कोरोना संक्रमण के मामले अचानक बढ़ने से हुड्डा चिंतित

लॉक डाऊन में ढील के फैसले से घबराए अपने मंत्री विज की चिंताओं पर गौर करें मुख्यमंत्री
धान की खेती से जुड़े सरकार के फैसले पर जताई आपत्ति

By: Chandra Prakash sain

Updated: 04 May 2020, 07:57 PM IST

चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कोरोना संक्रमण के मामलों में अचानक आए उछाल पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण अब तक कंट्रोल में नज़र आ रहा था लेकिन, रविवार को एक ही दिन में 50 से ज़्यादा केस सामने आना सामान्य नहीं कहा जा सकता है। सरकार को विस्तृत जानकारी जुटानी चाहिए कि अचानक एक ही दिन में इतने ज्यादा मामले कैसे बढ़े, आख़िर कहां चूक हुई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री को ताजा हालात की समीक्षा करने के बाद ही ढील देने बारे फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन में ढील को लेकर खुद प्रदेश के गृह और स्वास्थ्य मंत्री डरे हुए हैं। मुख्यमंत्री को गृह मंत्री व स्वास्थ्य मंत्री की चिंताओं और जमीनी परिस्थितियों पर गौर करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में फिलहाल कोरोना का खतरा न ख़त्म हुआ है और न ही कम हुआ है। इसलिए सरकार को ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग और जागरुकता फैलाने पर जोर देना चाहिए। टेस्टिंग के साथ सरकार सुनिश्चित करे कि हर स्वास्थ्य कर्मी और कोरोना योद्धा के पास बचाव सामग्री, पीपीई किट आदि मौजूद हो क्योंकि, कुछ ज़िलों में कोरोना पॉजिटिव केसों में स्वास्थ्य कर्मी भी हैं, जो संक्रमित जगहों पर काम करने की वजह से बीमार हुए हैं। हुड्डा ने आम जनता से भी पहले से ज्यादा एहतियात बरतने तथा सोशल डिस्टेंसिंग के साथ सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की।


धान की खेती से जुड़े मुद्दे पर खींचा सरकार का ध्यान
हुड्डा ने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार का ध्यान खींचते हुए कहा कि सात जिलों में पंचायती जमीन को पट्टे पर लेने वाले किसानों के लिए जो आदेश जारी किया है, वह आपत्तिजनक है। इसकी सीधी मार गरीब और छोटे किसान पर पड़ेगी। उन्होंने कहा कि बुआई से ऐन पहले किसान को धान बोने से रोकना कतई गलत है।
उन्होंने कहा कि सरकार को अगर गिरते भूजल स्तर की चिंता है तो उसे कांग्रेस सरकार के वक्त शुरू की गई दादूपूर नलवी नहर परियोजना को बंद नहीं करना चाहिए। इस कठिन दौर में भूजल स्तर की चिंता के नाम पर किसान को चोट सही नहीं है। किसानों को धान के विकल्पों पर विचार करने के लिए समय देना चाहिए।

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