Video: 23 हजार से अधिक बच्चों की सुरक्षा में ये दोनों विभाग फेल, अफसर मान रहे ' ऑल इज वेल'

Balmeek Pandey

Publish: Apr, 17 2019 05:39:36 PM (IST)

Katni, Katni, Madhya Pradesh, India

कटनी. कुपोषण को दूर करने में जिले में गंभीर बेपरवाही बरती जा रही है। जिलेभर में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की संख्या एक लाख 16 हजार 681 है। इसमें से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनवाड़ी, काउंसलिंग सहित अन्य माध्यमों से जांच कराई गई, जिसमें यह पाया गया है कि 20 हजार 842 बच्चों का वजन कम है वहीं 2 हजार 270 बच्चों का वजन सबसे कम हैं। आलम यह है कि प्रदेश में कटनी जिला कुपोषण के मामले में अभी भी 35वें नंबर पर है। ऐसे बच्चों की काउंसलिंग कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र के माध्यम से सुपोषित करना है। हैरानी की बात तो यह है जिला अस्पताल सहित जिलेभर ढीमरखेड़ा, बहोरीबंद, रीठी, विजयराघवगढ़, बड़वारा और बरही में केंद्र खोले गए हैं। ताकि कुपोषित बच्चों को दो सप्ताह तक विशेष ट्रीटमेंट देकर उनका कुपोषण दूर किया जा सके। जिले में अप्रैल माह में मात्र 45 बच्चे ही उपचाररत हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है कि सर्वसुविधा होने के बावजूद भी पोषण पुर्नवास केंद्र खाली पड़े हैं। ऐसे में जिले से कैसे कुपोषण दूर होगा, चिंता का विषय है, लेकिन जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान नहीं है।


सर्वसुविधा युक्त पोषण पुर्नवास केंद्र रहा खाली
पत्रिका ने मंगलवारको जिला चिकित्सालय स्थित पोषण पुर्नवास केंद्र पर नजर डाली तो हालात आश्चर्यजनक नजर आए। यहां बच्चों के मनोरंजन के एलइडी टीवी सहित अन्य सुविधाएं बंद मिलीं। 20 सीटर पोषण पुर्नवास केंद्र में मंगलवार को ही 9 बच्चों का एडमिशन हुआ, बाकी दिन 12 बच्चे ही भर्ती थे। अभी तक 21 बच्चे ही भर्ती हुए हैं। ऐसे हाल जब जिला मुख्यालय पर स्थित पोषण पुर्नवास केंद्र का हैं तो जिले के अन्य केंद्रों के क्या हालात होंगे।

14 दिन तक दिया जाता है विशेष उपचार
जिले में कुल 7 पोषण पुर्नवास केंद्र हैं। जिसमें से जिला मुख्यालय पर 20 सीटर व अन्य नगरों में 10-10 सीटर केंद्र हैं। जहां कुपोषित बच्चों को 14 दिन तक रखा जाता है। इस दौरान बच्चे व उसकी माता को पौष्टिक भोजन, नाश्ता आदि के साथ ही चिकित्सक द्वारा समय-समय पर देखकर उपचार दिया जाता है। ताकि 24 घंटे निगरानी में रहने पर बच्चे का कुपोषण दूर हो। इस दौरान बच्चे की माता को प्रतिदिन 120 रुपए के मान से प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। ताकि अगर वह मजदूरी कर अपना भरण पोषण करती हो तो उसे आर्थिक रूप से भी किसी प्रकार की परेशानी नहीं आए। ग्रामीण क्षेत्र के केंद्र में हर माह बमुश्किल 6-7 बच्चे ही आ रहे हैं।

खास-खास
- हर माह 160 बच्चें का उपचार होना है, जिसमें सालभर में मात्र 1975 ही भर्ती हुए हैं।
- 1920 बच्चों की क्षमता पूरी नहीं कर पाए विभाग, 89 प्रतिशत रहा लक्ष्य।
- जिले में वजन लेने से छूटे हुए हैं 1840 बच्चे, गैप का प्रतिशत भी है दो।
- काउंसलिंग में 11.5 एमयूएसइ कम होने पर बच्चों का हो रहा एडमिशन।

स्वास्थ्य विभाग भी नहीं गंभीर
हैरानी की बात तो यह है कुपोषित बच्चों की संख्या को कम करने में महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। महिला बाल विकास विभाग को बच्चों की काउंसलिंग कर सुपोषित कराना है, लेकिन इसमें गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। वहीं स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एएनएम, आरबीएसके टीम व डॉक्टरों को पहलकर बच्चों को हष्टपुष्ट बनाना है, लेकिन अफसरों की बेपरवाही के कारण कर्मचारी लापरवाही बरत रहे हैं।

यह है कुपोषण की वजह
जिले में बढ़ते कुपोषण की मुख्य वजह खानपान उचित न होना है। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा। माता-पिता द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा। कटनी शहर माइग्रेशन में शामिल है। यहां से लोग मजदूरी के लिए पलायन करते हैं वहां पर बच्चों की देखभाल नहीं हो पा रही। जिले में बच्चों को टीका नहीं लग पा रहे। विटामिन और आयरन को डोज नहीं दिया जा रहा, जिससे बच्चों का पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है और उन्हें कवर करने में समय लगता है।

एनआरसी केंद्र में बच्चों की स्थिति
माह बच्चे
दिसंबर 139
जनवरी 98
फरवरी 125
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जिला अस्पताल एनआरसी
माह बच्चे
जनवरी 28
फरवरी 23
मार्च 18
अप्रैल 24

यह है कुपोषण की स्थिति
परियोजना संख्या कुपोषित अति कुपोषित
बड़वारा 20118 3361 300
बहोरीबंद 18513 2165 215
ढीमरखेड़ा 16861 3422 402
कटनी 16627 2170 304
मुड़वारा 13316 3205 360
रीठी 12506 2137 274
विगढ़ 18740 4382 415
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योग 116681 20842 2277
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इनका कहना है
कुपोषण दूर करने के लिए आंगनवाड़ी सहित अन्य माध्यमों से प्रयास किए जा रहे हैं। पहले एक तारखी को बच्चे भर्ती होते और 14 दिन के बाद छोड़ते थे। यहां पर शुरू से सिस्टम गड़बड़ चल रहा था। मैंने मार्च में आने के बाद व्यवस्था में सुधार किया है। हर माह बेड फुल रखने के लिए योजना बनाई है। अभिभावक बच्चे भेजना नहीं चाहते हैं। सुपरवाइजरों को सख्त हिदायत दी गई है, सुधार हो रहा है। लापरवाही पर वेतन कटेगा। मंगलवार को जिले में बेड फुल हो गए हैं।
नयन सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।

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