ये हैं सुपर रक्तदाता : रक्तदान के लिए इनका है अलग अंदाज

These are super blood donors: they have a different style for donating blood
रक्तदान से रोगियों को मिल रहा जीवन दान
रक्तदाताओं के लिए ख्यात है हिण्डौन
मकर संक्रांति पर विशेष-

By: Anil dattatrey

Updated: 14 Jan 2021, 10:36 AM IST



हिण्डौनसिटी. मकर संक्रांति यानी दान पुण्य का पर्व। पुण्य अर्जित करने के लिए लोग विविध प्रकार का दान करते हैं। लेकिन रक्तदान कर जीवनदान देने वाले दातार लोगों के लिए प्रेरणादायी बने हुए हैं। एक दिन नहीं बल्कि शिविरों के जरिए वर्ष भर चलने वाले अनूठे दान की अलख जगा कर रक्तदाताओं ने हिण्डौन को अलग पहचान दी है। जहां से हर वर्ष डेढ़ हजार से अधिक यूनिट संकलित दान का रक्त कई शहरों की ब्लड़ बैंकों के माध्यम से अनमोल रक्त लोगों की रगों में दौड़ रहा है। शहर के सैकड़ों रक्त के दातारों में शमिल हैं ये रक्तदाता। जिनकी रक्तदान का अपना अलग अंदाज है।

32 वर्ष की उम्र में 32 बार किया रक्तदान
शहर के धाकड़ पोठा मोहल्ला निवासी युवा रक्तदाता राहुल कम्बलवाल ने रक्तदान के मामले में अपनी उम्र की समकक्षता हांसिल कर ही है। रेडीमेड दुकानदार राहुल 32 वर्ष के हैं और तीन माह पहले तक वे 32 वीं बार रक्तदान कर चुके हैं। अब वे 17 जनवरी को लगने वाले रक्तदान शिविर में सपत्नीक रक्तदान करने को तैयार हैं। राहुल ने बताया कि 18 वर्ष के होने पर उन्होंने पहली बार रक्तदान किया था। उसके बाद वे शहर मेंं लगने वाले शिविरों में पहुंचे वर्ष में 2 या तीन रक्तदान करने को संकल्पित हैं। राहुल का कहना है रक्त के दान को सर्वोपरी रखने के लिए उन्होंंनें उम्र से दो अंक अधिक रक्तदान करने की ठानी हुई है।


ओपनर रक्तदाता बनने जुनून
आमतौर पर लोग स्वैच्छित रक्तदान शिविर में सुविधानुसार रक्तदान करने पहुंचे हैं। लेकिन बयाना रोड चुंगी नाका निवासी फर्नीचर मिस्त्री शफी ताज को पहला रक्तदाना बनने के प्रति खासा जुनून हैं। सबसे पहले रक्तदान करने के लिए शफी शिविर शुरू होने से एक से दो घंटे पहले पहुंचते हैं। शफी का कहना है जीवन बचाने के इस दान वे सबसे आगे रहना चाहते हैं। 22 बार रक्तदान कर चुके शफी ताज 18 रक्तदान शिविर में ओपनर रक्तदाता रहे हैं।

तीन दशक से कर रहे रक्तदान
अग्रसेन शिक्षा प्रसार समिति के अध्यक्ष अनिल गोयल 51 वर्ष की आयु में 37 बार रक्तदान कर चुके हैं। गोयल ने तीन दशक पहले वर्ष 1987 में जयपुर में पहली दफा रक्तदान किया था। इसके बाद से शहर में आयोजित शिविरों में वर्ष में दो बार रक्तदान करते हैं। पिता के रक्तदान के प्रति लगाव को देख गोयल के पुत्र और पुत्री रक्तदान से जीवन बचाने की मुहिम से जुड़ गए हैं।

खुद लगवाते हैं रक्तदान शिविर
शहर की एक शिक्षण संस्था के प्रमुख मोहन नगर निवासी मनीष चौधरी 40 वर्ष की आयु में 41 बार रक्तदान कर चुके हैं। मनीष ने बताया कि वर्ष 1998 में उन्होंने महाराष्ट्र के सिंहदुर्ग जिले मेंं इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान पहली बार रक्तदान किया था। तब से लेकर वे अब तक हर तीन-चार माह में रक्तदान करते हैं। साथ ही अपने शिक्षण संस्थान में भी रक्तदान शिविर आयोतित करावा का युवाओं को रक्तदान के लिए पे्ररित करते हैं।

Anil dattatrey Reporting
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