हर माह 35 लाख रुपये खर्च के बाद भी गंदगी से जूझ रहा शहर

स्वच्छ भारत अभियान के बीच शहर में सफाई के नाम पर सामने आई बड़ी लापरवाही.

- जिम्मेंदारों ने मूंदी आंख, सफाई की मॉनिटरिंग के लिए भी एक निजी कंपनी को हर माह 2 लाख रूपये से ज्यादा का हो रहा भुगतान.

By: raghavendra chaturvedi

Published: 31 Oct 2020, 09:58 AM IST

कटनी. स्वच्छता के लिए देशभर में चलाए जा रहे स्वच्छ भारत अभियान के बीच शहर में सफाई के नाम बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां एमएसडब्ल्यू निजी कंपनी को हर माह 35 लाख रूपये से ज्यादा का भुगतान सफाई के लिए हो रहा है। इतना ही नहीं सफाई की मॉनिटरिंग के लिए हर माह एक दूसरी निजी कंपनी आइसीवीसी को 2 लाख रूपये से ज्यादा का भुगतान किया जा रहा है। इन सबके बीच शहर में सफाई के हालात ऐसे हैं कि कई स्थानों पर प्रतिदिन कचरा नहीं उठता। गंदगी से नागरिक परेशान हैं और जिम्मेंदार आंख मूंदे बैठे हैं।

नागरिकों का कहना है कि हर माह सफाई के नाम पर लाखों रूपये खर्च होने के बाद भी कई प्रमुख स्थानों पर कचरे का अंबार लगा रहता है। जिला अस्तपाल परिसर, मुड़वारा रेलवे स्टेशन के समीप, बसस्टैंड के आसपास लेकर शहर के दूसरे रहवासी क्षेत्र में सफाई और कचरा उठाव के नाम पर महज कामचलाऊ काम ही किया जा रहा है। सफाई के नाम पर हो रही खानापूर्ति के मामले में नगर निगम के जिम्मेंदार अफसरों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम के कार्यपालन यंत्री राकेश शर्मा बताते हैं कि शहर में बेहतर सफाई हो इसके लिए एमएसडब्ल्यू को हर माह 35 लाख रूपये से ज्यादा का भुगतान किया जा रहा है। यह राशि कचरे के वजन के आधार पर तय होती है। मॉनिटरिंग के लिए इंडीपेंडेंड इंजीनियर कंपनी आइसीवीसी को हर माह दो लाख रूपये से ज्यादा का भुगतान किया जा रहा है। इसके बाद भी अगर शहर में कहीं कचरा है तो संबंधित प्रभारियों से बात करते हैं।

यह भी जानिए
- नगर निगम की ओर से सफाई के नोडल अधिकारी इंजीनियर आदेश जैन हैं, कार्यपालन यंत्री राकेश शर्मा भी काम देखते हैं।
- कचरा उठाव और सफाई की मॉनीटरिंग के लिए नगर निगम इंडीपेंडेंड इंजीनियर कंपनी को पहले हर माह पांच लाख रूपये से ज्यादा का भुगतान कर रही थी। शिकायत हुई तो अब दो लाख रूपये से ज्यादा का भुगतान हर माह हो रहा है। कंपनी का दावा है कि उसने चार कर्मचारी रखे हैं, भुगतान की आधी राशि एमएसडब्ल्यू कंपनी देती है।
- 37 लाख रूपये से ज्यादा राशि हर माह कचरा प्रबंधन के नाम पर एमएसडब्ल्यू को दिया जा रहा है। शहर में कामचलाऊ सफाई पर नागरिक पूर्व में भी कई बार आपत्ति दर्ज करा चुके हैं।

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