हजारों लोगों से करोड़ों रुपए हड़प कर भागा जालसाज मध्यप्रदेश से पकड़ा

The fraudster ran away from Madhya Pradesh by grabbing crores of rupees from thousands of people-चिटफंड कंपनी में निवेश के नाम पर की गई थी ठगी-एसपी द्वारा घोषित है पांच हजार रुपए का था ईनाम

By: Anil dattatrey

Published: 15 Sep 2020, 04:32 PM IST


हिण्डौनसिटी. अधिक ब्याज का प्रलोभन देकर अल्पावधि में जमाधन दोगुना-तिगुना करने का झांसा देकर हिण्डौन उपखंड क्षेत्र के हजारों निवेशकों से करोड़ों रुपए की ठगी कर फरार हुए स्काईलॉर्क नाम की चिटफंड कंपनी के एक और डायरेक्टर को जिला पुलिस की स्पेशल टीम (डीएसटी) ने सोमवार को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार कर लिया। जालसाज आरोपी की गिरफ्तारी पर जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से पांच हजार रुपए का ईनाम घोषित है।


डीएसटी प्रभारी यदुवीर सिंह ने बताया कि आरोपी मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के गोविन्दपुरी थाना इलाके में रामवाटिका निवासी रमाशंकर यादव है। जो स्काईलॉर्क कुलाक एसएलडीआई इन्फ्राकॉम नाम की एक चिटफंड कंपनी का डायरेक्टर हैं। आरोपी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर वर्ष 2012 में हिण्डौन में चिटफंड कंपनी का कार्यालय खोला था। इसके बाद कमीशन एजेन्ट नियुक्त कर शहरी व ग्रामीण इलाके के भोले-भाले लोगों को मोटे ब्याज का झांसा देकर आरडी, एफडी समेत विभिन्न बैंकिंग योजनाओं में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए जमा कर लिए। करीब दो वर्ष बाद रातोंरात चिटफंड कंपनी का कार्यालय बंद कर लोगों के द्वारा निवेश किए करोड़ों रुपए लेकर चंपत हो गए।

पांच राज्यों में दो दर्जन से अधिक मामलों में वांछित-
आरोपी के खिलाफ राजस्थान में पांच, मध्यप्रदेश में एक, उत्तरप्रदेश में सात, गुजरात में चार, तेलंगाना में एक ठगी के प्रकरण समेत देशभर के विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक प्रकरण दर्ज हैं। वर्ष 2017 में हिण्डौन कोतवाली पर कंपनी में कर्मचारी रहे सुलेमान खान व सूरौठ थाने पर निर्मल जाट व देवीसिंह जाटव ने आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कराया था। लेकिन तभी से आरोपी फरार थे। बीते अगस्त माह की 27 तारीख को एसपी मृदुल कच्छावा ने चिटफंड कंपनी के जालसाज निदेशक रमाशंकर यादव, संजय जैन, जयहिन्द कुमार व महेन्द्र कुमार विश्वकर्मा की गिरफ्तारी पर के लिए पांच-पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया था।

कांस्टेबलों ने दिलाई कामयाबी-
जालसाजी का शिकार हुए निवेशक लगातार अपने जमा पैसे की वापसी की गुहार लगा रहे थे। इस पर एसपी ने चिटफंड कंपनी के जालसाज इनामी आरोपियों को पकडऩे का जिम्मा डीएसटी को दिया। इसके बाद डीएसटी के कांस्टेबल परमजीत सिंह व मानसिंह अपने मुखबिरों के जरिए आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाने लगे। कांस्टेबलों की महत्वपूर्ण जानकारी के दम पर करीब एक पखवाड़ा पूर्व 28 अगस्त को डीएसटी ने जयङ्क्षहद व महेन्द्र कुमार को वाराणसी व प्रयागराज से गिरफ्तार किया था। आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के बाद दोनों कांस्टेबल फिर सक्रिय हुए तो आरोपी रमाशंकर यादव के मध्यप्रदेश के भिंड जिला के मऊ कस्बे में होने की सूचना मिली। इस पर टीम प्रभारी यदुवीर सिंह, एएसआई राजवीरसिंह, परमजीत, मानसिंह, मोहनसिंह, तेजवीर, जिलयसिंह, मनीष व पुष्पेन्द्र को साथ लेकर निजी वाहन से मऊ पहुंचे। जहां मोबाइल लोकेशन के आधार पर एक ढाबे पर दबिश देकर रमाशंकर को दबोच लिया।

कंगाली में ढाबे पर बेलनी पड़ गई रोटी-
डीएसटी के मुताबिक चिटफंड कंपनी का जालसाज डायरेक्ट रमाशंकर यादव कुछ बर्ष पहले तक करोड़ों का आसामी हुआ करता था, लेकिन देशभर में निवेशकोंं से ठगी के दर्जनों मुकदमे दर्ज होने के बाद पुलिस से बचनेे के लिए फरारी काटनी पड़ी। इस बीच वह करोड़पति से कंगाल हो गया। इधर पुलिस की दबिशें बढऩे लगी तो रमाशंकर यादव राजनीति का गढ़ माने जाने वाले ग्वालियर स्थित अपने घर से कोसों दूर भिंड जिले के गुमनाम मऊ कस्बे में टीनशैड़ में संचालित एक छोटे से ढ़ाबे पर रोटी बनाने लगा। जहां ढाबा मालिक उसे दो वक्त का भोजन व पांच हजार रुपए पगार के रूप में देता था। डीएसटी द्वारा आरोपी को इसी ढाबे से दबोचा गया।

ड्राईवर था, लेकिन बना दिया डायरेक्टर-
आरोपी रमाशंकर ने अभी तक की पूछताछ में पुलिस को बताया कि चिटफंड कंपनी के मुख्य कर्ताधर्ता जयहिन्द कुमार व महेन्द्र कुमार विश्वकर्मा थे। वह तो उनकी कार का ड्राईवर था, लेकिन विश्वास पात्र होने की वजह रिकॉर्ड में उसे भी डायरेक्टर बना दिया। आरोपी ने बताया कि जब कभी कंपनी की सेमीनार होती, तब उसे सूट-बूट पहनाकर मंच पर बैठा दिया जाता, लेकिन बोलने की इजाजत तक नहीं थी।

Anil dattatrey Reporting
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