जिले में कॉमर्स की उच्च शिक्षा पर ताले की नौबत, करौली-हिण्डौन कॉलेजों में पढ़ाने वाला कोई नहीं

जिले में कॉमर्स की उच्च शिक्षा पर ताले की नौबत, करौली-हिण्डौन कॉलेजों में पढ़ाने वाला कोई नहीं
पहले से अध्ययनरत विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में,
विषम स्थिति में दोनों कॉलेजों में नए सत्र के लिए प्रवेश हैं जारी

सुरेन्द्र चतुर्वेदी

करौली. अगर आप करौली-हिण्डौन के राजकीय कॉलेज में कॉमर्स संकाय में प्रवेश लेने जा रहे हैं या अपने बच्चे को प्रवेश दिला रहे हैं तो आपको यह जान लेना जरूरी है कि दोनों शहरों के राजकीय कॉलेजों में कॉमर्स की पढ़ाई कराने के लिए कोई सहायक आचार्य उपलब्ध नहीं है।

By: Surendra

Published: 07 Sep 2021, 11:54 AM IST

जिले में कॉमर्स की उच्च शिक्षा पर ताले की नौबत
करौली-हिण्डौन कॉलेजों में पढ़ाने वाला कोई नहीं
पहले से अध्ययनरत विद्यार्थियों का भविष्य अंधेरे में,
विषम स्थिति में दोनों कॉलेजों में नए सत्र के लिए प्रवेश हैं जारी

सुरेन्द्र चतुर्वेदी

करौली. अगर आप करौली-हिण्डौन के राजकीय कॉलेज में कॉमर्स संकाय में प्रवेश लेने जा रहे हैं या अपने बच्चे को प्रवेश दिला रहे हैं तो आपको यह जान लेना जरूरी है कि दोनों शहरों के राजकीय कॉलेजों में कॉमर्स की पढ़ाई कराने के लिए कोई सहायक आचार्य उपलब्ध नहीं है।
जिले में केवल करौली-हिण्डौन के राजकीय महाविद्यालयों में कॉमर्स फेकल्टी (वाणिज्य संकाय) संचालित है। करौली में तो कॉमर्स की स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाएं भी स्वीकृत हैं लेकिन दोनों कॉलेजों में कॉमर्स के सहायक प्रोफेसरों के पद लगातार रिक्त होने से वाणिज्य की पढ़ाई का ढर्रा बीते कई सालों से बिगड़ा हुआ है। करौली कॉलेज में वाणिज्य संकाय में इकलौते आचार्य सुरेन्द्र यादव का भी एक माह पहले स्थानान्तरण होने से करौली कॉलेज में कॉमर्स की पढ़ाई पर ताला लगने की नौबत आ गई है। आर्थिक प्रशासन एवं वित्तीय प्रबंध विषय के सहायक आचार्य होने के बावजूद सुरेन्द्र यादव बीते ढाई वर्ष से अकेले अपने बूते पर करौली कॉलेज में वाणिज्य संकाय को जीवंत बनाए हुए थे। कमोवेश ऐसी स्थिति हिण्डौन के कॉलेज की है। वहां पर भी कॉमर्स विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला कोई नहीं है। व्यावसायिक प्रशासन के इकलौते आचार्य रामराज मीणा को प्राचार्य का दायित्व सौंपा हुआ है।
खास बात यह है कि सभी पदों के रिक्त होने के बावजूद नए सत्र के लिए वाणिज्य संकाय में प्रवेश को आवेदन पत्र जमा किए जा रहे हैं। सवाल ये उठता है कि जब पढ़ाने के लिए सहायक आचार्य के पद रिक्त हैं तो कॉमर्स में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का भविष्य क्या होगा। इसको लेकर किसी को चिंता नहीं। वर्तमान में करौली कॉलेज में वाणिज्य स्नातक द्वितीय वर्ष में 29 तथा फाइनल वर्ष में 39 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष में 35 विद्यार्थी नामांकित हैं। इनकी पढ़ाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जबकि लगभग 100 नए विद्यार्थियों के प्रवेश लेने से ये संख्या और बढ़ जाएगी।


मापदण्ड से एक तिहाई पद स्वीकृत, वे भी रिक्त

करौली के पीजी कॉलेज में कॉमर्स फेकल्टी के तीन विषयों (व्यावसायिक प्रशासन, आर्थिक प्रशासन एवं वित्तीय प्रबंध, लेखा शास्त्र) में स्नातकोत्तर कक्षाओं की स्वीकृति मिली हुई है।
यूजीसी के मापदण्डों के अनुसार प्रत्येक विषय में तीन-तीन सहायक आचार्य के पद स्वीकृत होने चाहिए। लेकिन सरकार ने केवल एक-एक पद स्वीकृत कर रखा है और ये एक-एक पद भी वर्षो से खाली हैं।
कॉमर्स फेकल्टी में सहायक प्रोफेसरों की कमी बीते कई वर्षो से है। लेकिन जनप्रतिनिधि और राजनेताओं द्वारा ध्यान नहीं देने का नतीजा है कि अब इस संकाय के बंद होने की नौबत आ रही है। ढाई वर्ष से कॉमर्स के नाम पर कॉलेज में केवल आर्थिक प्रशासन एवं वित्तीय प्रबंध के सहायक आचार्य सुरेन्द्र यादव थे। कॉमर्स फेकल्टी को संचालित करने की मंशा से वे विद्यार्थियों को अन्य विषयों की पढ़ाई कराकर सहयोग कर रहे थे। उनके स्थानान्तरण के बाद अब यहां कॉमर्स संकाय का कोई धणी-धोरी नहीं रहा है।

प्रदेश में आधे से अधिक पद रिक्त

असल में पूरे प्रदेश में ही वाणिज्य के आचार्य और सहायक आचार्य के पदों की कमी है। प्रदेश भर में कॉमर्स संकाय के तीन विषयों के 794 स्वीकृत पदों के मुकाबले में 489 पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें व्यावसायिक प्रशासन विषय के 257 पद स्वीकृत है जबकि मात्र 90 पदों पर नियुक्ति दी हुई है। इसी प्रकार आर्थिक प्रशासन एवं वित्तीय प्रबंध के 244 पदों में से 141 तथा लेखा शास्त्र के 293 पदों में से 158 पद रिक्त पड़े हुए हैं। ऐसे में ये भी नहीं माना जा सकता कि भविष्य में करौली-हिण्डौन में पदों को सहजता से भर दिया जाएगा।

कर रहे हैं प्रयास

करौली में कॉमर्स विषय के प्रोफेसर के पदस्थापन के लिए प्रयास कर रहे हैं। कॉलेज आयुक्तालय के लिए पत्र लिखे हैं। दो बार क्षेत्रीय विधायक लाखनसिंह मीणा से भी मुलाकात करके आग्रह किया है। उम्मीद है जल्दी नियुक्ति हो जाएगी।
ज्ञानेश्वर मीणा, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय , करौली

Surendra Bureau Incharge
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