सरपंच से सांसद का सफर करने वाले चले गए अनंत यात्रा पर

सरपंच से सांसद का सफर करने वाले चले गए अनंत यात्रा पर
शिवचरणसिंह पंचतत्व में हुए विलीन
अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग
करौली। सरपंच से सांसद बनने तक का सफर तय करने वाले बुजुर्ग नेता शिवचरण सिंह इस दुनिया से अलविदा करके अनन्त यात्रा की ओर चले गए। उनका सोमवार को निधन हुआ था और मंगलवार को दोपहर में पार्थिव देह पंच तत्व में विलीन हो गई। भद्रावती नदी के तट के समीप स्थित मोक्षधाम पर सभी धर्म-जाति के हजारों लोगों की मौजूदगी में उनके ज्येष्ठ पुत्र यशवेन्द्र सिंह उर्फ लालाजी ने मुखाग्नि दी।

By: Surendra

Published: 12 Jan 2021, 07:52 PM IST

सरपंच से सांसद का सफर करने वाले चले गए अनंत यात्रा पर
शिवचरणसिंह पंचतत्व में हुए विलीन
अंतिम यात्रा में शामिल हुए हजारों लोग
करौली। सरपंच से सांसद बनने तक का सफर तय करने वाले बुजुर्ग नेता शिवचरण सिंह इस दुनिया से अलविदा करके अनन्त यात्रा की ओर चले गए।
उनका सोमवार को निधन हुआ था और मंगलवार को दोपहर में पार्थिव देह पंच तत्व में विलीन हो गई। भद्रावती नदी के तट के समीप स्थित मोक्षधाम पर सभी धर्म-जाति के हजारों लोगों की मौजूदगी में उनके ज्येष्ठ पुत्र यशवेन्द्र सिंह उर्फ लालाजी ने मुखाग्नि दी।
इससे पहले मंगलवार को दोपहर में सर्किट हाउस के समीप उनके आवास से बैण्ड बाजे के साथ उनके पार्थिव शव का चकडोल निकाला गया। अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए गांवों से भी काफी लोग आए थे। उनके अंतिम दर्शन के लिए बाजार में तथा घरों की छत पर काफी संख्या में लोग जमा हुए। उन्होंने अपने नेता के पार्थिव शव पर पुष्प वर्षा करके अंतिम विदाई दी।
गौरतलब है कि 1962 से सक्रीय राजनीति में आए सिंह ने सरपंच से लेकर सांसद बनने तक का राजनीतिक सफर तय किया था। वे तीन बार विधायक और दो बार मंत्री भी रहे थे। पहली बार 67 में महवा से फिर 1977 में बयाना और 1985 के चुनाव में करौली से विधायक निर्वाचित हुए थे। वर्ष 92 में राज्यसभा सदस्य चुने गए थे। उन्होंने सरपंच पद से राजनीति की यात्रा शुरू की और 38 वर्ष तक राजनीति में बने रहे थे। दो दशक से वे राजनीति से सन्यास ले चुके थे। हालांकि राजनीतिक चर्चाओं और इससे सम्बन्धित खबरों में उनकी गहरी दिलचस्पी अंतिम दौर तक बनी रही थी।
उनके पास हर क्षेत्र की नॉलेज थी और वे हर विषय पर बोलने के लिए ही नहीं बल्कि तार्किक बहस करने को सदैव तत्पर रहते थे। विशेष तौर पर कृषि करना उनको पसंद था। वे खुद भी विधायक और सांसद रहते हुए कृषि कार्य करते रहते थे। करौली के आमजन से उनका गहरा मोलजोल था। वे सभी से आत्मीयता से संवाद किया करते थे।

Surendra Bureau Incharge
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