यूपी के इस जिले में ‘छोटी माता’ का प्रकोप, घर-घर में बिछी चारपाई, स्वास्थ्य विभाग बेखबर, देखें वीडियो

यूपी के इस जिले में ‘छोटी माता’ का प्रकोप, घर-घर में बिछी चारपाई, स्वास्थ्य विभाग बेखबर, देखें वीडियो

Amit Sharma | Publish: Jun, 07 2019 01:26:43 PM (IST) | Updated: Jun, 07 2019 01:29:07 PM (IST) Kasganj, Kasganj, Uttar Pradesh, India

बच्चे, बूढे, युवक, युवतियां बुखार से तप रहे हैं। पूरे शरीर पर दाने हैं। इस रोग ने लोगों को हिला कर रख दिया है।

कासगंज। उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले एक गांव में छोटी माता (चिकन पॉक्स) का भयावह रूप सामने आया है। हाल यह है कि न केवल बच्चे बल्कि बूढ़े भी चारपाई पर बीमार पड़े हैं। छोटी माता का प्रकोप बच्चों पर भारी पड़ रहा है। बच्चे, बूढे, युवक, युवतियां बुखार से तप रहे हैं। पूरे शरीर पर दाने हैं। इस रोग ने लोगों को हिला कर रख दिया है। संक्रामक होने के कारण रोग एक से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है। कमाल की बात ये है कि स्वास्थ्य विभाग इस बात से बेखबर है।

सोरों विकास खंड के गांव पंचलाना का हाल
कासगंज जिले के सोरों विकास खंड के अंतर्गत पंचलाना गांव के बच्चे, बूढे, युवक, युवितयों पर चेचक का रोग मुसीबत बनकर टूट रहा है। गांव का हर घर चपेट में है। इसका असर असर बच्चों पर अधिक है। हालात नाजुक है। गांव के हर घर में चारपाई बिछी हुई है। दर्जन भर लोग गंभीर रूप से बीमार हैं। इस भयावह रोग से बचने के लिए लोगों ने गांव में तत्काल स्वास्थ्य टीम भेजने की मांग की है। ग्रामीण संजय ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग आकर इलाज करे अन्यथा मौतें हो सकती हैं।

प्रभारी सीएमओ ने क्या कहा
इस मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी की अनुपस्थिति में कार्यभार संभाल रहे डॉ. सीपी सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जल्द गांव में शिविर लगाकर परीक्षण कराया जायेगा।

छोटी माता के लक्षण
छोटी माता या चिकनपॉक्स होने का सबसे प्रमुख लक्षण है होता है शरीर में पानी युक्त लाल दानों का उभरना। इस बीमारी के दौरान पूरे शरीर पर दाग-धब्बे हो जाते हैं। तेज बुखार रहता है। सिरदर्द होता है। सूखी खांसी आती है। इसका असर दिमाग और लिवर तक हो जाता है। लिवर कमजोर होने पर अन्य बीमारियां चपेट में ले लेती हैं।

क्या करें
चिकनपॉक्स संक्रामक रोग है। हवा और खांसी के माध्यम से एक से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। बच्चे खासतौर पर प्रभावित होते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि प्रभावित व्यक्ति के आसपास खूब सफाई रखें। घर से बाहर न जाने दें। रोगी को मास्क पहनाकर रखें ताकि श्वांस और खांसी से दूसरे व्यक्ति तक रोग न पहुंचे। नीम के पानी से स्नाने कराने से रोगी को फायदा होता है।

क्या खाएं
छोटी माता रोग से प्रभावित मरीजों को भोजन में पानीयुक्त पदार्थ देने चाहिए। जैसे तरबूज, नाशपाती, फलों का ताजा रस। शीतल जल और दही लेने से भी आराम मिलता है। कहा जाता है कि शुरू के तीन दिन दही और चावल खिलाना चाहिए।

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