कोरोना काल में रेलवे का बढ़ा कारोबार, माल ढुलाई से करोड़ों रुपए की आय

Railway business increased during Corona period, crores of rupees income from freight
पांच माह में भेजे मालगाड़ी के 8 खाद्यान्न रेक

By: Anil dattatrey

Published: 11 Jun 2021, 09:13 AM IST


हिण्डौनसिटी. कोराना संक्रमण की दूसरी लहर में रेलवे की यात्री भाड़ा आय में गिरावट आई है। वहीं माल ढुलाई से खूब कमाई हुई। दक्षिण भारत में पूर्वी राजस्थान के गेहूं और बाजरा की बढ़ी मांग से माल भाड़ा आय में इजाफा हुआ है।

कोटा मंडल के हिण्डौन रेलवे स्टेशन से पांच माह में खाद्यान्न से लदे मालगाड़ी के 8 रैक गेहूं भारत के दक्षिणी राज्यों को भेजे हैं। जो गत वर्ष की तुलना में अधिक हैं। करीब 19 हजार मीट्रिक टन से अधिक खाद्यान्न की ढुलाई से रेलवे स्टेशन को साढ़े 4 करोड रुपए से अधिक की आय हुई है।


रेलवे सूत्रों कोरोना संक्रमण दूसरी लहर में पूर्णत: लॉक डाउन नहीं होने से खाद्यान्न व्यापारिक गतिविधियां शुरू रहीे। रेलवे द्वारा मालपरिवहन को निर्वाध रखने से हिण्डौन रेलवे स्टेशन के गुड्स सेड से खाद्यान्न का लदान सुचारू रहा।

दक्षिण भारत में गेहूं व बाजरा की फसल नगण्य होने से खाद्यान्न के लिए मध्य व उत्तरी राज्यों से गेहूं मंगाया जाता है। आम तौर पर के गेहूं की फसल के सीजन के बाद दक्षिणी राज्योंं से गेहूं की मांग आती है। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के चलते फरवरी माह से खाद्यान्न मांग आना शुरू हो गया। ऐसे में ढाई हजार मीट्रिक टन गेहूं व बाजरा के भेजा गया। गत वर्ष रेलवे स्टेशन के रेक प्वाइंट्स से गेहूं-बाजरा के एक शॉर्ट रैक को लदान हुआ था। इस वर्ष शुरुआती पांच माह में खाद्यान्न के मालगाड़ी रेकों की संख्या बढ़ कर आठ हो गई। जिसके आगामी महीनों में बढऩे की उम्मीद है।

सूजी बनाने और खाद्यान्न में काम आता गेहूं-
व्यापारियों के अनुसार दक्षिण राज्यों में गेहूं सूजी बनाने व प्रवासी उत्तर भारतीयों के खाद्यान्न के रूप में काम आता है। पूर्वी राजस्थान का गेहूं की दाना उम्दा होने से सूजी बनाने के कारखाना में ज्यादा मांग रहती हे। वहीं कैटल फीड के नाम से जाने बजारा प्रसंस्करत खाद्य वस्तुओं के साथ प्रमुख तौर मुर्गीदाना के रूप में उपयोग लिया जाता है। हिण्डौन से चार रैक त्रिपुर, 3 मदुरै तथा एक बिहार भेजा गया।

एक रैक से होती 70-75 लाख रुपए की आय-
स्टेशन से 42 डिब्बों की मालगाड़ी के एक रैक को दक्षिणी राज्य मेें भेजने से रेलवे को माल भाड़ा के रूप में 70 से 75 लाख रुपए की आय होती है। जिसमें दूरी और वजन के साथ कमी व इजाफा होता है।
रेलवे सूत्रों के अनुसार जनवरी से जून माह की 9 तारीख तक खद्यान्न ढुलाई से रेलवे स्टेशन को4 करोड 12 लाख 35 हजार 992 रुपए आय हुई है। जो गत वर्ष की तुलना में 10 करोड़ रुपए अधिक है।

सूना निकला बीता साल-
कोरोना की पहली लहर में सख्त लॉक डाउन होने से व्यापारिक गतिविधियां ठप रही। वर्ष के अंतिम माह दिसम्बर में गेहूं बाजरा का शॉट मालगाड़ी रैक बिहार भेजा गया। जिससे रेलवे को महज 18 लाख 52 हजार 836 रुपए की आय हुई थी।


निर्यात की तुलना में आयात रेक अधिक-
रेलवे स्टेशन पर गुड्स निर्यात की तुलना में आयात रेकों संख्या अधिक है। रेलवे सूत्रों के अनुसार के अनुसार स्टेशन पर प्रतिमाह रासायनिक खाद व सीमेंट के औसतन 6-7 रैक आते हैं। जबकि खाद्यान्न के रैकों का लदान फसली सीजन के साथ मांग पर निर्भर रहता है। ऐसे में माह में दो से तीन मालगाड़ी रेक ही रवाना होते हैं।


इनका कहना है...
दक्षिण भारत में गेहूं व बाजरा के लदे मालगाड़ी के आठ रेक भेजे गए। मात्र पांच माह की अवधि में रेलवे को स्थानीय स्टेशन के रैक प्वाइंट से 4 करोड़ रुपए से अधिक की आय हुई है। मांग बरकरार रही तो आय में इजाफे की उम्मीद है।
-अशोक शर्मा, रेलवे स्टेशन मैनेजर,
रेलवे स्टेशन, हिण्डौनसिटी.


फैक्ट फाइल

माह ...........रेक संख्या ...आय रुपए
फरवरी....... 01........ .....71 लाख 80 हजार 980
मार्च ...........02 .............75 लाख 19 हजार 165
अपे्रल .......03............ 1 करोड़ 87 लाख 84 हजार 969
मई ............01............. 38 लाख 66 हजार 730
जून ...........01 ..............38 लाख 84 हजार148 (9 जून तक)

Anil dattatrey Reporting
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