scriptBelow average rainfall in Katni district | 10 सालों में 6 साल औसत से कम बारिश, इस वजह से हो रही भयावह स्थिति | Patrika News

10 सालों में 6 साल औसत से कम बारिश, इस वजह से हो रही भयावह स्थिति

30 साल पुराने जंगल जैसी स्थिति करनी होगी निर्मित, कटनी सहित रीठी ब्लॉक बुंदेलखंड की तर्ज पर कम बारिश वाले जोन में हो रहे शामिल, 2021 में जिले में सबसे कम बारिश, जल संरक्षण के साथ पौधरोपण अनिवार्य

कटनी

Published: May 18, 2022 09:50:39 pm

कटनी. अरब सागर मानसून पहुंच गया है। केरल में 1 जून को पहुंचने का समय होता है, लेकिन इस बार 3 से 5 दिन पहले मानसून पहुंचेगा। 27 मई को ही केरल पहुंच सकता है। 15 जून को मध्यप्रदेश में प्रवेश करेगा और साथ में कटनी में भी मानसून पहले सक्रिय हो जाएगा। 10 से 12 जून तक कटनी में मानसून पहुंच जाएगा, यह तब संभव है जब स्थिति सामान्य रहेगी। वहीं बेहतर बारिश होगी, इसकी कोई गारंटी नहीं हैं। क्योंकि पिछले 10 सालों के बारिश के आंकड़ों की बात करें तो 6 साल औसत बारिश 1124 मिलीमीटर के स्थान पर आधी व औसत से भी कम बारिश हो रही है।
इसकी मुख्य वजह हम और आप हैं। लगातार उजड़ रहे जंगल, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, मानक के अनुसार समय-समय पर पौधरोपण न होना बारिश न होने के प्रमुख कारण हैं। पर्यावरण संतुलन को हम बनाकर रखेंगे तभी हम बारिश का मौसम अपने जिले में देख पाएंगे। बता दें कि प्री-मानसून की गतिविधि भी शुरू हो गई है। अब बादल आएंगे, तूफान आएगा, कहीं पर बूंदा-बांदी तो कहीं पर बारिश होगी।

Below average rainfall in Katni district
Below average rainfall in Katni district

इन सालों में सर्वाधिक बारिश
कृषि मौसम विज्ञान केंद्र के मौसम विभाग के अनुसार 122 सालों में जिले में 2005 में सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई। इसमें 2008.2 में मिलीमीटर बारिश हुई थी। अकेले जुलाई माह में 1186.8 मिमी बारिश हुई थी। इसके पहले 1994 में सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई थी। 1994 में 1748.2 मिलीमीटर बारिश हुई थी। 1955 में 1712 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

सबसे कम बारिश इन सालों में
1901 से लेकर 2021 तक की स्थिति में कटनी जिले में 2009 में सबसे कम बारिश दर्ज की गई। 557.6 मिमी दर्ज की गई। 2021 में 713.8 मिलीमीटर बारिश ही हुई है। वहीं इसके पहले 2020 में 867 एमएम हुई है। 2019 में 1227 मिमी बारिश हुई थी।

ऐसे होती है बारिश
मैदानी भाग में तापमान अधिक होने से, समुद्र वाले भाग में कम तापमान रहने से हवा का दबाव कम हो जाता है। कम दबाव का क्षेत्र बनता है, वह लो-प्रेशर से हाई प्रेशन की ओर जाता है, नमी युक्त हवाएं अधिक तापमान वाले क्षेत्र में आती हैं, जैसे ही वे यहां आती हैं तो ऊपर जाकर (एक किलोमीटर ऊंचाई) पर जाते हुए वह 5 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाता है, वह बादल का रूप ले लेता है, आपस में पानी की बूंदें व पानी मिलते हैं तो गुरुत्वाकर्षण के संपर्क में आते ही नीचे गिरता है, जो पानी बारिश का रूप ले लेता है।

यह है सालवार बारिश मिमी में
वर्ष औसत
2021 713.8
2019 1227
2018 1042
2017 927
2016 1366
2015 747
2014 789
2013 1372
2012 902
2011 1141

दो तहसील खतरनाक जोन में
कटनी और रीठी ब्लॉक में सबसे कम बारिश होती है। ये बुंदेलखंड के पार्ट में शामिल होने की कगार में हैं। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो बारिश न होने के कई प्रमुख कारण जंगल बना रहेगा तो जिले में बारिश अच्छी होगी, नहीं तो आगे और भी भयावह होती जाएगी। बुंदेलखंड के छतरपुर, ढीकमगढ़, पन्ना, दमोह जिले कम बारिश के लिए जाने जाते हैं, इसकी मुख्य वजह जंगलों का उजडऩा है।

पड़ोसी जिले हैं बेहतर
आपको जानकर ताज्जुब होगा कि कटनी जिले के पड़ोसी जिलों में बारिश की बेहतर स्थिति है। कटनी, शहडोल, सतना, उमरिया, जबलपुर में औसत बारिश हो जाती है। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो अभी भी पर्यावरण में सुधार नहीं किया गया तो बारिश की और भयावह स्थिति हो जाएगी। ऐसे में पेड़ों का बचा रहना, अत्यधिक पौधरोपण किया जाना बहुत आवश्यक है।

30 साल पहले जंगल इसलिए जरूरी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पेड़ बारिश के लिए बेहतर कारगर साबित होते हैं। जब आसमान में बादल बनते हैं और बारिश का सिस्टम (कम दबाव का क्षेत्र) गुजरता है तो पेड़ बेरियर का काम करते हैं, यदि वे नहीं रहेंगे तो मानसून आगे बढ़ता चला जाएगा। शहडोल, मंडल, डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा आदि में बेहतर बारिश होती है। इसकी मुख्य वजह घने जंगल हैं।

यह रही मानसून आने की स्थिति
- 2011 में 15 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2012 में 18 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2013 में 13 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2014 में 18 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2015 में 15 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2016 में 12 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2017 में 07 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2018 में 13 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2019 में 14 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2020 में 04 जून को कटनी पहुंचा मानसून
- 2021 में 09 जून को कटनी पहुंचा मानसून

फैक्ट फाइल
- 2021 में प्री-मानसून सटीक समय में आया, लेकिन मानसून देरी से आया वह भी निराश करके लौटा।
- 2005 में ही जुलाई में अच्छी बारिश, जुलाई-अगस्त बारिश के लिए ही बेहतर माने जाते हैं माह।
- 1124 मिलीमीटर बारिश का औसत है, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह कांटा 1049 माना जा रहा है।
- 1901 में भी 1192 मिलीमीटर बारिश हुई थी, इसके बाद से कई वर्षों तक जिले में बारिश की रही बेहतर स्थिति।

इनका कहना है
इस साल 10 से 12 जून तक मानसून जिले में सक्रिय हो जाएगा। प्री-मानसून की गतिविधियां शुरू हो गई हैं। हालांकि जिले में लगातार कम बारिश हो रही है, इसकी मुख्य वजह जंगलों की कमी है। बेहतर बारिश के लिए जनचेतना बेहद जरूरी है और 30 साल पहले के जैसा जंगल विकसित करना होगा।
डॉ. संदीप चंद्रवंशी, कृषि मौसम वैज्ञानिक।

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