हरियाणा में एंटी-इन्कमबेंसी सरकार नहीं विपक्ष के खिलाफ-सीएम

सीएम बोले कि कुलदीप बिश्नोई के भाजपा में शामिल होने की नहीं संभावना...

 

By: Prateek

Published: 10 Apr 2019, 07:14 PM IST

(चंडीगढ़,करनाल): हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दावा किया है कि राजनीतिक परिवेश में आमतौर पर यह कहा जाता है कि एंटी-इन्कमबेंसी सत्तारूढ़ सरकार के विरूद्ध होती है लेकिन हरियाणा पहला ऐसा राज्य है जहां एंटी-इन्कमबेंसी सरकार के नहीं बल्कि विपक्ष के विरूद्ध है। इसका खामियाजा विपक्ष को भुगतना पड़ेगा।


मुख्यमंत्री ने लोकसभा की सभी दस सीटें और विधानसभा की सत्तर सीटों पर चुनाव जीतने का दावा करते हुए कहा कि सरकार को लेकर प्रो-इन्कमबेंसी है और विपक्षी दलों के खिलाफ एंटी-इन्कमबेंसी देखने को मिल रही है। विपक्षी दलों के खिलाफ यह नाराजगी इसीलिए है क्योंकि इन लोगों ने सत्ता में रहते हुए लोगों के साथ भेदभाव किया।


इनेलो द्वारा लगातार की गई गठबंधन की कोशिशों पर सीएम ने कहा, हां यह बात सही है कि इनेलो के नेताओं ने अलग-अलग माध्यमों से गठबंधन की कोशिश की थी। भाजपा को किसी के साथ गठबंधन की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह लोग सत्ता के चस्के लिए गठबंधन करते हैं। यह बात भी सही है कि सत्ता का चस्का हर किसी को होता है। हमें भी है, लेकिन हम लोगों की सेवा की भावना के लिए काम करते हैं।


आदमपुर से कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई के भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं को खारिज करते हुए सीएम ने कहा, इस तरह की चर्चा सुनने में तो आई हैं, लेकिन मेरे साथ किसी तरह की बातचीत नहीं हुई। मुझे नहीं लगता कुलदीप की हमें जरूरत है। कुलदीप पर कटाक्ष करते हुए कहा, कुलदीप तो अपना दम छोड़ चुका है।


हिसार और रोहतक लोस से उम्मीदवारों की घोषणा में हो रही देरी पर सीएम ने कहा, दोनों ही जगहों पर टिकट मांगने वालों की संख्या काफी अधिक है। प्रदेश इकाई द्वारा पार्टी हाईकमान को तमाम समीकरणों के बारे में अवगत करवाया जा चुका है। अब पार्टी नेतृत्व को फैसला करना है कि इन दोनों जगहों पर किसे चुनाव लड़वाया जाए।


सीएम ने कहा, 2014 में भाजपा 8 सीटों पर लड़ी थी और इनमें से रोहतक को छोडक़र सात पर जीत हासिल की थी। हिसार और सिरसा उस समय सहयोगी रहे कुलदीप बिश्नोई को दी गई थी। रोहतक में दीपेंद्र के मजबूत होने के सवाल पर सीएम ने कहा, 2014 में हालात अलग थे। उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे, इसलिए दीपेंद्र को फायदा मिला। आज रोहतक में हमारे पास चार विधायक, निकायों और पंचायतों में प्रतिनिधि हैं। हालात पूरी तरह से बदले हुए हैं।

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