गांव में हाइस्कूल व नलजल योजना की दरकार, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

विकास से अछूता गांव, कागजों तक सीमित विकास, जनप्रतिनिधियों व अफसरों को नही कोई सरोकार, पर्याप्त बिजली न मिलने से अन्नदाताओ को हो रही परेशानी,ग्राम सुपेली के रहवासी परेशान

By: balmeek pandey

Updated: 30 Dec 2020, 08:49 PM IST

कटनी/स्लीमनाबाद. बहोरीबंद विकासखण्ड की की ग्राम पंचायत सुपेली जहां हाइस्कूल की नितांत आवश्यकता है, उसको अब तक पूरा नहीं किया जा सका। जबकि हाइस्कूल के लिए ग्रामीणों के द्वारा अनेकों बार जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को पत्र लिखकर मांग की जा चुकी है। हाइस्कूल न खुल पाने से अधिक दूरी पर हाई स्कूल की शिक्षा ग्रहण करने जाने पर गांव की बेटियां पढ़ाई नही कर पाती हैं। उन्हें 8वीं के बाद अपनी पढ़ाई छोडऩी पड़ती है। हाइस्कूल की शिक्षा ग्रहण करने करने के लिए 7 किलोमीटर दूर रामपाटन या फिर बहोरीबंद जाना पड़ता है।
ग्रामीण रामकिशोर बर्मन, कंधी बर्मन, संतु पटेल, विजय आदिवासी ने बताया कि गांव मे पंचायत कार्यकाल के 35 साल हो चुके हैं। अभी तक गांव में नलजल योजना का लाभ नही मिल पाया है। जिससे गांव के ग्रामीणों को हैंडपंपों व कुआं के भरोसे पेयजल के लिए रहना पड़ता है। यदि हैंडपंप बिगड़ जाए तो फिर पानी के लिए त्राहि-त्राहि मच जाती है। वहीं कृषि कार्य के लिए 10 घंटे बिजली नहीं मिल रही। रबी सीजन की बोवनी का कार्य हो चुका है, सिंचाई का कार्य चल रहा है। लेकिन अबतक किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही। पर्याप्त बिजली मिले तो वे खेती को लाभ का धंधा बना लेंगे। लेकिन किसानों के हितों के लिए न तो प्रशासनिक अधिकारी और ना ही जनप्रतिनिधि कोई ध्यान दे रहे।

ग्राम -सुपेली
आबादी-2200
ग्राम पंचायत- सुपेली
तहसील-बहोरीबंद
जिला-कटनी

रोजगार का भी अभाव
ग्रामीणों ने बताया कि गांव मे भी सिर्फ मनरेगा योजना से ही कुछ रोजगार मिल जाता है, लेकिन पढ़े लिखे युवाओं को रोजगार के लिए पलायन करना पड़ता है। गांव मैं कोई औद्योगिक संस्थान अगर खुल जाए तो युवाओं को गांव मे ही रोजगार मिल जाए, लेकिन जनप्रतिनिधियों व अफसरों को रोजगार के साधन उपलब्ध कराने कोई रुचि नही ली जा रही है।

इनका कहना है
जिन ग्राम पंचायतो में नलजल योजना नहीं है। उन ग्राम पंचायतों में वर्ष 2024 तक जल जीवन मिशन अभियान के तहत कार्य होगा। बहोरीबंद की नलजल योजना से वंचित ग्राम पंचायतों को भी योजना का लाभ मिलेगा।
बीपी चक्रवर्ती, एसडीओ पीएचई विभाग।

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