कागजों में दब गई गाडिय़ा लुहारों के आवास की योजना,तीन साल में एक भी आवास स्वीकृत नहीं

करौली. गाडिय़ा लुहारों के उत्थान के लिए (The scheme of housing of the jewelers buried in paper) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित महाराणा प्रताप भवन निर्माण योजना कागजों में दब गई है।

करौली. गाडिय़ा लुहारों के उत्थान के लिए (The scheme of housing of the jewelers buried in paper) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से संचालित महाराणा प्रताप भवन निर्माण योजना कागजों में दब गई है। जिससे गत तीन साल में एक भी गाडिय़ा लुहार को भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत नहीं की गई है। राज्य सरकार ने आठ साल पहले गाडिय़ा लुहारों के उत्थान तथा उन्हें स्थायी तौर पर बसाने के लिए महाराणा प्रताप भवन निर्माण योजना की शुरुआत की। योजना की शुरुआत में अधिक दवाब रहने पर पर विभाग के अधिकारियों ने पचास से अधिक घर बनवाए। लेकिन बाद में इस योजना पर ठीक प्रकार से काम नहीं किया। इस कारण विभाग के अधिकारियों ने गाडिय़ा लुहारों की जागरुकता व आवास निर्माण की दिशा में काम नहीं किया। जिससे एक भी गाडिय़ा लुहार को आवास स्वीकृत नहीं हुआ है। एक गाडिय़ा लुहार को आवास निर्माण के लिए ५० हजार रुपए तक की सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है। जिन्हें स्थायी निवासी का प्रमाण पत्र समाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में जमा कराना होता है। इसके बाद नगरपरिषद पट्टे जारी करती है। पट्टा मिलने के बाद पात्र व्यक्ति को आवास स्वीकृत किया जाता है।


जागरुकता का अभाव
महाराणा प्रताप भवन निर्माण योजना के लाभ उठाने के लिए गाडिय़ा लुहारों में जागरुकता का अभाव है। क्योंकि अधिकतर गाडिय़ा लुहार अशिक्षित है, जिन्हें योजना तक पता ही नहीं है। अनेक गाडिय़ा लुहारों से इस बारे में बातचीत की तो उन्होंने योजना के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। योजना के संचालन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने गाडिय़ा लुहारों की बस्ती में जाकर भवन निर्माण के बारे में जानकारी तक नहीं दी है। जागरुकता कार्यक्रम संचालित नहीं किया गया है। जिससे योजना का लाभ गरीबों को नहीं मिल रहा है।


तिरपाल रहने को मजबूर
करौली में रणगमा तालाब, तीन बड़, हिण्डौन सिटी, सपोटरा, श्रीमहावीरजी सहित अन्य स्थानों पर गाडिय़ा लुहार दयनीय स्थिति में है जो एक मात्र तिरपाल की नीचे रहने को मजबूर है। सर्दी, बारिश व गर्मी के मौसम में उन्हें विशेष परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा उनकी गाडिय़ों के समीप शहरी क्षेत्रों में गंदगी का जमावड़ा भी रहता है, जिससे बीमारी फैलने की आशंका उत्पन्न हुई है। इसके बाद भी गाडिय़ा लुहारों को जागरुक कर आवास योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है।


आवेदन ही नहीं आए
गाडिय़ा लुहारों ने आवास स्वीकृत कराने के लिए एक भी आवेदन नहीं किया है। इस कारण आवास स्वीकृत नहीं किए गए है। अब जागरुकता कार्यक्रम भी संचालित करेंगे।
रिंकी सहायक निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग करौली।

vinod sharma
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