श्रीमहावीरजी (करौली). अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी में भगवान महावीर के वार्षिक मेले के मौके पर शनिवार को आयोजित भगवान महावीर की रथयात्रा में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा।

तपती दोपहरी के बीच भगवान जिनेन्द्र की एक झलक पाने की खातिर श्रद्धालु आतुर नजर आए। दोपहर में जैसे ही भगवान जिनेन्द्र का स्वर्ण मंडित रथ मुख्य मंदिर के द्वार से बाहर निकला तो जिनेन्द्र के गगनभेदी जयकारे गुंजायमान हो उठे।

जैन संप्रदाय के 24वे तीर्थंकर भगवान महावीर की यह रथयात्रा मुख्य मंदिर से प्रारंभ होकर गंभीर नदी के तट पहुंची। जैन मुनि चिन्मयानंद युधिष्ठिर सागर की उपस्थिति में आयोजित हुई रथ यात्रा में जयपुर ,आगरा ,मेरठ गुवाहाटी, लखनऊ ,दिल्ली, सहारनपुर सहित देश के विभिन्न शहरों से जैन-अजैनों ने हिस्सा लिया। छोटे बालक केसरिया पताकाएं लेकर आगे बढ़ रहे थे।

बैंड बाजे की धुन पर श्रद्धालु जमकर नाच रहे थे। प्राचीन रथ में विराजित भगवान महावीर के रथ के सारथी के रूप में हिण्डौन के उपखण्ड अधिकारी सुरेशकुमार बुनकर एवं मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल बैठे थे। रथ के आगे-आगे ऐरावत हाथी और नाचते गाते श्रद्धालु बाबा महावीर को भक्तिभाव से भगवान जिनेंद्र के जयकारे लगाते आगे बढ़ रहे थे।

चांदनपुर वाले बाबा का रथ मुख्य मंदिर के कटला परिसर होते हुए मुख्य बाजार होते हुए गंभीर नदी के तट पहुंचा जहां भगवान श्री जी का जल अभिषेक हुआ। पंडित मुकेश शास्त्री ने वैदिक पूजा विधान के अनुसार मंत्रोचार कर भगवान महावीर का जलाभिषेक किया। इसके बाद भगवान महावीर के रजत कलशों की बोली लगाई गई वापसी में भगवान जितेंद्र की पदयात्रा गंभीर नदी से मुख्य बाजार होती हुई मुख्य मंदिर पहुंची। परम्परा के अनुसार रथ के आगे मीणा समाज के लोग हाथों में लाठियां लेकर चल रहे थे। वहीं वापसी में रथ की अगुवाई गुर्जर समाज के लोगों ने की।

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