सरकार शिक्षा क्षेत्र में हर साल करोड़ों रु. खर्च करती है, फिर भी बच्चों के खाने पर भ्रष्टाचार भारी; मदरसे में न हैं रसोई न आलमारी

रसोई की कोई व्यवस्था नहीं, तो बच्चे बर्तनों से घर ले जाकर खाते हैं पोषाहार...

By: Vijay ram

Published: 20 Jul 2018, 10:19 PM IST

करौली.
राजस्थान में मान्यता प्राप्त यहां के रावण की रुंडी के मदरसे में सुविधाओं का अभाव होने से पोषाहार व्यवस्था गड़बड़ाई हुई हैं। रावण की रूंडी स्थित मस्जिद में संचालित मान्यता प्राप्त मदरसे में रसोई की कोई व्यवस्था नहीं हैं।

 

इस कारण मानदेय पर मदरसे के पास की एक महिला अपने घर में पोषाहार तैयार करती है, जहां से बच्चे पोषाहार को अपने घर लेकर जाते हैं। बाद में बच्चे फिर पढऩे के लिए आते हैं। गुरुवार सुबह ११ बजे मदरसे के पास ऐसी ही तस्वीर दिखाई दी। पोषाहार बनाने वाली महिला के घर से बच्चे अपने बर्तनों में पोषाहार में तैयार खिचड़ी घरों पर ले जा रहे थे।

 

बच्चों का कहना रहा कि खिचड़ी हो या भी फिर दाल रोटी। उन्हें ऐसे ही घरों से बर्तन लाकर पोषाहार घर ले जाना पडता है। पोषाहार बनाने वाली महिला का कहना रहा कि नामांकित बच्चों के साथ अनामांकित बच्चे भी आ जाते हैं। इस कारण कई बार बच्चों को पोषाहार कम पड़ जाता है।

 

पैराटीचर के पैर दरीपट्टी पर, बच्चे जमीन पर
मान्यता प्राप्त मदरसे की गुरुवार को दोपहर १२ बजे एक तस्वीर यह भी दिखाई दी कि बच्चे जमीन पर बैठे थे। बच्चों को बैठने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई एक दरी पट्टी को पैराटीचर ने अपनी कुर्सी के नीचे पैर रखने के लिए बिछाया हुआ था। पैराटीचर ने बताया कि अन्य दरीपट्टी बक्से में रखी हुई हैं।

 

रसोई नहीं हैं, कहां बनवाएं पोषाहार
मदरसे के पैराटीचर गबरूद्दीन ने बताया कि मस्जिद में चल रहे मदरसे में रसोई नहीं है। मस्जिद में ही बच्चों को पोषाहार दिया जाता है तो गंदगी फैल जाती है। ऐसे में पोषाहार कॉलोनी निवासी महिला से उसके घर में ही पोषाहार बनाकर बच्चों को वितरण करने की मजबूरी बनी हुई है।

 

पोषाहार बांटने के लिए नहीं, खाने के लिए है
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी बल्लभराम लहकोडिया ने बताया कि पोषाहार मदरसे में ही तैयार होकर वहीं बच्चों को खाने के लिए दिया जाना चाहिए। पोषाहार के लिए बर्तन और उसे खाने के लिए बच्चों को घर जाना पड रहा है तो काफी गंभीर मामला है। इसे जांच कर ठीक कराया जाएगा।

 

होती है परेशानी
बच्चों को घरों से बर्तन लाकर पोषाहार ले जाने में परेशानी होती है वहीं इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित होती है। इधर अभिभावकों का कहना है कि राज्य सरकार शिक्षा के नाम पर हर साल लाखों करोड़ों रुपए खर्च करती है, लेकिन फिर भी कई जगह सुविधाओं के अभाव में परेशानी उठानी पड़ती है।

 

मदरसे में रसोई नहीं होने से बच्चों के सामने ऐसी नौबत आ रही है। उन्हें पोषाहार के लिए घरों से बर्तन ले जाने पड़ते हैं। वहीं पोषाहार योजना का ठीक तरह से संचालन भी नहीं हो पाता। अभिभावकों ने मदरसे में शीघ्र ही रसोई बनवाने की जरूरत बताई है। जिससे बच्चों को परेशानी नहीं उठानी पड़े।

Vijay ram
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