पटाखा फोडऩे से पहले पढ़ें ये खबर नहीं तो जाना पड़ सकता है जेल

balmeek pandey

Publish: Oct, 13 2017 09:42:52 (IST)

Katni, Madhya Pradesh, India
पटाखा फोडऩे से पहले पढ़ें ये खबर नहीं तो जाना पड़ सकता है जेल

पटाखों में 125 डिजिवल यूनिट से ज्यादा शोर इन्वायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट के तहत होगी कार्रवाई, पटाखा दुकानों की होगी जांच

कटनी. आकाश पर पटाखों का शतरंगी नजारा... एक से बढ़कर एक ध्वनि के साथ फूटते पटाखे, एक साथ हजार-पांच हजार पटाखों की लड़ी का फूटना, अनारदाना-फुलझड़ी की रोशनी सहित अन्य पटाखे जब फूटते हैं तो हर कोई रोमांचित हो उठता है। यदि आप भी बम के फूटने और धुआं छोडऩे वाले पटाखे देखकर खुश होते हैं तो सावधान हो जाएं। ये पटाखे देखने में भले अ'छे लगते हैं लेकिन आपको बीमारकर सकते हैं। दीपावली खुशियों का पर्व है। ऐसे में पटाखों के कान-फोड़ू शोर और प्रदूषण से त्योहार खराब न करें। जिले में पटाखा डीलरों द्वारा यदि 125 डिजिबल यूनिट की अधिक ध्वनि के पटाखो बेचे जाते हैं तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय मानक के आधार पर स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड कार्रवाई करेगा। नियम का उल्लंघन करने पर इन्वायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत एक साल की सजा व एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। विदित हो कि जिले में एक भी पटाखा फैक्ट्री नहीं है। शहर में पटाखे काशी, इंदौर सहित अन्य शहरों से आते हैं। सभी डीलरों व दुकानों में पटाखों की जांच प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जाएगी।

होती है ये समस्या
- कान के पर्दे फटने का डर
- सुनाई देना बंद होना
- आंखों में जलन
- सांस लेने की समस्या
- चर्म रोग की समस्या
- दुर्घटना का अंदेशा

निकलतीं हैं खतरनाक गैसें
पटाखों से कई प्रकार की खतरनाक गैस निकल कर वायुमंडल में घुल जाती हैं। कार्बन डाइ आक्साइड पर्यावरण के साथ-साथ शरीर को भी नुकसान पहुंचाती है। ग्लोबल वार्मिंग को भी यह गैस प्रभावित करती है। कार्बन मोनोआक्साइड जहरीली, गंधहीन गैस भी पटाखों से निकलती है, जो हृदय की मांस पेशियों को नुकसान पहुंचाती है। सल्फर डाइआक्साइड ब्रोकाइटिस जैसी सांस की बीमारी पैदा करती है। इससे बलगम व गले की बीमारियां पैदा होती हैं। नाइट्रेट कैंसर जैसी बीमारियां, हाइड्रोजन सल्फाइड मस्तिष्क व दिल को नुकसान व बेरियम आक्साइड आंखों व त्वचा को नुकसान पहुंचाती है। क्रोमियम गैस सांस की नली में व त्वचा में परेशानी पैदा करती है तथा जीव जंतुओं को नुकसान करती है।

रखें ये सावधानी
- पटाखों के शोर से बवाव करें
- घर के खिड़की-दरवाजें बंद रखें
- दीवाली के बाद इन्फेक्शन पर डॉक्टर को दिखाएं
- श्वांस व अस्थमा वाले मरीज नियमित रूप से दवाई लेते रहें
- सांस लेने में तकलीफ होने पर इलाज कराएं
- आंखों पर चश्मा और मुंह पर मास्क लगाएं

इनका कहना है
डॉ. एसपी बुधौलिया, चीफ कैमिस्ट, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि पटाखों के कारण पॉल्यूशन न हो इसके लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। नगर निगम के साथ विभाग द्वारा ध्वनि मापक यंत्र के माध्यम से जांच कराई जाएगी। 125 डिजिबल यूनिट से Óयादा पटाखे पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। प्रदूषण न हो इसको लेकर लोगों को जागरुक होना पड़ेगा।

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