mp electoin 2018: आठ माह में घटे 26 हजार मतदाता, 38 दिन में 22 हजार आवेदन नाम जोडऩे के आ गए

mp electoin 2018: आठ माह में घटे 26 हजार मतदाता, 38 दिन में 22 हजार आवेदन नाम जोडऩे के आ गए

raghavendra chaturvedi | Publish: Sep, 09 2018 12:13:08 PM (IST) Katni, Madhya Pradesh, India

प्रदेश में 60 लाख फर्जी मतदाता होने संबंधी कांग्रेस के आरोप के बाद प्रशासन का प्रयास रहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण में न हो एक भी चूक

कटनी. आगामी विधानसभा चुनाव जिस मतदाता सूची के आधार पर होनी है उसे अंंतिम रुप दिया जा रहा है। इस सूची का प्रारंभिक प्रकाशन एक अगस्त को होने के बाद दावा आपत्ति के लिए 7 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया। कटनी जिले में जनवरी 2018 में मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया था। तब जिलेभर में 8 लाख 84 हजार 960 मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज था। इसके बाद एक अगस्त 2018 को प्रारंभिक सूची का प्रकाशन किया गया। इस सूची में जिलेभर में मतदाताओं की 26 हजार 338 घटकर 8 लाख 58 हजार 622 रह गई। प्रारंभिक सूची प्रकाशन के बाद दावा आपत्ति के लिए 7 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया। इन 38 दिनों के दौरान जिलेभर में लगभग 22 हजार आवेदन मतदाता सूची में नाम जोडऩे के दर्ज हुए हैं।
जिले में अगस्त माह में मतदाता सूची जारी करने से पहले मतदाताओं के नाम काटने से लेकर जोडऩे व संसोधन की बारीकी से जांच हुई। इस प्रक्रिया को कांग्रेस पार्टी की उस शिकायत से जोड़कर देखा गया जिसमें प्रदेश के कांग्रेस नेताओं ने 3 जून को भारत निर्वाचन को आयोग शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में प्रदेश में 60 लाख फर्जी मतदाता होने के आरोप लगाए गए थे।
मतदाता सूची को अंतिम रुप दिये जाने के लिए 7 सितंबर तक लगभग 22 हजार नाम जोडऩे के आवेदन के अलावा लगभग 10 हजार आवेदन मतदाता सूची से नाम काटने और 5 हजार आवेदन संसोधन के भी जमा हुए हंै।
अपर कलेक्टर कटनी आर उमामाहेश्वरी का कहना है कि एक अगस्त को प्रारंभिक मतदाता सूची जारी होने और 7 सितंबर तक दावा आपत्ति में लगभग 37 हजार आवेदन आए हैं। सभी आवेदनों को आनलाइन किया जा रहा है। प्रक्रिया में सर्वर की धीमी गति की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। रात में 2 बजे तक कर्मचारी काम कर रहे हैं। सर्वर की गति धीमी होने के कारण डाटा अपडेटेशन में भी परेशानी हो रही है। फिलहाल 22 हजार आवेदन मतदाता सूची में नाम जोडऩे के आए हैं। परीक्षण के बाद संख्या कुछ कम हो सकती है। बीएलओ द्वारा जमा किये गए नाम काटने और संसोधन के आवेदनों की भी पड़ताल की जा रही है।

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