scriptWith strong intentions and bold steps, Manisha became best climber | मजबूत इरादों और साहसिक कदमों से मनीषा बन गई श्रेष्ठ पर्वतारोही | Patrika News

मजबूत इरादों और साहसिक कदमों से मनीषा बन गई श्रेष्ठ पर्वतारोही

युवा दिवस विशेष
मजबूत इरादों और साहसिक कदमों से मनीषा बन गई
श्रेष्ठ पर्वतारोही

13 हजार 123 फीट ऊंचाई पर चंद्रशिला की पर्वत चोटी पर फहरा चुकी है तिरंगा
एवरेस्ट पर पहुंचने का है लक्ष्य


करौली की बेटी मनीषा राजपूत देश की ऊंची पर्वत चोटियों पर कदम रखने के सहासिक कार्यों से युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है। बीते 3 वर्ष में देश के अनेक पर्वतों की चोटी पर तिरंगा फहरा कर करौली का नाम गर्व से ऊंचा किया है। 27 वर्षीया मनीषा देश की अंतरराष्ट्रीय साहसिक संस्था (इंटरनेशनल एडवेंचर फाउंडेशन) की सदस्य हंै।

करौली

Updated: January 12, 2022 12:08:47 pm

युवा दिवस विशेष
मजबूत इरादों और साहसिक कदमों से मनीषा बन गई
श्रेष्ठ पर्वतारोही

13 हजार 123 फीट ऊंचाई पर चंद्रशिला की पर्वत
चोटी पर फहरा चुकी है तिरंगा
एवरेस्ट पर पहुंचने का है लक्ष्य
मजबूत इरादों और साहसिक कदमों से मनीषा बन गई श्रेष्ठ पर्वतारोही
मजबूत इरादों और साहसिक कदमों से मनीषा बन गई श्रेष्ठ पर्वतारोही

करौली की बेटी मनीषा राजपूत देश की ऊंची पर्वत चोटियों पर कदम रखने के सहासिक कार्यों से युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है। उन्होंने बीते 3 वर्ष में देश के अनेक पर्वतों की चोटी पर तिरंगा फहरा कर करौली का नाम भी गर्व से ऊंचा किया है।
करौली में पली, पढ़ी-लिखी 27 वर्षीया मनीषा आज देश की अंतरराष्ट्रीय साहसिक संस्था (इंटरनेशनल एडवेंचर फाउंडेशन) की सदस्य हंै। शुरू में जो लोग मनीषा को साहसिक कामों की ओर बढऩे से रोकते-टोकते थे, वे आज उनकी साहसिक यात्राओं पर शाबासी देकर गर्व की
अनुभूति कर रहे हैं।
मनीषा ने अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और खुद के मनोबल से देश भर में पर्वतारोही के क्षेत्र में पहचान बनाई है। इस पहचान से उन्होंने ये साबित भी कर दिखाया कि महिलाएं किसी क्षेत्र में कमजोर नहीं है। वे युवा पीढ़ी को प्रेरणा का संदेश दे रही हैं कि कोई भी काम मुश्किल नहीं होता और मजबूत हौसलों से ऊंची उड़ान भरी जा सकती है।
करौली में नई सब्जी मण्डी के समीप विष्णु राजपूत की बेटी ने अभी हाल ही में नववर्ष के पहले दिन उत्तरकाशी के साक्री स्थित केदार कांठा ट्रैक पीक पर तिरंगा फहराया। इस चोटी की ऊंचाई 12 हजार 500 फीट से अधिक है और उस समय वहां का तापमान -5 डिग्री पर था। तीन दिन की उनकी इस साहसिक यात्रा में अंकित कुमार शर्मा, सुरजीत भी साथ रहे।
जोखिम भरा होता है सफर

इससे पहले बीते वर्ष मनीषा ने चंद्रशिला की पर्वत चोटी पर तिरंगा फहराकर गौरवांवित किया था। इस चोटी की 13 हजार 123 फीट ऊंचाई पर पहुंचने के मिशन में भी 3 दिन लग गए थे। दिन -रात बर्फीली पहाड़ी पर चढ़ते हुए मनीषा तनिक भी न घबराई। यहां पहुंचने से एक दिन पहले उनके दल ने 11 हजार 811 फीट ऊंचाई पर तुंगनाथ चोटी पर स्थित शिव मंदिर पर तिरंगा फहराया था। वह हरकीदून (उत्तराखंड) जैसे पर्वत सहित कई पर्वत की चोटियों पर विजय पताका लहरा चुकी है। मनीषा बताती है कि बर्फीले पहाड़ पर रात के अंधेरे और बर्फीली हवाओं के बीच चढऩा सहज नहीं होता। जरा सी चूक से जान जोखिम में होती है। मनीषा अपने मजबूत इरादों तथा लीडर अंकित कुमार की ओर से की गई हौसला अफजाई से वे अब तक के मिशनों में सफल रही हैं। मनीषा का सपना विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहुंचने का है।
ऐसे शुरू किया सफर

अभावों के बीच पली-बढ़ी मनीषा का शुरू से अलग पहचान बनाने के लिए कुछ अलग कर दिखाने का सपना था। करौली जैसी छोटी जगह और लोगों की सकीर्ण सोच के कारण वह स्कूल लाइफ में इस सपने को पूरा न कर सकी। मनीषा के अनुसार राजकीय महाविद्यालय में उसे प्रोफेसर प्रेमलता वाष्णेय के निर्देशन में स्काउट गतिविधि से जुडऩे का मौका मिला। उत्कृष्ट स्काउटिंग गतिविधि के लिए 22 फरवरी 2016 को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मान मिलने पर मनोबल बढ़ा।
मनीषा बताती है कि स्काउटिंग गतिविधि के आधार से उसे सिविल डिफेंस की सदस्य बनने का भी मौका मिल गया। करौली कॉलेज से वर्ष 2018 में एमए करने के बाद उसने एडवेंचर का फॉर्म भरा। शुरू में लीडर शिप कोर्स के लिए मुश्किल महसूस हुई। लेकिन फिर उसमें रुचि बढ़ती गई। खुद को अहसास हुआ कि मैं कुछ अलग हटकर कर सकती हूं। आज सामान्य ज्ञान की पुस्तकों में उसके नाम से सवाल-जवाब प्रकाशित होने पर वह बेहद गौरव महसूस कर रही।
मनीषा कहती हैं कि साहसिक गतिविधियों के रास्ते में हर तरफ से अनेक मुश्किलें आई लेकिन कभी हार नहीं मानी। पापा ने सदैव प्रोत्साहित किया। मनीषा के पापा जययपुर में निजी कम्पनी में सुरक्षाकर्मी की सर्विस करते हैं।

युवाओं को संदेश

मनीषा कहती हैं कि आजकल युवा नशे की ओर आकृर्षित होकर अपना और परिवार का जीवन खराब कर रहे हैं। ऐसे युवाओं से अपील है कि वे नशे की लत को छोड़कर अपने जीवन में अलग पहचान बनाने को कुछ अलग हटकर सकारात्मक करें। ताकि अपने माता पिता और इलाके का नाम रोशन कर सकें।

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