पांच साल में ऐसे किए काम कि ग्रामीण अड़े तबादला निरस्त कराने पर

पांच साल में ऐसे किए काम कि ग्रामीण अड़े तबादला निरस्त कराने पर निजी स्कूलों की तरह आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया सरकारी स्कूल पहले ग्रामीणों के हटाए अतिक्रमण फिर उनसे ही चंदा लेकर बदली स्कूल की सूरत, करौली जिले के सपोटरा क्षेत्र के कांचरौदा गांव के ग्रामीणों को उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य हंसराज मीणा की कार्यशैली ऐसी रास आई है कि वो हंसराज का स्थानान्तरण होने पर आंदोलन को उतारू हो गए हैं। खास बात यह है कि हंसराज उस इलाके के ही निवासी है और वहां जाने से उनको दिक्कत भी नहीं है।

By: Surendra

Published: 06 Jan 2021, 09:03 PM IST

Karauli, Karauli, Rajasthan, India

कांचरौदा के प्रधानाचार्य का मामला

पांच साल में ऐसे किए काम कि ग्रामीण अड़े तबादला निरस्त कराने पर
निजी स्कूलों की तरह आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया सरकारी स्कूल
पहले ग्रामीणों के हटाए अतिक्रमण फिर उनसे ही चंदा लेकर बदली स्कूल की सूरत,
करौली जिले के सपोटरा क्षेत्र के सपोटरा क्षेत्र के कांचरौदा गांव के ग्रामीणों को उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य हंसराज मीणा की कार्यशैली ऐसी रास आई है कि वो हंसराज का स्थानान्तरण होने पर आंदोलन को उतारू हो ग ए हैं।नाराज ग्रामीणों ने बुधवार को सुबह विद्यालय के गेट पर ताला लगा दिया और रिलीव होने को पहुंचे प्रधानाचार्य को बैरंग लौटने को मजबूर किया। प्रधानाचार्य हंसराज का स्थानान्तरण नादौती के कुंजैला गांव के स्कूल में हुआ है। खास बात यह है कि हंसराज उस इलाके के ही निवासी है और वहां जाने से उनको दिक्कत भी नहीं है। लेकिन ग्रामीण बीते पांच वर्ष में उनके कामकाज और कार्यशैली से इतने प्रभावित हैं कि वे उनको गांव से नहीं जाने देना चाहते। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे प्रधानाचार्य का तबादला निरस्त नहीं होने तक स्कूल गेट का ताला नहीं खोलेंगे और जरूरत पड़ी तो धरना भी शुरू कर देंगे। प्रदर्शन करने वालों में भरत लाल पटेल रामफूल पटेल, घमंडी पटेल, सुमेर सिंह, राजू लाल, किशन, कैलाश मीणा, बंदना, कौशल्या, सावित्री, रुमाली आदि ग्रामीण शामिल थे। स्थानान्तरण को निरस्त कराने की मांग को लेकर काफी ग्रामीण करौली पहुंचे और क्षेत्रीय विधायक, शिक्षा अधिकारियों को ज्ञापन सौंप प्रधानाचार्य को यथावत रखने की मांग की है।

जहां थे कचरे के ढेर, अब महक रही बगिया

असल में इलाके के ग्रामीण प्रधानाचार्य हंसराज मीणा द्वारा बीते पांच वर्ष में स्कूल में कराए कार्यो और उनकी कार्यशैली से प्रभावित है। इसका कारण है कि हंसराज ने पांच वर्ष में स्कूल की सूरत बदल कर रख दी। गांव का सरकारी स्कूल अब किसी शहर के निजी स्कूल जैसा बना है।
ग्रामीण बताते हैं कि जब हंसराज ने चार्ज संभाला था तब स्कूल परिसर में घूरे (कचरे) के ढेर लगे थे। प्रभावशाली लोगों ने अतिक्रमण कर रखे थे। हंसराज मीणा ने गांव के पंच-पटेलों का सहयोग लेकर अतिक्रमियों से समझाइश की और अतिक्रमण हटवाए। फिर ग्रामीणों के आर्थिक सहयोग से स्कूल परिसर की चारदीवारी बनवाई। कक्षा-कक्षों सहित पूरे परिसर में साफ सफाई और रंग-रोगन कराकर स्कूल को चमका दिया। इतना ही नहीं सभी कक्षाओं में फर्नीचर लगा हुआ है। बिजली की नई फिङ्क्षटग के साथ बिजली चली जाने पर इंवर्टर लगा है। फर्नीचर सहित शानदार कम्प्यूटर लैब है। बच्चों को स्वच्छ पानी के लिए आरओ संयत्र, शीतल जल के लिए वाटर कूलर भी लगा है। और तो और प्रत्येक कक्षा में सीसीटीवी कैमरे लगाए हुए हैं जिनसे सारी गतिविधि पर संस्था प्रधान नजर रख सकते हैं। जब निरीक्षण के लिए प्रशासनिक अधिकारी यहां पहुंचते हैं तो स्कूल की इस तरह की स्थिति को देख चकित रह जाते हैं। स्कूल के जिस मैदान में कचरे के ढेर रहते थे, वहां सुव्यवस्थित गार्डन विकसित हो गया है। गांव के स्कूल की दशा सुधारने में ग्रामीणों ने चंदा एकत्र करके सहयोग किया तो कुछ राशि विभागीय स्तर पर संस्था प्रधान ने जुटाई।

विकास में आ रही बाधा को किया दूर
स्कूल के विकास में सबसे बड़ी बाधा यह आ रही थी कि स्कूल रियासतकाल के भवन में संचालित हो रहा था। स्कूल के नाम भूमि-भवन नहीं होने से विकास कार्यो में अड़चन पैदा हो रही थी। संस्था प्रधान ने जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों की मदद लेकर भवन-भूमि को स्कूल के नाम करवा दिया। खुद प्रधानाचार्य हंसराज बताते हैं कि विभिन्न विकास कार्यो पर लगभग 40 लाख रुपए पांच साल में खर्च हुए हैं। हंसराज कहते हैं कि ग्रामीणों ने हर काम में उनको मदद की। वे तो केवल माध्यम रहे। उन्होंने ही अपने अतिक्रमण हटाए और फिर विकास के लिए भी राशि प्रदान की।

सुधरा शैक्षणिक स्तर
ऐसा नहीं है कि केवल स्कूल की ही सूरत हंसराज मीणा ने सुधारी हो। उन्होंने स्कूल में शैक्षणिक व्यवस्था में भी काफी बदलाव किया। इसका नतीजा यह रहा है कि पिछले पांच वर्ष से स्कूल की 10वीं तथा 12वीं कक्षाओं का बोर्ड परिणाम 90 से 100 प्रतिशत रहा है। स्कूल की दशा सुधरने और शैक्षणिक माहौल बेहतर बनने के कारण बीते पांच साल में विद्यालय की छात्र संख्या 180 से बढ़कर 460 हो चुकी है।
जाने को तैयार हूं
मुझे पता नहीं कैसे तबादला हुआ। जहां भी सरकार भेजेगी, निष्ठा से नौकरी करने को तैयार हूं। कूंजैला भी मेरे लिए कोई दिक्कत नहीं।
हंसराज मीणा, प्रधानाचार्य, उच्च माध्यमिक

उच्च स्तर बता दी स्थिति
प्रधानाचार्य ने स्वेच्छा से स्थानान्तरण करवाया है। ग्रामीण स्थानान्तरण निरस्त करवाना चाहते है। उनकी भावनाओं से उच्च स्तर पर अवगत कराया जाएगा।
गणपत लाल मीना, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, करौली

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