरकार ने सीएचसी में क्रमोन्नत कर दिया, लेकिन नि:शुल्क जांच के लिए मशीनों का अभाव होने से मरीजों को जांच के लिए भटकना पड़ता है। एक्स-रे व ईसीजी की मशीन भी उपलब्ध नहीं है। यहां मात्र एक लैब तकनीशियन है। सीएचसी की निर्धारित ३५ जांचों की तुलना में कुछेक जांच ही हो पा रही हैं। ऐसे में रोगियों को हिण्डौन व करौली जाना पड़ता है।
करौली ञ्च पत्रिका. मौसमी बीमारियों के दौर में जिले के चिकित्सालयों में जांच की व्यवस्था चरमराई हुई है। जिला अस्पताल सहित कस्बों व गांवों में भी विभिन्न जांचों की स्थिति खराब है। जिला मुख्यालय के अस्पताल में सीबीसी मशीन खराब पड़ी है। इस एक मात्र मशीन की क्षमता ४० मरीजों की जांच करने की है, लेकिन इससे रोजाना १०० से १२५ मरीजों की जांच की जाती है। इस कारण आए दिन मशीन खराब होने की नौबत आती है। अभी यह मशीन एक माह से बंद पड़ी है। इससे मरीजों की कई जांच नहीं हो पा रही हैं। उनको निजी क्लीनिकों पर जांच करानी पड़ती है। इन दिनों मौसमी बीमारी के दौर में जिला चिकित्सालय में जांच के दबाव इतना है कि यहां की प्रयोगशाला में सामान्य बुखार की जांच कराना भी पहाड़ चढऩे जैसा है। स्थिति यह है कि सुबह के समय मरीजों को जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है और शाम तक उसकी रिपोर्ट आने का इंतजार करना होता है। ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीज को दिन भर इंतजार करना मुश्किल होता है। ऐसे में वे नि:शुल्क जांच कराने की बजाय निजी लैब पर जांच कराने पहुंचते हैं। अस्पताल में रोजाना औसतन १२० मरीजों की जांच की जा रही है। करणपुर, हाड़ौती, मण्डरायल तथा कुडग़ांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में निर्धारित मापदण्ड़ों से कम जांच हो रही हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य
केन्द्रों में २५ से अधिक जांच कराने का प्रावधान है, लेकिन १० जांच
ही हो रही है।

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