35 बालकों ने धारण किया जनेऊ, लिया ये संकल्प

  35 बालकों ने धारण किया जनेऊ, लिया ये संकल्प
35 Brahmins hold children in Janeu

इंदिरारमण रामानुजदास स्वामी के सानिध्य में हुआ वटुक बालकों का हुआ यज्ञोपवीत संस्कार

कटनी। जीवन में सोलह संस्कारों में से एक है जनेऊ संस्कार। इसी क्रम में गुरुवार को शहर के प्रसिद्ध मंदिर श्रीरंगनाथ धाम में यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया गया। यह आयोजन जगन्नाथपुरी से पधारे महंत श्री इंदिरारमण रामानुजदास स्वामी के सानिध्य में हुआ। रंगनाथ मंदिर में एकसाथ 35 ब्राम्हण बालकों ने पूर्ण विधि-विधान ने जनेऊ धारण किया। उत्सवपूर्ण माहौल में वेदपाठी ब्राम्हणों ने मंत्रोच्चार के साथ जनेऊ धारण कराया। व्रतबंध की इस बेला में वटुकों ने जनेऊ धारण कर उसके नियमों का पालन करने संकल्प लिया। इस परंपरा का धार्मिक लिहाज ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक लिहाज से भी बहुत महत्व है। इस संस्कार के बाद ये पुरुष पारंपरिक तौर से पूजा या धार्मिक कामों में भाग ले सकते हैं। 


यह है जनेऊ
जनेऊ तीन धागों वाला एक सूत्र होता है। यह सूत से बना पवित्र धागा होता है, जिसे व्यक्ति बाएं कंधे के ऊपर तथा दाहिनी भुजा के नीचे पहनता है। अर्थात इसे गले में इस तरह डाला जाता है कि वह बाएं कंधे के ऊपर रहे। हर सूत्र में तीन धागे होते हैं। पहला धागा इसमें उपस्थित तीन सूत्र त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक होते हैं। दूसरा धागा देवऋण, पितृऋण और ऋषिऋण कहलाता है। तीसरा यह सत्व, रज, तम, चौथा गायत्री मंत्र, पांंचवा संन्यास का प्रतीक है। जनेऊ के एक-एक तार में तीन-तीन तार होते हैं। ये नौ धागे एक मुख, दो नासिका, दो आंख, दो कान, मल और मूत्र के दो दरवाजे इन सभी को विकार रहित रखने के लिए होते हैं। इसकी गांठ अर्ध, धर्म, काम, मोक्ष और ब्रम्ह का प्रतीक हैं। यज्ञोपवीत 96 अंगुल का होता है। इससे 64 कलाओं, 32 विधाओं को सीखने का प्रयास है। 


35 Brahmins hold children in Janeu

इन नियमों का पालन आवश्यक
- किसी भी धार्मिक कार्य करने के पूर्व नया जनेऊ धारण करें
- विवाह तब तक नहीं करें जबतक जनेऊ धारण न कर लें
- जब भी मूत्र या शौच के लिए जाएं तो जनेऊ कान में धारण करें
- यज्ञोपवीत को शौच आदि क्रिया के पूर्व दाहिने कान पर चढ़ा लेना चाहिए और हाथ स्वच्छ करके ही उतारना चाहिए। 
- यज्ञोपवीत का कोई तार टूट जाए तो दल दें
- 6 माह के बाद जनेऊ बदल दें
-जन्म-मरण के सूतक के बाद जनेऊ बदल देवें
- जनेऊ में चाबी आदि न बांधें

जनेऊ धारण करने का वैज्ञानिक लाभ
शास्त्र के जानकार पं. ओमप्रकाश शर्मा के अनुसार जनेऊ धारण का धार्मिक के साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। नित्यकर्म के ठीक पहले इसे कान में खोसने से कान के पीछे की दो नसें जिनका जुड़ाव पेट से होता है इसके दबाव से आंतें खुलती हैं। इससे कब्ज की समस्या नहीं होती और शरीर स्वस्थ रहता है। जनेऊ कब्ज, एसिडिटी, पेट से संबंधित रोग, ब्लड प्रेशर, हार्टडिजीज सहित अन्य संक्रमण को रोकता है।

जनेऊ पहनने के फायदे
- जीवाणुओं और कीटाणुओं से बचाव
- तन और मन होता है निर्मल
- बल और तेज में होती है बढ़ोत्तरी
- हृदय रोग और ब्लड प्रेशर से होता है बचाव
- स्मरण शक्ति में होता है इजाफा
- मानसिक बल में होती है बढ़ोत्तरी
- आध्यात्मिक ऊर्जा की होती है प्राप्ति

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