HARYANA को रास नहीं आई गठबंधन की राजनीति

HARYANA POLITICS: हरियाणा में चुनावी ( Election ) आहट के साथ ही राजनीतिक विश्वसनीयता गंवा चुकी बसपा ने फिर से जननायक जनता पार्टी से गठबंधन कर नए समीकरण बनाएं हैं।

By: Devkumar Singodiya

Published: 12 Aug 2019, 05:59 PM IST

(संजीव शर्मा. चंड़ीगढ़) हरियाणा में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही गठबंधन की राजनीति का दौर फिर से शुरू हो गया है। हरियाणा में राजनीतिक विश्वसनीयता गंवा चुकी बहुजन समाज पार्टी ( BSP ) ने एक बार फिर से जननायक जनता पार्टी ( JJP ) के साथ गठबंधन कर नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। हरियाणा की राजनीति में विरोधियों के साथ गठबंधन कर सत्ता की सीढ़ी चढने की परंपरा राज्य बनने के साथ ही शुरू हो गई थी।


राजनीतिक रूप से आपात स्थिति में देवीलाल ( Devi Lal ) , बंसीलाल ( Bansi Lal ) और भजनलाल ( Bhajan Lal ) सरीखे नेताओं ने गठबंधन से गुरेज नहीं किया, लेकिन गठबंधन की सरकारों ( Government ) ने कभी अपना शासन काल पूरा नहीं किया। प्रदेश में अब तक हुए राजनीतिक दलों के गठबंधनों के टूटने का मुख्य कारण इनका नेतृत्व करने वाले नेताओं की निजी महत्वाकांक्षाएं हैं। हरियाणा में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति हमेशा मौकाप्रस्त राजनीतिक दल की रही है।

...जब भजनलाल ने गिराई थी देवीलाल की सरकार


हरियाणा गठन के एक साल बाद राव बीरेंद्र सिंह ( Virender Singh ) ने 1967 में हरियाणा विशाल पार्टी का गठन कर सत्ता हासिल की। कुछ समय बाद उनके दो विधायकों गया राम और हीरानंद आर्य ने मोर्चा खोल दिया। सबसे पहले वर्ष 1977 में देवीलाल के नेतृत्व में महागठबंधन बना। इस गठबंधन ने सत्ता भी हासिल कर ली। कुछ समय बाद भजनलाल ने विधायकों ( MLA ) को साथ लिया और देवीलाल की सरकार गिरा दी। वर्ष 1980 में भजनलाल कांग्रेस ( Congress ) में शामिल हुए और सरकार बना ली।

 

भाजपा के कारण गिरी थी चौटाला ( Choutala ) व बंसीलाल की सरकार


भारतीय जनता पार्टी ( BJP ) ने वर्ष 1987 में देवीलाल के साथ गठबंधन कर सरकार बनाई। इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम मेें ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री ( Chief Minister ) बन गए। बीजेपी ने गठबंधन तोड़ लिया और सरकार अल्पमत में चली गई। 1996 में बंसीलाल ने कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा विकास पार्टी बनाई और बीजेपी से गठबंधन कर सत्ता में आ गए। वर्ष 1999 में बीजेपी ने समर्थन वापस लिया तो बंसीलाल की सरकार चली गई। इस बीच कुछ समय के लिए इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ( INLD ) और बीजेपी का गठबंधन हुआ तो चौटाला भी सत्ता की सीढ़ी चढ़ गए। हालांकि यह गठबंधन भी लंबा नहीं चला और इनेलो सरकार अल्पमत में आ गई तथा उसने केंद्र में बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया। इस बीच हुए लोकसभा ( Lok Sabha ) चुनाव के दौरान इनेलो ने बीएसपी से गठबंधन किया, लेकिन यह गठबंधन भी लंबा नहीं चला।

 

मतभेद की भेंट चढ़े भाजपा-इनेलो व भाजपा हजकां गठबंधन


हरियाणा में गठबंधन की राजनीति कुछ समय के लिए शांत रही, लेकिन 2008 में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी और इनेलो ने गठबंधन तो किया, लेकिन यह भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। 2009 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान हरियाणा जनहित कांग्रेस और बीजेपी का गठबंधन हुआ, लेकिन वैचारिक मतभेद पैदा हो गए। 2014 में हुए चुनाव के दौरान भी हरियाणा जनहित कांग्रेस और बीएसपी के बीच गठबंधन हुआ। यह गठबंधन भी लंबा नहीं चला।

 

बसपा का दो साल में तीसरा गठबंधन


बसपा ने वर्ष 2018 में इनेलो से गठबंधन किया। जींद में हुए उपचुनाव के बाद यह गठबंधन टूट गया और बसपा ने राजकुमार सैनी ( Raj Kumar Saini ) के नेतृत्व वाली लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी से गठबंधन कर लिया। सैनी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लडऩे वाली बसपा का यहां भी मोहभंग हो गया और बसपा ने लोसुपा से गठबंधन तोड़ लिया। लोकसभा चुनाव के दौरान जननायक जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी ( AAP ) के बीच भी गठबंधन हुआ, लेकिन यह गठबंधन भी चुनाव के साथ ही खत्म हो गया। अब बसपा ने विधानसभा ( Assembly ) के मद्देनजर जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया है।

 

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