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चुनाव से पहले मुरझाया कमल

चुनाव से पहले मुरझाया कमल

कांग्रेस का जिला प्रमुख बनना तय, भाजपा के पास उम्मीदवार ही नहीं

करौली जिला परिषद में कांग्रेस छठवीं बार जिला प्रमुख बनाने की तैयारी में है। कांग्रेस में कोई बड़ा उलटफेर और चमत्कारिक रूप से बगावत नहीं होने की स्थिति में तय माना जा रहा है कि कांग्रेस का जिला प्रमुख निर्वाचित होगा। ऐेसे में जिला प्रमुख की महज औपचारिकता गुरुवार को होनी है। कांग्रेस से निर्विरोध जिला प्रमुख बनाने के प्रयास हैं जबकि भाजपा के नेता अपनी दम निर्विरोध निर्वाचन को रोकने में लगा रहे है।

करौली

Published: December 22, 2021 09:49:43 pm

चुनाव से पहले मुरझाया कमल...

कांग्रेस का जिला प्रमुख बनना तय, भाजपा के पास उम्मीदवार ही नहीं

भाजपा की कोशिश निर्विरोध निर्वाचन रोकने पर सिमटी

करौली। जिला परिषद में कांग्रेस छठवीं बार जिला प्रमुख बनाने की तैयारी में है। कांग्रेस में कोई बड़ा उलटफेर और चमत्कारिक रूप से बगावत नहीं होने की स्थिति में तय माना जा रहा है कि कांग्रेस का ही जिला प्रमुख निर्वाचित होगा। ऐेसे में जिला प्रमुख चुने जाने की महज औपचारिकता गुरुवार को पूरी होनी है। कांग्रेस से निर्विरोध जिला प्रमुख बनाने के प्रयास चल रहे हैं जबकि भाजपा के नेता अपनी दम निर्विरोध निर्वाचन को रोकने में लगा रहे है। जिला प्रमुख पद पर कांग्रेस की जीत इसलिए तय मानी जा रही है कि भाजपा के पास जिला प्रमुख पद के लिए कोई प्रत्याशी ही उपलब्ध नहीं है।
चुनाव से पहले मुरझाया कमल
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अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित जिला प्रमुख पद के लिए भाजपा के टिकट पर कोई अनुसूचित जाति महिला सदस्य विजयी नहीं हुई है। भाजपा से जिला प्रमुख पद पर प्रमुख दावेदार वीणा चंदेल को माना जा रहा था, जो जिला परिषद के वार्ड १९ से सदस्य का चुनाव भी नहीं जीत सकी। भाजपा टिकट पर अन्य एससी महिला के चुनाव नहीं जीतने से जिला प्रमुख पद के लिए कांग्रेस की राह आसान हुई है।
उल्लेखनीय है कि २७ सदस्यों की करौली जिला परिषद में कांग्रेस के १५ तथा भाजपा के मात्र ७ सदस्य जीत पाए हैं। इनके अलावा ४ निर्दलीय और एक महिला सदस्य बसपा से जीते हैं।
केवल पांच बन सकती है प्रमुख

चूंकि जिला प्रमुख पद अनुसूचित जाति महिला को आरक्षित है, ऐसे में कुल २७ सदस्यों में से अनुसूचित जाति की निर्वाचित पांच महिला सदस्य ही प्रमुख पद की कुर्सी पर बैठ सकती हैं। इन पांच सदस्यों में भाजपा की कोई सदस्य नहीं है। जबकि कांग्रेस टिकट पर अनुसूचित जाति की चार महिला सदस्य जीती हैं। पांचवीं महिला सदस्य वार्ड २२ से बहुजन समाज पार्टी की अशोकी निर्वाचित हुई हैं। बसपा की इकलौती सदस्य होने से उनका जिला प्रमुख बनना संभव नहीं लगता।
सूत्रों के अनुसार पंचायत राज मंत्री रमेश मीणा के विधानसभा क्षेत्र के वार्ड १६ से निर्वाचित शिमला को मंत्री रमेश का समर्थन मिलने के कारण शिमला की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

पांच में से ४ केवल साक्षर

जिला प्रमुख बनने की योग्यता रखने वाली पांच अनुसूचित जाति महिला सदस्यों में से केवल शिमला को छोड़कर सभी की योग्यता साक्षर ही है। शिमला की शैक्षणिक योग्यता ८ वीं है। ३१ साल की शिमला, एक व्यवसायी की पत्नी है जो बाहर व्यवसाय करते हैं।
भाजपा के निर्विरोध निर्वाचन रोकने के प्रयास

जिला प्रमुख पद पर पिछड़ चुकी भाजपा अब केवल इस चमत्कार की आस में है कि कांग्रेस का जिला प्रमुख निर्विरोध निर्वाचित न हो। इसके लिए बहुजन समाज पार्टी की विजयी हुई सदस्य अशोकी को नामांकन भरवाने को तैयार करने की कवायद चल रही है। भाजपा के नेता ये उम्मीद लगाए हुए हैं कि टिकट वितरण से नाखुश होकर कांग्रेस में बगावत हो सकती है। हालांकि इसकी संभावना इसलिए कम हैं। क्योंकि क्रॉस वोटिंग के खतरे से बचाव के लिए कांग्रेस ने निर्दलियों को भी अपने बाड़े में ले रखा है।

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