scriptBJP accuses Congress of ban on OBC reserved seats | ओबीसी आरक्षित सीटों पर रोक को लेकर बीजेपी ने लगाए कांग्रेस पर आरोप | Patrika News

ओबीसी आरक्षित सीटों पर रोक को लेकर बीजेपी ने लगाए कांग्रेस पर आरोप

बीजेपी ने कहा कांग्रेस के षड्यंत्र से लगी ओबीसी आरक्षित सीटों पर रोक

कटनी

Published: December 22, 2021 08:12:41 pm

कटनी। ओबीसी आरक्षण को लेकर प्रदेश में भूचाल आया हुआ है। इस मुद्दे पर सड़क से लेकर सदन तक सत्ता और विपक्ष आमने सामने हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रदेशभर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए इस मामले में कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं। बीजेपी नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और उसके आदेश का पार्टी सम्मान करती है और उस पर कोई टिप्पणी नहीं करती है। किन्तु जिस परस्थिति में यह आदेश हुआ उसके विषय में प्रदेश की जनता को मालूम होना चाहिए । जिस प्रकरण में OBC आरक्षित पदों पर चुनाव रोका गया है उसकी पैरवी उसकी पैरवी प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, राज्यसभा सांसद विवके तन्खा कर रहे थे।

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पंचायत चुनाव से संबंधित एक याचिका उच्च न्यायालय में मनमोहन नागर द्वारा प्रस्तुत की गई थी जिसकी सुनवाई करते उच्च न्यायालय ने दिनाँक 15/12/20201 को प्रकरण जनवरी 2022 के प्रथम सप्ताह के लिए सुनवाई हेतु नियत किया गया था, किन्तु उक्त आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गई और प्रकरण में जी ने पैरवी की प्रकरण विवके तन्खा सर्वोच्च न्यायालय लेकर गये और पिछड़े वर्ग की सीटों पर जो आरक्षण प्रदेश की भाजपा सरकार ने दिया था उस पर रोक लगवा दी गई। कांग्रेस ने हमेशा से ही पिछड़े वर्ग के लोगो को छला है, उन्हें वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया और जब भी उनके उत्थान के लिए सरकार ने कोई भी कार्यकिया उसमें अवरोध उत्पन्न किया ।

विवके तन्खा का कहना है कि पिछड़े वर्ग के आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय नहीं गये थे तो भाजपा नेताओं ने उनसे पूछा है कि जिस के दौरान उन्होंने इस बात पर आपत्ति क्यों नहीं दर्ज कराई कि ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित पदो पर रोक ना लगाई जावे। प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय के लिए आरक्षित पिछड़े वर्ग के 70 हजार पद प्रभावित हुए है जिनमें जिला पंचायत के 155, जनपद पंचायत सदस्य के 1273, सरपंच के 4058 पंच के 64353 पद सम्मलित है।

BJP ने कहा कि तन्खा द्वारा भेजे गये लीगल नोटिस का भी कोई औचित्य नहीं है क्योंकि यह बात ऑन रिकार्ड है कि उपरोक्त प्रकरण जिसमे यह आदेश हुआ है। उसकी पैरवी स्वंय विवेक तन्खा कर रहे थे। कमलनाथ कहते है कि भाजपा सरकार एसएलपी दायर करे, शायद कमलनाथ जी को यह नहीं मालूम की अंतरिक आदेश के लिए एसएलपी नहीं रिव्यू पीटीशन दायर होती जिसे सरकार प्रभाव से तन्खा जी के फाईल करनी चाहिए।

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