खो ना जाए शिवरात्रि पशु मेले की पहचान

करौली. राज्य के दस पशु मेलों में शुमार करौली का महाशिवरात्रि पशु मेला अव्यवस्थाओं की भेंट चढऩे से वर्ष दर वर्ष अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। स्थिति यह है कि पांच वर्ष पहले मेले में जहां करीब 15 हजार विभिन्न वंशों के पशु आते थे, वहीं अब यह संख्या छह से सात हजार में सिमट गई है।

By: Abhishek ojha

Published: 09 Feb 2017, 06:25 PM IST

करौली. राज्य के दस पशु मेलों में शुमार करौली का महाशिवरात्रि पशु मेला अव्यवस्थाओं की भेंट चढऩे से वर्ष दर वर्ष अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। स्थिति यह है कि पांच वर्ष पहले मेले में जहां करीब 15 हजार विभिन्न वंशों के पशु आते थे, वहीं अब यह संख्या छह से सात हजार में सिमट गई है। व्यापारी भी अब पहले के मुताबिक नहीं आ पा रहे हैं। इससे करीब एक पखवाड़े तक चलने वाला मेला अब महज एक सप्ताह भी नहीं चल पाता। मेला गेट बाहर मेला मैदान में रियासतकाल से पशु मेला आयोजित होता रहा है। पशुपालन विभाग की ओर से लगने वाले इस मेले में राजस्थान सहित उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व हरियाणा से व्यापारी व पशुपालक पशुओं को लेकर आते थे। हजारों की संख्या में गोवंश, ऊष्ट्र वंश, भैंस वंश, अश्व वंश, बकरा-बकरी वंश आदि के आने से मेले की रौनक रहती थी। इनमें ऊष्ट्र व गोवंश प्रमुख तौर पर शामिल है। विभाग की ओर से भी व्यापारियों को व्यवस्था प्रदान की जाती, वहीं मेला मैदान की भी साफ-सफाई कर बिजली-पानी की व्यवस्थाओं से दुरुस्त रखा जाता, लेकिन धीरे-धीरे व्यवस्थाएं सिमटती गईं। इससे पशुपालकों एवं व्यापारियों का रुझान घटता गया। ऐसे में मेला मैदान में अब आने वाले व्यापारी-पशुपालकों एवं मवेशियों की संख्या घटती जा रही है।


अतिक्रमण से सिकुड़ रहा मैदान

देखरेख के अभाव में मेला मैदान अतिक्रमण की भेंट चढ़ता जा रहा है। लोगों की तो बात दूर सरकारी विभाग ही उसमें अतिक्रमण करने से नहीं चूक रहे। विद्युत निगम ने मैदान के आधे से ज्यादा हिस्से में विद्युत पोल डाल रखे हैं। इसके अलावा कुछ लोगों ने मैदान में ही पक्के निर्माण कर लिए हैं। इससे पशुपालकों को मवेशियों को बांधकर रखने में परेशानी हो रही है।


ट्रांसफार्मर की नहीं फैसिंग

मैदान में विद्युत निगम का ट्रांसफार्मर स्थापित है। उसके चारों ओर सुरक्षा के लिए फैसिंग नहीं होने से हादसे का अंदेशा बना हुआ है। मेले में पशुपालक और व्यापारी अपने परिवार सहित आते हैं। वहीं मवेशी भी जहां-तहां बंधे रहते हैं। ऐसे में ट्रांसफॉर्मर के खुले तार कभी भी हादसे का सबब बन सकते हैं।


व्यवस्थाएं सिफर, पशुपालकों का आना शुरू

नगर परिषद ने मैदान की पर्याप्त सफाई  नहीं कराई है। मैदान में जगह-जगह कचरे के ढेर पड़े हैं, वहीं सड़क के दूसरी ओर कींकर, बबूल के पेड़ खड़े हैं। मजबूरन पशुपालकों को गंदगी के बीच ही रहना पड़ रहा है। लालसोट से आए पशुपालक गोपीलाल व महावीर सिंह ने बताया कि अन्य वर्षों की तरह मैदान में सफाई नहीं की गई है।


रुझान घटा है

पशुपालकों-व्यापारियों को सभी प्रकार की व्यवस्था प्रदान करने की पूर्ण कोशिश की जाती हैं। फिर भी उनका मेले के प्रति रुझान घटा है।

डॉ. भागीरथलाल मीणा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, करौली 

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