111 मिडिल स्कूल शिक्षक विहीन, 15 हजार छात्रों की पढ़ाई भगवान भरोसे

तीन महीने पहले शिक्षकों के ट्रांसफर के बाद चरमराई शिक्षण व्यवस्था.

जिलेभर में 528 मिडिल स्कूल में पढ़ाई करते हैं 75 हजार 353 छात्र

कटनी. जिले में 111 मिडिल स्कूलों का संचालन बिना शिक्षक के हो रहा है। यहां शिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था अतिथियों के भरोसे है। पालकों का कहना है कि अतिथि शिक्षकों को पहले से पता होता है कि उनकी सेवाएं कुछ समय के लिए है, इसलिए वे बच्चों की पढ़ाई पर नियमित शिक्षकों के बराबर ध्यान नहीं देते। इसका सीधा नुकसान बच्चों को हो रहा है।

बेहतर पढ़ाई नहीं होने से छात्रों का भविष्य दाव पर है। इधर शिक्षण व्यवस्था समय रहते बेहतर बनाने को लेकर भी जिम्मेंदार बेपरवाह हैं। स्कूलों मेें शिक्षकों की कमीं आलम तीन माह से है। तीन माह पहले राज्य सरकार ने शिक्षकों के मन मुताबिक ट्रांसफर किया। इसका असर यह हुआ कि जिले के ज्यादातर शिक्षक अपने जिलों में चले गए, दूसरी ओर यहां आने वाले शिक्षकों की संख्या कम रही।
जिलेभर में 528 मिडिल स्कूल में 75 हजार 353 छात्र पढ़ाई करते हैं। इसमें से 111 मिडिल स्कूल कुल संख्या का लगभग 21 प्रतिशत है। इस अनुपात में छात्र संख्या 75 हजार 353 का 21 प्रतिशत यानी लगभग 15 हजार 834 छात्रों की पढ़ाई पर नियमित शिक्षक नहीं होने का असर पड़ रहा है। जिले में 1324 प्राइमरी स्कूल, 92 हाईस्कूल और 84 हायर सेकेंडरी स्कूल हैं।
कक्षावार छात्रों की संख्या पर नजर डालें तो कक्षा एक में 16500, दो में 20718, तीन में 23581, चार में 23501, पांचवीं में 23821, छठवीं में 24591, सातवीं में 24892, आठवीं में 25870, नवमीं में 28818, दसवीं 18017, ग्यारहवीं में 9166 और बारहवीं में 11 हजार 544 छात्र अध्ययनरत हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी बीबी दुबे का कहना है कि 111 मिडिल स्कूल जो बिना शिक्षक के हैं, यहां अतिथि शिक्षक और प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों से स्कूल संचालित करवाई जा रही है। नई भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ होने वाली है। इसके बाद शिक्षकों की कमीं पूरी होगी।

ऐसे समझेें ट्रांसफर का गणित
- 7 सौ शिक्षक जो जिले के अलग-अलग स्कूलों में पदस्थ थे, ट्रांसफर के बाद जिले के अंदर ही अपने मनपसंद के स्कूलों मेंं चले गए।
- 5 सौ शिक्षक ऐसे रहे जो जिले से बाहर अपने जिलों में चले गए। इसका सीध असर यहां कुल शिक्षकों की संख्या पर पड़ा।
- 2 सौ शिक्षक ही ट्रांसफर के बाद अन्य जिलों से कटनी आए। ऐसे में जाने और आने वाले शिक्षकों का अंतर 3 सौ रहा।
- स्कूलों में शिक्षकों की कमीं के बाद भी कई शिक्षक स्कूल के बजाए डीइओ व अन्य कार्यालय मेंं प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे।
- मिडिल स्कूलों में शिक्षकों की कमीं के बाद अकादमिक व्यवस्था प्राइमरी के नियमित शिक्षकों के भरोसे चल रहा।
- ज्यादातर मिडिल स्कूलों में कक्षा छठवीं से आठवीं के बच्चों की पढ़ाई तय समय में नहीं होने से कोर्स पिछड़ रहा।

raghavendra chaturvedi
और पढ़े

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned