डेंगू की एलिसा आइजीएम जांच ठप, जबलपुर भेजे दो संदिग्ध मरीजों के नमूने

डेंगू की चुनौती से निपटने में जांच व इलाज से लेकर सफाई व्यवस्था पर उठ रहे सवाल.

By: raghavendra chaturvedi

Published: 16 Sep 2021, 02:29 PM IST

कटनी. डेंगू पूरे प्रदेश में कहर बरपा रहा है। कटनी के पड़ोसी जिले जबलपुर में स्थिति दिनोंदिन भयावह होती जा रही है। इस बीच कटनी में डेंगू को लेकर हालात यह है कि बुधवार को रैपिड जांच में दो मरीजों में डेंगू के लक्षण मिलने के बाद पुष्टि के लिए नमूने जबलपुर भेजनी पड़ी। कटनी में डेंगू की जांच नहीं होने के बाद एक बार फिर स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल उठे तो पहले से डेंगू से निपटने की तैयारी में जुटे जिम्मेदारों की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया।

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा बताते हैं कि रैपिड जांच में दो मरीजों में डेंगू पॉजीटिव आने के बाद स्पष्ट जांच के रिपोर्ट के लिए नमूने जबलपुर भेजे हैं। वहां से रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

ऐसे समझें डेंगू की चुनौती से निपटने में जिम्मेदारों की बेपरवाही
- डेंगू की एलिसा जांच दो तरह से होती है। पांच दिन से पहले के बुखार के लिए एनएस-1 और पांच दिन से बाद के लिए आइजीएम किट।
- कटनी में एनएस-1 की जांच के लिए किट है, लेकिन आइजीएम किट खत्म हो जाने के बाद कई दिनों से नहीं आई।
- स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि पुणे से आइजीएम किट मंगवाई गई है, कटनी पहुंचते ही जांच की सुविधा उपलब्ध होगी।

भारत सरकार ने रैपिड जांच को नहीं माना सही फिर भी कटनी में डेंगू से लड़ाई इसी के भरोसे-
डेंगू की चुनौती से निपटने के लिए जरुरी है कि मरीज में बीमारी की समय पर सही पहचान हो। इसके लिए भारत सरकार ने रैपिड जांच को सही माना है। जानकार बताते हैं कि रैपिड जांच में किसी भी प्रकार का बुखार होने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। डेंगू की सटीक जांच के लिए एलिसा जांच ही सही है।

raghavendra chaturvedi Bureau Incharge
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