यहां गुरूजनों को पड़ जाते पियक्कड़ों के मुंह सूंघने, ऐसा तुगलकी फरमान जारी हुआ था

(Haryana News ) सरकार और अफसरों की निगाहों में गुरुजनों की कितनी (Works of teachers ) कद्र है इसका पता तो उनकी पशु गणना, पल्स पोलिया, मतदाता सूची जैसे कार्यों में लगने वाली ड्यूटियों से पता चलता है। शिक्षा बेशक चौपट हो जाए, पर इन सब कामों से संतोष नहीं होता। नई ड्यूटी लगाई पियक्कड़ों की (Teachr's duty for drinkers ) पहचान करने की। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग शुरु हुई तो शिक्षा विभाग ने यह आदेश वापस ले लिया।

By: Yogendra Yogi

Updated: 02 Sep 2020, 12:11 AM IST

करनाल(हरियाणा): (Haryana News ) सरकार और अफसरों की निगाहों में गुरुजनों की कितनी (Works of teachers ) कद्र है इसका पता तो उनकी पशु गणना, पल्स पोलिया, मतदाता सूची जैसे कार्यों में लगने वाली ड्यूटियों से पता चलता है। शिक्षा बेशक चौपट हो जाए, पर इन सब कामों से संतोष नहीं होता। अफसर ठहरे सरकार के आंख-कान-नाक, सो एक कदम और आगे निकल गए।

अजीबो-गरीब ड्यूटी

शिक्षकों की इतनी तरह की ड्यूटियों से भी जब संतोष नहीं हुआ तो एक नई तरह की अजीबो-गरीब ड्यूटी लगा दी। यह ड्यूटी लगाई पियक्कड़ों की (Teachr's duty for drinkers ) पहचान करने की। अर्थात गुरुजन पियक्कड़ों (After trol circular take back ) की ठिकानों की जासूसी करेंँ उनके तौर-तरीकों की पहचान करेंं इत्यादि। यह तुगलकी फरमान जारी हुआ करनाल के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से।

फरमान के बाद पैर पीछे खींचे
अफसरों ने यह बेतुका आदेश जारी तो कर दिया पर हर तरफ से उनकी हाय-हाय होने लगी तो घबरा कर अपने कदम पीछे खींच लिए। सोशल मीडिया पर विभाग खूब खिंचाई हुई। शिक्षकों को लेकर पर भी चुटकियां ली गई। इस फजीहत में फंसे अफसरों ने आदेश निरस्त करने का आदेश जारी करके मुसीबत से पीछा छुड़ाया।

डीईओ कार्यालय का फरमान
गौरतलब है कि नशा मुक्त भारत अभियान के तहत देश के 272 जिलों व हरियाणा के 10 जिलों को चुना गया है। जिसमें करनाल भी शामिल है। 31 मार्च तक जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए अभियान चलेगा। इस अभियान को लेकर शिक्षा विभाग के अफसर जरा ज्यादा ही जोश में आ गए। यह सोच कर कि शिक्षकों को अभी घर पर बैठे-ठाले वेतन मिल रहा है तो क्यों नहीं नशेडिय़ों-पियक्कड़ों की पहचान करने के काम में इनको लगा दिया जाए। जिले को नशा मुक्त बनाने के लिए कमेटी की ओर से डीसी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इस बैठक के बाद नशा करने या शराब पीने वाले विद्यार्थियों व स्टाफ की पहचान करने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय से सभी बीईओ को पत्र जारी कर आदेश दिए गए।

40 पियक्कड़ों का मांगा ब्यौरा
इसमें कहा गया कि वे प्रिंसिपल व मुख्य अध्यापकों की मदद से ऐसे लोगों की पहचान करेंगे। जिनका नाम, पिता का नाम, उम्र, रोजगार व मोबाइल नंबर सहित पूरा विवरण जुटाएंगे। जिले में छह बीईओ हैं, प्रत्येक को सप्ताह में 40 लाल परी के दीवानों का डाटा देना होगा। इस पत्र की सोशल मीडिया पर भी खूब आलोचना हुई, क्योंकि कई स्कूलों में महिला हेड टीचर और प्रिंसिपल भी कार्यरत हैं।

ट्रोल होने पर आदेश वापस
जिला शिक्षा अधिकारी रविंद्र चौधरी कुछ दिनों से अवकाश पर थे, उनके अवकाश के दौरान पीछे से डीईओ कार्यालय के एक अधीक्षक द्वारा आदेश जारी किए गए थे। जब बात फैल गई और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग शुरु हुई तो शिक्षा विभाग ने यह आदेश वापस ले लिया।

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