दस साल से बन रहा पुल टूटा, ठेकेदार ने कहा यहां है बड़ी समस्या, नहीं करूंगा काम, अब हो रही यह पहल

शहर के बीचो-बीच गुजरने वाली कटनी नदी पुल पर 2008 से चल रहे पुल निर्माण का काम 11 साल में ही पूरा नहीं हुआ। सेतु निर्माण विभाग ने ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला को अलग कर दिया। इधर पुल निर्माण से अलग होने के बाद ठेकेदार निर्माण में बचत सामग्री को लेने सोमवार को कटनी नदी पुल पहुंचे। पूर्व में हुए काम से बाहर निकलीं राड को कटवा कर वापस ले जाने की तैयारी में दिखे।

By: balmeek pandey

Updated: 18 Feb 2020, 09:02 AM IST

कटनी. शहर के बीचो-बीच गुजरने वाली कटनी नदी पुल पर 2008 से चल रहे पुल निर्माण का काम 11 साल में ही पूरा नहीं हुआ। सेतु निर्माण विभाग ने ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला को अलग कर दिया। इधर पुल निर्माण से अलग होने के बाद ठेकेदार निर्माण में बचत सामग्री को लेने सोमवार को कटनी नदी पुल पहुंचे। पूर्व में हुए काम से बाहर निकलीं राड को कटवा कर वापस ले जाने की तैयारी में दिखे। शुक्ला ने बताया कि पुल का जितना हिस्सा जुलाई माह में ढह गया था उसे भी हो तोडऩे का काम होगा हालांकि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार राम सज्जन शुक्ला को पुल निर्माण से अलग करके निर्माणाधीन पुल को तोडऩे का जिम्मा रायपुर की एक कंपनी को दिया गया है। इस दौरान ठेकेदार रामसज्जन शुक्ला का कहना था कि पुल तोडऩे के लिए जबतक लिखित अनुमति नहीं मिलेगी वे आगे नहीं बढ़ेंगे। क्योंकि पुल जर्जर है, मकान भी बने हैं, ऐसे में कोई हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि नदी में व आसपास कोई बड़ी समस्या है, ऐसे में काम में बार-बार बाधा आ रही है, हम काम नहीं करेंगे।

 

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यह है मामला
24 जुलाई को कटनी नदी 4 करोड़ रुपये से अधिक का निर्माणाधीन एक हिस्से का पुल तेज धमाके के बाद धंसक गया। इससे हड़कंप की स्थिति बन गई थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने तत्काल सेतु निगम के चार अधिकारियों को निलंबित कर जांच बैठाई। 27 जुलाई को मुख्य अभियंता भोपाल एआर सिंह के नेतृत्व में जांच हुई। जांच रिपोर्ट आई, जिसमें ठेकेदार और तत्कालीन सेतु निगम के इंजीनियों की बेपरवाही सामने आई। बता दें कि नदी में 2008 से पुल निर्माणाधीन है और अबतक एक हिस्से का भी काम पूरा नहीं हुआ था और बड़ा हादसा हो गया।

 

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ठेकेदार पर नहीं कोई कार्रवाई
मप्र सेतु निगम व प्रशासन द्वारा पुल के निर्माण में लेटलतीफी व उसके बाद गुणवत्ताविहीन निर्माण पर ठेकेदार के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ब्लैक लिस्टेड करने व काम से अलग करने की ही औपचारिकता पूरी की। जबकि ब्लैक लिस्टेड पूर्व में भी तीन बार विभाग कर चुका है। 10 साल से पुल का निर्माण ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है। ठेकेदार की मनमानी के चलते शहरवासी जर्जर पुल से आवागमन करने को मजबूर हैं और विभाग ठेकेदार को अभयदान दिए हुए हैं।

 

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खास-खास:
- 24 जुलाई को पुल ढहने के बाद से अबतक विभाग सिर्फ जांच की ही पूरी की औपचारिकता, पुल निर्माणके लिए नहीं बना पाया ठोस योजना।
- वर्ष 2009 से लेकर अभी तक सेतु निगम ठेकेदार को 4 करोड़ 25 लाख रुपये का कर चुका है भुगतान, पुल निर्माण में छह करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो रहे हैं, देरी पर नहीं हुई जुर्माने की कार्रवाई।
- ड्राइंग डिजाइन बदलने व ठेकेदार की मनमानी के चलते लेट हुआ निर्माण, 2017 में फिर से शुरू हुआ था काम, तीन साल तक ठेकेदार बंद किए रहा काम।
- 45-45 मीटर की दूरी में दो पिलर में तैयार हो रहा था पुल, दो स्लैब बनाकर पुल का चल रहा था काम, तभी हो गया हादसा।

इनका कहना है
ठेकेदार शुक्ला को ग्राउडिंग करवाने के लिए कहा गया है। स्लैब के अंदर पड़ी छड़ो को जाम कराया जा रहा है। इसके ऑपरेटरों ने काम शुरू कर दिया है। शुक्ला से ही पुल तुड़वाया जाएगा। इसके लिए कलेक्टर से भी चर्चा हुई है। सुरक्षा व अनुमति के बाद शीघ्र ही पुल तोडऩे की कार्रवाई होगी। इसके बाद नया पुल बनेगा।
पीएस परिहार, कार्यपालन यंत्री सेतु निगम।

balmeek pandey Reporting
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