scriptThere is a shortage of medicines in Ayurveda dispensaries amidst seaso | मौसमी बीमारियों के बीच आयुर्वेद औषधालयों में दवाओं का टोटा | Patrika News

मौसमी बीमारियों के बीच आयुर्वेद औषधालयों में दवाओं का टोटा

There is a shortage of medicines in Ayurveda dispensaries amidst seasonal diseases

कैसे हो उपचार: औषधियों की आपूर्ति मांग के मुकाबले कम

भरतपुर रसायनशाला से आई औषधियों की आपूर्ति

करौली

Published: October 29, 2021 11:56:50 am

हिण्डौनसिटी.
कोरोना के संक्रमण के बाद क्षेत्र में वायरल और डेंगू बुखार का प्रकोप है। ऐसे में आयुर्वेद औषधालयों में भी रोगियों की आवक बढ़ गई है। मौसमी बीमारियों के दौर में रसायन शाला से औषधियों की आपूर्ति काफी कम मिली है। आयुर्वेद औषधालयों में रोगी भार की तुलना में औषधियां ऊंट के मुहं में जीरा के मानिद हैं।
मौसमी बीमारियों के बीच आयुर्वेद औषधालयों में दवाओं का टोटा
मौसमी बीमारियों के बीच आयुर्वेद औषधालयों में दवाओं का टोटा

आयुर्वेद विभाग की भरतपुर स्थित राजकीय रसायन शाला से हाल ही में मिली दवाओं की खेप को ब्लॉक व ग्रामीण क्षेत्र के औषधालयों को वितरित किया जा रहा है। औषधालयों को 14 हजार 219 रुपए की कीमत की 21 प्रकार की दवाएं व दो प्रकार के वितरण सामग्री भेजी हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार करौली जिला मुख्यालय स्थित आयुर्वेद विभाग के उप निदेशक कार्यालय से रसायनशाला से जारी मांग पत्रक के अनुसार रसायन शाला से दवाएं उपलब्ध कराई जाती हंै। लेकिन मौसमी बीमारियों के दौर में औषधियों की मात्रा काफी कम भिजवाई हैं। वहीं मांग पत्र देने के करीब तीन माह की देरी से दवाएं मिली हैं। गौरतलब है कि जिले से भेजे मांग पत्रों पर रसायन शाला से अगस्त दवाओं की सप्लाई की थी। जो ब्लाक मुख्यालय स्थित नोड़ल आयुर्वेद औषधालयों के माध्यम से अक्टूबर माह के तीसरे सप्ताह में गांवों के औषधालयों में पहुंची हैं।

मात्रा इतनी कि 15 दिन में खप जाए
चिकित्सकों के अनुसार रसायन शाला से मिली औषधियों की आपूर्ति रोगियों की आवक के अनुपात में काफी कम हैं। जिला चिकित्सालय परिसर में संचालित एक छत के नीचे आयुर्वेद औषधालय में प्रति दिन विभिन्न व्याधियों के 25-30 रोगियों की आवक होती है। हालांकि औषध भंडार में एक रोगी के पूरे नुस्खे की दवाएं नहीं मिल पातीं। फिर भी नुस्खा की मात्रा में दवाओं का वितरण किया जाए तो आपूर्ति में मिली औषधियां 15 दिन में ही खप जाएं।
ऊपर से तय होती दवाएं
आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार दवाओं की आपूर्ति से पूर्व जरूरत की औषधियों का का मांग-पत्र लिया जाता है, लेकिन आपूर्ति के लिए औषधियों की सूची रसायनशाला स्तर पर तय होती है। शहरी हो या ग्रामीण सभी औषधालयों को समान बजट की जैसी दवाओं की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में मरीज आने पर नुस्खा अधूरा रह जाता है। केवल अ-श्रेणी आयुर्वेद चिकित्सालय को ही ज्यादा बजट की दवाओं की आपूर्ति मिलती है।
चूर्ण की मात्रा चखने लायक
अक्टूबर माह में औषधालयों में हुई आपूर्ति में चूर्ण की मात्रा चखने के मानिद ही है। यदि नुस्खा तैयार करें तो चूर्ण 40-50 रोगियों के हिस्से में ही आता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार रसायनशाला से एक-एक किलो आंवला चूर्ण व पथ्यादि चूर्ण, उदावर्तहर चूर्ण, नागकेसर चूर्ण, भूम्यामलकी चूर्ण, गिलोय चूर्ण व कालमेघ चूण महज 500-500 ग्राम की आपूर्ति मिली है

इनका कहना है-
उपनिदेशक कार्यालय के जरिए रसायनशाला से औषधियों की आपूर्ति मिली है। जिसे नोड़ल क्षेत्र के औषधालयों को भिजवा दिया है। आपूर्ति में बुखार और मौसमी बीमारियों की दवाएं भी शामिल हैं।
- डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा, नोडल प्रभारी
एक छत के नीचे राजकीय आयुर्वेद औषधालय, जिला चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी।


फैक्ट फाइल
79 आयुर्वेद चिकित्सा केंद्र हैं जिले में।
77 आयुर्वेद औषधालय
8 आयुर्वेद औषधालय एक छत के नीचे योजना
1 जिला आयुर्वेद चिकित्सालय
1 योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय
1 चल चिकित्सा इकाई है जिले में
मौसमी बीमारियों के बीच आयुर्वेद औषधालयों में दवाओं का टोटा

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.