जिले में रबी बुवाई की शुरू, खाद की कमी से किसान चिंतित

Rabi sowing started in the district, farmers worried due to shortage of manure

एक लाख 77 हजार 200 हैक्टेयर में होनी है बुवाई

By: Anil dattatrey

Published: 06 Oct 2021, 12:06 PM IST

हिण्डौनसिटी. बाजरा की कटाई के बाद जिले में रबी की फसल की तैयारियां शुरू हो गई है। कई इलाकों में किसानों ने सरसों की फसल से बुवाई का श्रीगणेश भी कर दिया है। अक्टूबर माह के दूसरे पखवाड़े से गेहंू सहित रबी की अन्य फसलों की बुवाई रफ्तार पकड़ेगी। लेकिन अभी मांग के अनुरूप सहकारी समितियों में खाद नहीं पहुंचा है। इससे जिले भरे में खाद की किल्लत बनी हुई है। ऐसे में विक्रेता पुराने स्टॉक की खाद के किसानों को महंगे दामों पर बेच मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

जिले में कृषि विभाग द्वारा रबी फसलों की बुवाई के लक्ष्यों की तुलना में जरुरत के मुताबिक खाद की उपलब्धता तय नहीं हो सकी है। इस बार जिले में 1 लाख 77 हजार 200 हैक्टैयर में रबी की फसलों अनुमानित बुवाई होनी हैं। प्रमुख फसल शुमार सरसों की शुरुआती दौर में 85 हजार हैक्टेयर की तुलना में 12 हजार हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है। जबकि गेहूं व अन्य फसलों की बुवाई की जमीनी तैयारियों में किसान जुटा है।

डीएपी का टोटा, यूरिया ऊंट के मुहं में जीरा-
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में रबी की फसल के बुवाई लक्ष्यों के अनुसार 32 हजार मीट्रिक टन यूरिया व 6400 मीट्रिक टन डीएपी (डाई अमोनियम फास्फेट) खाद की मांग हैं।अभी तक महज 736.47 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति हुई है। यह कुल मांग का केवल 2.30 प्रतिशत है। जबकि डीएपी की आपूर्ति ही नहीं हुई है। इस समय गत वर्ष के पुराने स्टॉक में 6679.76 मीट्रिक टन यूरिया व 1264.50 मीट्रिक टन यूरिया मौजूद है। हालांकि सरकारिता विभाग द्वारा के जिला की 3 क्रय विक्रय सहकारी समिति (केवीएसएस), 60 ग्राम सेवा सहकारी समिति(जीएसएस) व 352 निजी अनुज्ञाधारी दुकानों के जरिए किसानों के यूरिया,डीएपी व अन्य खादों का विक्रय किया जा रहा है।

देश में 80 फीसदी खाद का आयात-
रासायनिक खाद की कई कम्पनियों के जिला वितरक जगमोहन शर्मा ने बताया कि देश में जरुरत का 20 प्रतिशत खाद ही निर्मित हो पाता है। शेष 8 प्रतिशत विदेशों से आयात होता है। सरकार द्वारा कम्पनियों को सब्सिड़ी बढ़ाने का बाद ही ऊंची लागत के चलते कम्पनियों से मांग के अनुरूप खाद नहीं मिल पा रहा है। रेलवे स्टेशन के माग गोदाम शेड पर भी खाद की ट्रेनों की आवक कम है।

हिण्डौन में आता छह जिलों का खाद-
रेलवे स्टेशन के गुड््स शेड पर पूर्व राजस्थान के छह जिलों के लिए खाद आता है। रेलवे स्टेशन अधीक्षक अशोक शर्मा ने बताया कि हिण्डौनसिटी में करौली, धौलपुर, भरतपुर, दौसा तथा सवाईमाधोपुर व अलवर के आधे भाग के लिए खाद आता है। बीते एक पखवाड़े मेें रेलवे स्टेशन पर खाद की महज सात मालगाड़ी रेक आए हैं। इनमें डीएपी का मात्र एक रेक आया है। जबकि अन्य रैक विभिन्न कम्पनियों की यूरिया के हैं।

इनका कहना है

डीएपी की किल्लत, एसएसपी का उपयोग करें किसान
ऊपर से आपूर्ति नहीं मिल पाने से इस बार डीएपी कमी बनी हैं। रबी की फसल के लिए डीएपी से ज्यादा पोषक तत्व सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) में मिलते हैं। जो डीएपी सेे सस्ता भी है। तीन कट्टा एसएसपी का उपयोग डीएपी के एक कट्टे के बराबर है। इसमें कैल्शियम और सल्फर की मात्रा भी ज्यादा होती है जो सरसों के लिए फायदेमंद है। खाद के उपयोग के प्रति किसानों को जागरुक करने के लिए कृषि विभाग द्वारा गांव-गांव पम्पलेट का वितरण किया जा रहा है।
रामलाल जाट
उपनिदेशक, कृषि विभाग, करौली

फैक्ट फाइल

फसल- -अनुमानित लक्ष्य- -गत वर्ष की बुवाई (हैक्टेयर में)
गेहूं- 79000- -80925
जौ - -200- -125
चना- -10200 - -8950
सरसों - -85000- -81500
तारामीरा - -800- -825
हराचारा - - -250
अन्य - 2000 1750

जिले में खाद की मांग
खाद - -मांग -आपूर्ति- -पुराना स्टॉक (मी.टन में)
यूरिया- -3200 -736.47- -6679.76
डीएपी- -6400- -00- -1264.50


जिले में खाद वितरण की व्यवस्था

3 क्रय विक्रय सहकारी समिति
60 ग्राम सेवा सहकारी समिति
352 निजी अनुज्ञाधारी दुकानें

Anil dattatrey
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