पेट्रोलियम पदार्थों पर केन्द्र सरकार राहत देने पर विचार कर रही-मनोहर लाल

पेट्रोलियम पदार्थों पर केन्द्र सरकार राहत देने पर विचार कर रही-मनोहर लाल

Prateek Saini | Publish: Sep, 11 2018 02:42:32 PM (IST) Haryana, India

विधानसभा के मानसून सत्र की दूसरी बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें विश्व बाजार से तय होती है लेकिन फिर भी केन्द्र सरकार राहत देने पर विचार कर रही है...

(चंडीगढ): हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को विपक्ष के भारत बन्द पर कहा कि विपक्ष की ओर से महंगाई को मुद्या बनाकर बंद आहूत किया गया लेकिन पेट्रोलियम पदार्थों को छोडकर देश में मंहगाई पिछली सरकार के समय से कम है। पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई पर भी केन्द्र सरकार कुछ राहत देने पर विचार कर रही है।

 

विधानसभा के मानसून सत्र की दूसरी बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें विश्व बाजार से तय होती है लेकिन फिर भी केन्द्र सरकार राहत देने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में अन्य वस्तुएं के दाम पिछली सरकाी के समय से कम है। इस बात का आकलन इस आधार पर भी किया जा सकता है कि कर्मचारियों का महंगाई भत्ता पहले से कम बढा है।

 

सदन में विपक्ष की भूमिका पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्या नहीं है। जब मुद्या नहीं होता तो विपक्ष आधा डालना शुरू कर देता है। ऐसी परम्परा ही बना ली गई है। उन्होंने कहा कि एसवाईएल कैनाल निर्माण का कोई मुद्या नहीं रहा है। सुप्रीम कोर्ट के कैनाल निर्माण का आदेश देने के बाद इस पर अमल के लिए अर्जी दायर की गई है। अब इसके लिए लडना है तो विपक्ष आए और मिलकर लडा जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य कर्मचारियों के लिए पिछले चार साल में जितना किया गया है उतना पिछली सरकार ने दस साल में नहीं किया। राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के लाभ जल्दी दिए गए है। पिछली सरकारें इनमें देरी करती थी। अब सिर्फ आवास भत्ते पर फैसला बाकी है। उनकी सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद किसी कर्मचारी को नौकरी से हटाया नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले से नियमित कर्मचारी का दर्जा गंवाने वाले कर्मचारियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने का फैसला किया गया है। सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिली तो सरकार विधेयक लायेगी।


रोडवेज कर्मचारी हडताल पर सख्ती को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि रोडवेज कर्मचारी यूनियन हाईकोर्ट में हलफनामा दे चुकी थीं कि वे प्रति किलोमीटर दर से निजी बस किराए पर लेने का विरोध नहीं करेंगी लेकिन फिर भी विरोध किया तो कुछ सख्ती की गई है।

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