ब्लड बैंक पड़ा है रीता

जिला मुख्यालय के सामान्य चिकित्सालय की ब्लड बैंक को रक्त की दरकार है। पिछले 18 दिन से ब्लड बैंक के स्टॉक में एक भी यूनिट रक्त नहीं है

By: शंकर शर्मा

Published: 16 Apr 2016, 11:51 PM IST

करौली. जिला मुख्यालय के सामान्य चिकित्सालय की ब्लड बैंक को रक्त की दरकार है। पिछले 18 दिन से ब्लड बैंक के स्टॉक में एक भी यूनिट रक्त नहीं है। ऐसे में आपात स्थिति में आने वाले जरूरतमंद रोगियों को रक्त देने के लिए रक्त उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में स्थिति में गंभीर रोगियों की जान को खतरा भी हो सकता है। असल में स्थानीय चिकित्सालय में रक्तदाताओं का टोटा है। इसके चलते लोग रक्तदान करना तो दूर अपने परिजनों के लिए भी रक्त देने से गुरेज करते हैं। वे ब्लड बैंक में उपलब्ध रक्त को हासिल करने के लिए हर प्रकार का जुगाड़ (जतन) लगा लेते हैं।

यही कारण है कि ब्लड बैंक के स्टॉक में रखी रक्त यूनिट साफ होती चली गई और नौबत ऐसी आई है कि 29 मार्च से यहां एक भी यूनिट रक्त नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में रक्त के अभाव में रैफर करना मजबूरी बनी है। ये हालत तब हैं जब जिले में कैलादेवी मेला चल रहा है, जिसमें आए दिन की दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। गौरतलब है कि ब्लड बैंक में 650 यूनिट संग्रहण की क्षमता है। रोजाना करीब 8-10 यूनिट तथा बीमारियों के मौसम में 20-25 यूनिट रक्त रोगियों को चढ़ाया जाता है।

रिप्लेसमेंट की है व्यवस्था
अस्पताल में भर्ती रोगियों को जितने रक्त की आवश्यकता होती है, उनके परिजनों से उतनी यूनिट रक्त लेकर उसके बदले ब्लड बैंक से उपलब्ध करा दी जाती है। इसके अलावा असहाय, लावारिस व दुर्घटना के गंभीर रोगियों के साथ में परिजन मौजूद नहीं होने की स्थिति में ब्लड बैंक में जमा रक्त में से उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में ब्लड बैंक में रक्त का संग्रहण होना आवश्यक है।

दान का रक्त भी खप गया
सूत्र बताते हैं कि जिले में पहले ही रक्तदान के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। इस पर जो रक्त शिविरों में एकत्रित होता है वो भी जरूरतमंदों से ज्यादा पहचान वालों को दे दिया जाता है। आरोप तो ये भी लगते हैं कि खून का सौदा भी कर दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार जिले में वर्ष 2015 में आयोजित 16 शिविरों में एकत्रित हुआ 652 यूनिट रक्त बिना रिप्लेसमेंट के दे दिया गया। जबकि जनवरी माह से अब तक आयोजित तीन शिविरों में आया 64 यूनिट रक्त भी मात्र तीन माह में ही खप गया है। अब ब्लड बैंक का बैलेंस जीरो हो गया, जिसका खमियाजा जरूरतमंद मरीजों को झेलना पड़ रहा है।

करना पड़ता है रैफर
 हालांकि अब तक ऐसी स्थिति नहीं आई है, लेकिन दुर्घटना के घायल का अगर ज्यादा रक्त निकल जाता है तो उसे रक्त चढ़ाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में जब ब्लड बैंक में भी रक्त ना हो और घायल के साथ उसका कोई परिजन भी नहीं हो तो मरीज को रैफर ही करना पड़ता है।
डॉ. ओ.पी. मीणा,
सर्जन, सामान्य चिकित्सालय करौली

देता कोई नहीं, लेने को सब तैयार
 ब्लड बैंक खाली पड़ा है। क्योंकि यहां रक्तदान तो कोई करना नहीं चाहता, लेकिन लेने को सब तैयार रहते हैं। इस कारण स्टॉक में रखी सब यूनिट खप गई हैं। -डॉ धर्म बाई मीणा, प्रभारी ब्लड बैंक, सामान्य चिकित्सालय करौली
शंकर शर्मा
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