Mid-day meal: स्कूलों में भी हावी हुआ जातिवाद, एक समुदाय के बर्तन साफ करती रसोइया, विशेष समुदाय के बच्चे खुद धोते हैं बर्तन

-दूसरे समुदाय के बच्चों को बर्तन स्वयं साफ करने होते हैं।
-प्रधानाध्यापक ने कहा- इसका समाधान गांव वाले ही कर सकते हैं।
-बीएसए ने कहा- सभी बच्चे बराबर हैं, खुद जांच कर कार्रवाई करूंगी।

कासगंज। यहां शिक्षा के मंदिर में ऐसा मामला सामने आया है जो अचरज में डालने वाला है। स्कूल में बच्चों को भी जातिवाद का पाठ पढ़ाया जा रहा है। उनके साथ भेदभाव करके अहसास कराया जा रहा है कि वे कि वे ऊंची जाति के हैं या नीची जाति के।

ये है मामला
मामला कासगंज जिले के सोरों विकास खंड क्षेत्र के प्राथमिक मल्हार नगर के विद्यालय में देखने को मिला। विद्यालय में दो समुदायों के बच्चे पढ़ते हैं। बर्तन धोने का काम रसोइया का है। लेकिन रसोइया एक समुदाय के बच्चों के बर्तन तो धोती है, जबकि दूसरे समुदाय के बच्चे अपने-अपने बर्तनों को खुद जाकर सरकारी हैंडपंप पर साफ करते हैं।

प्रधानाध्यापक ने क्या कहा
विद्यालय में बच्चों के बर्तन साफ करने की तस्वीर कैमरे में कैद हो जाने के बाद विद्यालय प्रधानाध्यापक (Head master) नीरज चेतन ने कहा- हमारे विद्यालय में दो प्रजाति के बच्चे है। चार रसोइया हैं। लेकिन रसोईया एक विशेष समुदाय के बच्चों के बर्तन साफ करने से इनकार करती है। रसोइया कहती है कि हमारे पैसे बढ़ाएं। इसका समाधान रसोइया और गांव वाले ही कर सकते हैं।

जांच करेंगी बीएसए
जब इस मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी अधिकारी ((Basic Siksha Adhikari) अंजलि अग्रवाल से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि बच्चे, बच्चे ही होते हैं। सभी जाति और समुदाय के बच्चे बराबर होते हैं। अगर ऐसा हुआ तो में स्वयं जाकर जांच पड़ताल कर वैधानिक कार्रवाई करूंगी।

 

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suchita mishra
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