सुविधाओं से मोहताज होनहार: तीन साल में साढ़े तीन करोड़ के प्रस्ताव पर नहीं लगी मुहर अब 10 करोड़ का गया प्रस्ताव

फारेस्टर खेल मैदान का नहीं हो रहा जीर्णोद्धार, सुविधाओं को मोहताज शहर के खिलाफी, बेहतर मैदान न होने से प्रतिभाओं पर पड़ रहा विपरीत असर, जनप्रतिनिधि व अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान

By: balmeek pandey

Updated: 15 Nov 2020, 09:01 AM IST

कटनी. शहर व जिले के कई खिलाफी ऐसे हैं जो न सिर्फ संभाग, प्रदेश और देश बल्कि सात समुंदर पार भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं, लेकिन ताज्जबु की बात तो यह है कि शहर की खेल प्रतिभाओं सुविधाओं को मोहताज हैं। शहर में एक भी विकसित व सर्व सुविधा युक्त खेल मैदान नहीं है, जिसको लेकर न तो अधिकारी औ ना ही जनप्रतिनिधियों को कोई सरोकार है। शहर का एक मात्र खेल मैदान फारेस्टर प्लेग्राउंड बदहाली के आंसू बहा रहा है। तीन साल से साढ़े तीन करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनकर तैयार है, उसे भोपाल मुख्यालय भेजा गया, लेकिन अबतक मुहर नहीं लगी है। लगातार पत्र व्यवहार व पहल के बाद भी स्वीकृति नहीं मिली। पहले दो करोड़ का व फिर साढ़े तीन करोड़ का प्रस्ताव पीआइयू ने बनाया था। उसे संचालनालय भेजा गया, लेकिन अबतक मुहर नहीं लगी। अब एक बार फिर शहर में एक खेल मैदान को सर्वसुविधायुक्त विकसित करने के लिए खेल विभाग के माध्यम से प्रस्ताव बनाया गया है। खेलों इंडिया के तहत प्रस्ताव गया है, यह प्रस्ताव 10 करोड़ रुपये का बना है। एक माह से अधिक का समय हो गया है, लेकिन अभी कोई भी सकारात्मक पहल शुरू नहीं हुई।
बता दें कि शहर में एक भी ऐसा मैदान नहीं है, जहां पर खिलाड़ी अपनी प्रतिभा को निखार सकें। खिलाडिय़ों को माकूल व्यवस्थाएं मुहैया कराने के लिए बजट भी जारी कर दिया था। मैदान में आऊटडोर एवं इंडोर स्ट्रक्चर तैयार किया जाना था। मैदान की मरम्मत से लेकर खिलाडिय़ों के लिए बैठक, पेयजल व प्रसाधन की विशेष सुविधा मुहैया कराई जानी थी, जो महज सपना बनकर रह गई है। मैदान में खिलाडिय़ों के लिए एथलेटिक्स ट्रैक, हॉकी मैदान, ग्रीन ग्रास, पवेलियन, गल्र्स और ब्वॉयज के लिए लेट-बॉथ सहित सुरक्षा के मद्देनजर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाना था। इस्टीमेट बढ़ाने और फिर सरकार बदलाने के बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया है।

खिलाडिय़ों को रही दिक्कत
फारेस्टर मैदान का रखरखाव नहीं हो पा रहा है। इसकी दशा सुधारने के लिए नगर निगम से मैदान खेल विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है, इसके बाद भी व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रहीं। मैदान में अव्यवस्था से सुबह-शाम सैर करने वाले लोग भी यहा आने में कतराते हैं। वजह यही है कि शाम को पीने-पिलाने वाले शौकीनों का न केवल जमावड़ा लगता है, बल्कि उनका पीने-पिलाने का दौर घटों चलता है। न तो इस ओर खेल समिति व नगर निगम का और ना ही पुलिस प्रशासन का ध्यान है, जिसके चलते पीने-पिलाने के शौकीन मस्त हो इस मैदान को मयखाना मान खूब लुत्फ उठाते हैं। खेल मैदान में खेलने वाले युवा प्रतिभाओं का भी कहना है कि कई बार मैदान में भी शराब की खाली बोतल पड़ी मिलती है जिससे चोट लगने का डर बना रहता है।

प्रसाधन भी नहीं है ठीक
फारेस्टर खेल मैदान में खिलाडिय़ों के लिए उबड़-खाबड़ मैदान के सिवा कोई भी सुविधाएं नहीं मिलती है। मैदान में खिलाडिय़ों को यदि खेलते वक्त प्यास लग जाए तो उन्हें वहां पर पानी नसीब नहीं हो सकता है या तो वे बाहर आकर पानी पी सकते हैं या फिर अपने साथ उन्हें पानी लेकर जाना पड़ेगा। इतना ही नहीं मैदान में बना प्रसाधन गंदगी से अटा पड़ा है। प्रसाधन की नियमित साफ-सफाई भी नहीं होती। इतना ही नहीं मैदान में खिलाडिय़ों के लिए न तो छाया की व्यवस्था है और ना ही दर्शकों के लिए। कोने में एक छोटा सा शेड बना हुआ है जो नाकाफी है। मैदान भी बाइकर्स का अड्डा बन गया है।

इनका कहना है
पहले वाले प्रस्ताव पर स्वीकृति नहीं मिली है। अब नए सिर से खेलों इंडिया अभियान के तहत संचालनालय को एक माह पहले प्रस्ताव भेजा गया है। लगभग 10 करोड़ रुपये का एक सेंटर विकसित होना है, उसी का प्रस्ताव भेजा गया है। एथलेटिक्स मैदान के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
विजय भार, जिला खेल अधिकारी।

balmeek pandey Reporting
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